बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओं ये नारा सरकार का है, लेकिन बेटियां पूंछ रहीं हैं कि पढ़ें तो कैसे और कहां। रास्ते में छेड़छाड़ होती है, तो स्कूल 10 वीं तक ही है।
गोठड़ा ठप्पा डहीना के बाद स्कूल अपग्रेड करने की मांग को लेकर राजगढ़ गांव की छात्राओं ने स्कूल गेट पर ताला जड़कर धरने पर बैठ गईं। छात्राओं के साथ ग्रामीण और छात्राओं की मां भी धरने पर बैठ गई। इन लोगों का कहना है कि गांव का राजकीय उच्च विद्यालय अपग्रेड नहीं होने से 10वीं के बाद बेटियों को स्कूल छोड़ना पड़ रहा है।
स्कूल अपग्रेड करने की मांग को लेकर शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा से चंडीगढ़ और गुरुग्राम स्थित उनके आवास पर मिल चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है। राजस्थान के अंतिम छोर पर रेवाड़ी के अंतिम गांव में छात्राओं को मनाने एसडीएम, डीएसपी और जिला शिक्षा अधिकारी भी पहुंचे, लेकिन सभी ने मांग पूरी होने के बाद ही धरना उठाने की बात कही। इस दौरान एक छात्रा की तबीयत खराब होने पर उसको अस्पताल में भर्ती कराया गया।
तालाबंदी की सूचना के बाद पहुंचे प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को ग्रामीणों ने बताया कि गांव में 10वीं से आगे की शिक्षा लेने वाली बच्चियों की संख्या हर साल कम होती जा रही है। ऐसे में उनके सपने भी अधूरे रह रहे हैं। कारण 12वीं से कम शिक्षा की महत्ता कहीं नहीं है। पहले ग्रामीणों को आस थी कि स्कूल जल्द ही अपग्रेड होगा लेकिन धीरे-धीरे उम्मीद धूमिल हुई तो बच्चों की पढ़ाई भी 10वीं के आगे रुक गई।
ग्रामीणों का कहना है कि इस गांव से 12वीं की शिक्षा लेने के लिए कम से कम 10 किलोमीटर का सफर तय कर बालावास जाट जाना पड़ता है। इसके अलावा कुछ लड़कियां रेवाड़ी और सुलखा तक भी पढ़ने जाती हैं। रेवाड़ी से राजगढ़ के लिए तीन ही रोडवेज बसें चलती हैं। ऐसे में इन बसों में आने जाने की टाइमिंग कम ही मिलती है। पैदल या अन्य साधनों से आने के साथ ही बस में भी कभी-कभार रास्ते में छेड़खानी हो जाती है। छह महीने पहले ही छेड़खानी का बड़ा मामला सामने आया था। इसमें स्थानीय रामपुरा थाना पुलिस को शिकायत भी दी गई थी।