पति ने पहली बार किरण खेर का लिया 'अनुपम' इंटरव्यू्, देखिए?
बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर ने वैसे तो कई हीरो-हीरोइन का इंटरव्यू लिया है, लेकिन पहली बार जब वे पत्नी किरण खेर के सामने बैठे तो हालात कुछ नर्वस थे। देखिए, ये अनोखा इंटरव्यू।
पति ने पहली बार किरण खेर का लिया 'अनुपम' इंटरव्यू्, देखिए?
ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी अभिनेता ने सांसद का इंटरव्यू लिया हो। इस दौरान कुछ आम लोगों से जुड़े सवाल किए गए तो कुछ खट्टी-मीठी यादों पर आधारित। कंफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री और यंग इंडियंस चंडीगढ़ चैप्टर की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में सवाल-जवाब का बड़ा दिलचस्प दौर चला।
पति ने पहली बार किरण खेर का लिया 'अनुपम' इंटरव्यू्, देखिए?
अनुपम: चंडीगढ़ में बीते बचपन के बारे में बताएं।
किरण: यह शहर बहुत खूबसूरत है। सुबह एक-एक कर सभी सहेलियों के घर जाती थी और एक साथ साइकिल से कॉलेज के लिए निकलती थी। यह तो कॉलेज की बात है। इससे पहले स्कूल बंक करने की कोशिश कर फिल्म देखने की प्लानिंग करती थी, लेकिन स्कूल के गार्ड बाहर नहीं जाने देते थे। बंदिशों भरा समय था, लेकिन बहुत अच्छा था। एजुकेशन सिस्टम बहुत बेहतर था और लोग भी अच्छे व नॉलेजेबल थे। अब लोगों के पास पैसे आने से मोरल वैल्यू कम हो गई है।
पति ने पहली बार किरण खेर का लिया 'अनुपम' इंटरव्यू्, देखिए?
अनुपम: कॉलेज में आकर क्या करना चाहते थे?
किरण: थिएटर ज्वाइन करने से पहले कॉलेज में जब एमए ज्वाइन किया था, उस वक्त में आईएफएस बनना चाहती थी। बाद में थिएटर की ओर रुझान हुआ। डांस और एक्टिंग पसंद थी। इसलिए थिएटर ज्वाइन कर लिया।
अनुपम: अगर आईएफएस होतीं तो लाइफ किस तरह अलग होती?
किरण: थिएटर के बाद मुंबई आ गई, लेकिन अगर आईएफएस या आईएएस होती तो इसे भी इंज्वाय करती। कई आईएएस बहुत मल्टी टैलेंटेड हैं। आज भी अपने एक्टिंग, डांसिंग और सिंगिंग के शौक को पूरे करते हैं। इससे दिमागी तनाव भी दूर होता है।
पति ने पहली बार किरण खेर का लिया 'अनुपम' इंटरव्यू्, देखिए?
अनुपम: लोगों की नकारात्मक प्रतिक्रियाओं से कैसे निपटती हैं?
किरण: प्रतिक्रियाएं या अवार्ड इतने जरूरी नहीं हैं। जरूरी है कि आप अपने आप पर भरोसा रखें और अपना काम करते रहें।
अनुपम: आप रोती भी हैं?
किरण: एक-दो महीने में एक बार। चुनाव प्रचार के दौरान एक बार रोई थी। रोजाना कई-कई सभाएं होती थीं। लोग कहते थे आप यह करें, यह न करें। चुनाव जीतने के बाद भी तीन बार रोई थी। ‘मैं ता रोज सवैरे उठके काम करना, लोग जित्थे बुलाणदें हां चली जांदी हां’।