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पाकिस्तान में जन्मे 'फ्लाइंग सिख' मिल्खा सिंह से जुड़े 10 बड़े सीक्रेट
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 20 Nov 2016 07:24 PM IST
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मिल्खा सिंह
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आइए आपको बताते हैं 'फ्लाइंग सिख' मिल्खा सिंह की जिंदगी से जुड़े ऐसे अनकहे राज, जिनके बारे में आप जानते नहीं होंगे।
मिल्खा सिंह
मिल्खा सिंह आज तक के भारत के सबसे प्रसिद्ध और सम्मानित धावक हैं। कामनवेल्थ खेलो में भारत को स्वर्ण पदक दिलाने वाले वे पहले भारतीय हैं। उन्होंने रोम के 1960 ग्रीष्म ओलंपिक और टोक्यो के 1964 ग्रीष्म ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व किया था। इसके साथ ही उन्होंने 1958 और 1962 के एशियाई खेलो में भी स्वर्ण पदक जीता था। तभी उनको 'उड़न सिख' नाम दिया गया था।
मिल्खा सिंह
1960 के रोम ओलंपिक खेलों में उन्होंने पूर्व ओलंपिक कीर्तिमान तोड़ा, लेकिन पदक से वंचित रह गए। इस दौरान उन्होंने ऐसा नेशनल कीर्तिमान बनाया, जो लगभग 40 साल बाद जाकर टूटा। खेलों में उनके अतुल्य योगदान के लिये भारत सरकार ने उन्हें भारत के चौथे सर्वोच्च सम्मान पद्मश्री से भी सम्मानित किया है। पंडित जवाहरलाल नेहरू भी मिल्खा सिंह के खेल को देख कर उनकी तारीफ करते थे और उन्हें मिल्खा सिंह पर गर्व था।
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मिल्खा सिंह
मिल्खा सिंह का जन्म अविभाजित भारत के पंजाब में एक सिख राठौर परिवार में 20 नवम्बर 1929 को हुआ था, लेकिन कार्यालयी दस्तावेजों के अनुसार उनका जन्म 17 अक्टूबर 1935 को माना जाता है। अपने माँ-बाप की कुल 15 संतानों में वह एक थे। उनके कई भाई-बहन बचपन में ही गुजर गए थे। भारत के विभाजन के बाद हुए दंगों में मिल्खा सिंह ने अपने माँ-बाप और भाई-बहन खो दिया।
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मिल्खा सिंह
चार बार कोशिश करने के बाद वे सन् 1951 में सेना में भर्ती हुए। बचपन में वह घर से स्कूल और स्कूल से घर की 10 किलोमीटर की दूरी दौड़ कर पूरी करते थे और भर्ती के वक़्त क्रॉस-कंट्री रेस में छठे स्थान पर आये थे, इसलिए सेना ने उन्हें खेलकूद में स्पेशल ट्रेनिंग के लिए चुना था। मिल्खा सिंह को ओलंपिक खेलों में 20 पदक अपने नाम करने के कारण सफल धावक माना गया है, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है।