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फ्रेंडशिप डेः किसान की बैल से 22 साल की दोस्ती, किया कुछ ऐसा कि देखने वाले हैरान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
Updated Sun, 05 Aug 2018 08:32 PM IST
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किसान सुरेश
पूरी दुनिया में आज फ्रेंडशिप डे मनाया जा रहा है। आज लोग एक दूसरे को बधाई दे रहे हैं। दो इंसानों में दोस्ती होना आम बात है। लेकिन आज हम आपको एक किसान की कहानी बताएंगे। जिसने अपने बैल से ही दोस्ती कर ली और उसके लिए जो किया, देखकर हर किसी की आंखें खुली रह गई। देखिए तस्वीरें।
किसान सुरेश
दरअसल हम जिस किसान की बात कर रहे हैं वो रोहतक के लाखनमाजरा क्षेत्र के रहने वाले हैं। यहां, महम चौबीसी के सबसे बडे़ गांव मोखरा में किसान सुरेश मलिक ने अपने बैल का जीवन जग कर किसान और बैल की दोस्ती की नई कहानी लिख दी। 22 साल के बैल को भी शायद इसकी उम्मीद नहीं रही होगी। किसान सुरेश ने पूरे गांव को न्यौता दिया। एक तरफ हलवाई प्रसाद बनाने में लगे हैं तो दूसरी तरफ महिलाएं सत्संग कर मंगल गीत गा रही थी। शादी समारोह जैसा माहौल रहा। बैल को फूलमालाओं व नोटों की मालाओं से सजाया गया था।
किसान सुरेश
सुरेश ने इस बैल को बचपन से पाला है। इसी बैल ने उसके घर को धन से भरा है। हमेशा बैल को अपने बच्चों की तरह देखभाल कर पाला है। दो साल से बैल से काम लेना छोड़ रखा था और एक महीने से तो बैल ने खाना पीना भी छोड़ दिया है। परिवार इसकी सेवा में लगा है। बैल के नीचे गद्दा बिछाते हैं और हमेशा कूलर और पंखा चलाते हैं। अब बैल बूढ़ा हो चला है।
सुरेश ने सोचा क्यों न ऐसा काम किया जाए, जिससे बैल की आत्मा को शांति मिले। पूरी उम्र कमाने वाले बैल को परिवार के सदस्य की तरह घर में अपने आखिरी सांस लेने दें तो अच्छा है। किसान परिवार का कहना है कि बैल हमारे लिए देवता है। बाबा हरिदास मंदिर में ले जाकर महिलाओं ने पूजा अर्चना कर बैल को तिलक लगाया।
सुरेश ने सोचा क्यों न ऐसा काम किया जाए, जिससे बैल की आत्मा को शांति मिले। पूरी उम्र कमाने वाले बैल को परिवार के सदस्य की तरह घर में अपने आखिरी सांस लेने दें तो अच्छा है। किसान परिवार का कहना है कि बैल हमारे लिए देवता है। बाबा हरिदास मंदिर में ले जाकर महिलाओं ने पूजा अर्चना कर बैल को तिलक लगाया।
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किसान सुरेश
सुरेश के भाई संजय ने बताया कि गौमाता को मां का दर्जा दिया गया है तो बैल हमारे लिए देवता है। आज जीवनजग में पूरा गांव शामिल हो रहा है और इस तरह का आयोजन यदि कोई न भी कर सके तो कम से कम बैलों व गायों को खुला न छोड़कर घर में ही जगह दें। नवीता का कहना है कि गाय व बैल भी मनुष्य की तरह एक प्राणी हैं। जिस बैल से हमने सारी उम्र काम लिया हो आज उसे सरे बाजार व गलियों में अवारा बना देते हैं। यह समाज के लिए कलंक है। कम से कम जिस मां का दूध पीया और जिस बैल ने हमारा घर धन से भरा हो, उन्हें लावारिस नहीं छोड़ना चाहिए।
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किसान सुरेश
बैल के मालिक सुरेश मलिक का कहना है कि यदि हरियाणा में कोई भी किसान अपने बैल का जीवन जग करेगा तो वे उसे अपनी तरफ से 21 हजार रुपये इनाम देंगे। उनका कहना है कि किसान का दूसरा हाथ बैल ही होता है। हर किसान को कम से कम एक बैल तो घर में रखना चाहिए।