देश के सभी सरकारी और गैर सरकारी कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर बनना अब आसान नहीं होगा। कई नियमों में कड़ा बदलाव किया गया है, देखिए।
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दरअसल, मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने देश के सभी सरकारी और गैर सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए योग्यता निर्धारित कर दी है। इसके तहत अब एमडी और एमएस करने वाले डॉक्टरों को मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेज में एक साल की सीनियर रेजिडेंट की जॉब करनी होगी। इसके बाद ही वे सहायक प्रोफेसर के लिए आवेदन कर पाएंगे।
इसका असर अब देश के तकरीबन 15000 एमडी और एमएस डॉक्टरों पर पडे़गा। दरअसल, स्वास्थ्य विभाग के सामने चुनौती है कि देश में जल्द से जल्द एक्सपर्ट डॉक्टरों की संख्या को बढ़ाया जाए, लेकिन डॉक्टरों की गुणवत्ता में कोई खामी न रहे। इसके लिए एमसीआई ने सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए सीनियर रेजिडेंट का अनुभव होना अनिवार्य कर दिया है।
एम्स दिल्ली, पीजीआईएमएस चंडीगढ़ और दक्षिण में वैलोर मेडिकल कॉलेज में पहले से ही तीन साल का सीनियर रेजिडेंट अनुभव अनिवार्य है। इसकी मुख्य वजह यहां सीनियर रेजिडेंट की नौकरी करने वालों की भीड़ होना है। यहां छंटनी करने के लिए सख्त नियम बनाए गए हैं। अब पीजीआईएमएस रोहतक में यह एक साल का अनुभव अनिवार्य है।
नए नियमानुसार यदि डॉक्टर अपनी एमडी और एमएस की डिग्री कर चुका है और उसकी आयु 40 वर्ष से अधिक हो गई है तो वह सीनियर रेजिडेंट पद के लिए आवेदन नहीं कर सकता। इसका खामियाजा यह होगा कि वह डॉक्टर किसी संस्थान में सहायक प्रोफेसर की पोस्ट के लिए आवेदन नहीं कर सकेगा। इस नियम का असर कई राज्यों में डॉक्टरों पर पडे़गा।