जम्मू-कश्मीर के पुंछ सेक्टर में शहीद हुए सैनिक गुरसेवक सिंह की शहादत के बाद पहली तस्वीरें सामने आ गई हैं। आप भी कीजिए अंतिम दर्शन।
तरनतारन के गांव गांव वराणा निवासी 23 वर्षीय सिपाही गुरसेवक सिंह 22 सिख रेजिमेंट का सिपाही था। गुरसेवक सिंह जम्मू-कश्मीर स्थित लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) की कृष्णाघाटी पर तैनात था। पाकिस्तान की तरफ से हुई फायरिंग के दौरान गुरसेवक सिंह को भी गोली लगी और वो देश के लिए शहीद हो गए।
गुरसेवक सिंह को पाकिस्तान की ओर से हुई गोलाबारी के दौरान शहादत देने की खबर जब गांव पहुंची तो परिवार में मातम पसर गया। मां बलजीत कौर, बहनें रमनजीत कौर, कंवलजीत कौर का रो-रोकर बुरा हाल था, वहीं शहीद गुरसेवक सिंह का बड़ा भाई जसबीर सिंह गहरे सदमे में था।
जम्मू कश्मीर के पुंछ में पाकिस्तान की गोलाबारी में शहीद हुए बहादुर सैनिक गुरसेवक सिंह की 13 फरवरी को शादी थी। गुरसेवक सिंह 2013 में सेना में भर्ती हुए थे। वो सिख रेजीमेंट के सिपाही थे। देश के लिए मर मिटने के जुनून के साथ गुरसेवक ने सेना की वर्दी पहनी थी और वाकई वो देश के लिए मर मिटे।
पिता बलविंदर सिंह भले ही पुत्र की शहादत की खबर के बाद आंखों से आंसू बहा रहा था, लेकिन बार-बार गर्व से ये कह रहा था कि देश-कौम दे लेखे लग्ग गिया ऐ अज्ज मेरा गुरसेवक। 25 मार्च 2013 को सिख रेजिमेंट में भर्ती हुआ 23 वर्षीय गुरसेवक सिंह दो बहनों का बड़ा भाई था।