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जयंती विशेषः किसान का बेटा कैसे बना देश का राष्ट्रपति?

Tue, 05 May 2015 03:36 PM IST
राजीव शर्मा/अमर उजाला, संधवां,फरीदकोट(पंजाब)
राजीव शर्मा/अमर उजाला, संधवां,फरीदकोट(पंजाब) Updated Tue, 05 May 2015 03:36 PM IST
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जयंती विशेषः किसान का बेटा कैसे बना देश का राष्ट्रपति?

Giani Zail Singh: son of farmer to president of india, a report

पंजाब में एक किसान के घर में पैदा हुआ और राष्ट्रपति

के पद तक पहुंचा। आज उस शख्सियत की 99वीं जयंती है। इस मौके पर तस्वीरों में देखिए उनके जीवन का सफर। रिपोर्ट- राजीव शर्मा

जयंती विशेषः किसान का बेटा कैसे बना देश का राष्ट्रपति?

Giani Zail Singh: son of farmer to president of india, a report

यहां बात हो रही है पूर्व राष्ट्रपति स्व. ज्ञानी जैल सिंह की। इनका जन्म फरीदकोट रियासत के गांव संधवां में 5 मई, 1916 को एक साधारण किसान परिवार में हुआ। ज्ञानी जैल सिंह ने अपने साफ-सुथरे व्यक्तित्व की बदौलत भारत का सर्वोच्च नागरिक होने का मान हासिल किया था। भाई किशन सिंह की चार संतानों में से सबसे छोटे ज्ञानी जैल सिंह की भी धर्म के प्रति अटूट श्रद्धा थी।

जयंती विशेषः किसान का बेटा कैसे बना देश का राष्ट्रपति?

Giani Zail Singh: son of farmer to president of india, a report

उनकी 9 माह की आयु के समय मां इंद्री कौर का निधन होने के कारण मां की बड़ी बहन दया कौर ने उनका लालन पोषण किया। वह 15 वर्ष की आयु में स्वतंत्रता सेनानी बन गए। 1938 में राष्ट्रीय स्तर पर पंडित जवाहर लाल नेहरू की अगुवाई में चल रहे स्वतंत्रता संग्राम से प्रभावित होकर उन्होंने फरीदकोट में कांग्रेस समिति का गठन किया और खुद रियासती प्रजा मंडल आंदोलन में शामिल हुए।

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1946 में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ सत्याग्रह शुरू किया और यहां के हालातों के चलते 27 मई 1946 को पंडित जवाहर लाल नेहरू फरीदकोट पहुंचे। उस समय पंडित नेहरू ने ज्ञानी जैल सिंह की अगुवाई में पुरानी दाना मंडी में तिरंगा फहराकर स्वतंत्रता संग्राम को और तेज करने का एलान किया था। देश की आजादी के बाद 1949 में बनी पेप्सू सरकार में ज्ञानी जी राजस्व मंत्री बने। दूसरी बार उन्हें सिंचाई व लोक निर्माण मंत्रालय सौंपे गए। 1955 में उन्हें पेप्सू कांग्रेस का प्रधान नामजद किया गया।

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1956 से 1962 तक राज्य सभा के सदस्य रहे। 1962 में पंजाब विधानसभा का सदस्य चुने जाने पर उन्हें राज्यमंत्री बनाया गया। 1966 में प्रदेश कांग्रेस के प्रधान बने और 1972 में पंजाब विधान सभा में पूर्ण बहुमत हासिल करके पंजाब के मुख्यमंत्री का कार्यभार संभाला। 1979 में लोक सभा सांसद बनने पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार में उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री बनाया गया और अपने गुणों के चलते वह 25 जुलाई 1982 को भारत के 7वें राष्ट्रपति बने।

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