161 साल बाद भारत मां के उस देशभक्त के अवशेष मिले हैं, जो वर्षों से गुमनाम था। 1857 की क्रांति में रानी विक्टोरिया के सामने इन्हें तोप से उड़ा दिया गया था, जानिए कौन है।
1857 की क्रांति में मारे गए कई सैनिकों के नाम तो आपको याद होंगे, लेकिन हम ऐसे देशभक्त का नाम बता रहे हैं, जिसकी खोपड़ी इंग्लैंड में मिली है। उससे संबंधित अभिलेख देखे गए और रिसर्च में सामने आया कि वह हवलदार आलम बेग थे, जो विद्रोह कर रही 46 रेजीमेंट बंगाल नॉर्थ इंफ्रेंट्री बटालियन का नेतृत्व कर रहे थे। इंग्लैंड के वैज्ञानिक वेंगर ने खुलासा किया है कि वह उत्तर प्रदेश के कानपुर निवासी थे।
खोपड़ी मिलने के बाद इतिहासकारों ने सवाल उठाए तो फिर इसकी तफ्तीश हुई और आखिर में इस खोपड़ी पर मुहर लगी। यह स्वतंत्रता सेनानी आलम बेग की ही है। वैज्ञानिक वेंगर व उनके मित्रों ने पंजाब विश्वविद्यालय चंडीगढ़ के एंथ्रोपोलॉजी विभाग के प्रोफेसर जेएस सहरावत से संपर्क किया और उनके साथ पूरा रिसर्च साझा किया। अब प्रो. सहरावत ने उनसे खोपड़ी देने को चिट्ठी लिखी है और उन्हें आश्वासन भी मिला है।
1857 की क्रांति में मारे गए 282 सैनिकों की अमृतसर के अजनाला में मिली हड्डियों व अवशेषों पर प्रो. सहरावत शोध कर रहे हैं। इन्हीं सैनिकों का आलम बेग नेतृत्व कर रहे थे। क्रांति में शामिल 282 सैनिकों में से अकेले हवलदार आलम बेग बचे थे। उन्हें जम्मू के पास रावी नदी पर पकड़ लिया गया। ब्रिटिश कमिश्नर हेनरी कूपर को पता चला कि रानी विक्टोरिया आ रही हैं तो उन्हें आलम बेग का सिर भेंट करने की योजना बनाई।
सियालकोट (अब पाकिस्तान में) में रानी के सामने उसे तोप से उड़ा दिया गया। उनके सिर को ग्रिसली ट्रॉफी नाम दिया गया, यह सिर 1858 में इंग्लैंड ले जाया गया। अब हाल ही में इंग्लैंड के एसेक्स शहर स्थित लॉर्ड क्लाइड पब की बिक्री हुई तो नए पब मालिक ने सफाई की, उसमें खोपड़ी निकली। उसी की आंख में एक आधी गली हुई चिट्ठी थी। यह बात वैज्ञानिक वेंगर को पता लगी तो उन्होंने पूरा रिसर्च किया।