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हनीप्रीत अब उठाएगी बड़ा कदम, राम रहीम की 'दुलारी' का नया सच आया सामने...जानिए

Sun, 17 Jun 2018 09:53 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला Updated Sun, 17 Jun 2018 09:53 AM IST
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dera sacha sauda chief ram rahim, honeypreet bail petition in punjab haryana highcourt
हनीप्रीत इन्सां
जेल में रहते हुए हनीप्रीत एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। राम रहीम की इस 'दुलारी' का एक नया सच सामने आया है। दरअसल, डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की सबसे बड़ी राजदार और पंचकूला हिंसा मामले की आरोपी हनीप्रीत को अदालत से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने हनीप्रीत की जमानत याचिका खारिज कर दी है।
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हनीप्रीत से सवाल करती पुलिस
अब बचाव पक्ष हनीप्रीत की जमानत के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी है। जमानत याचिका में हनीप्रीत ने खुद के महिला होने, हिंसा में कोई हाथ न होने और एफआईआर में बाद में नाम जोड़े जाने समेत कई दलील देकर जमानत मांगी थी लेकिन वीरवार को नीरजा कुलवंत कल्सन की अदालत में जब जमानत याचिका खारिज करने का फैसला आया तो हनीप्रीत और उनके करीबियों के चेहरे मुरझा गए। हालांकि जमानत के लिए हनीप्रीत के वकील अब हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में हैं।
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राम रहीम की 'लाडली' हनीप्रीत
25 अगस्त, 2017 को राम रहीम को दोषी करार दिए जाने के बाद यहां भड़की हिंसा के मामले में हनीप्रीत को आरोपी बनाया गया था। हनीप्रीत के खिलाफ देशद्रोह, हिंसा को भड़काने सहित अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में जमानत याचिका में हनीप्रीत ने बताया था कि वह एक महिला है और 25 अगस्त 2017 को पंचकूला में जब हिंसा हो रही थी, उस वक्त वह डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के साथ अदालत में थी।
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पंचकूला कोर्ट में हनीप्रीत
हनीप्रीत का कहना है कि अदालत से वह राम रहीम के साथ सीधे सुनारिया जेल रोहतक चली गई। हिंसा में उसका कहीं कोई रोल नहीं है। एफआईआर में उसका नाम भी बाद में शामिल किया गया। इतना ही नहीं, पुलिस ने उसे गिरफ्तार नहीं किया, बल्कि वह खुद तीन अक्तूबर 2017 को आत्मसमर्पण करने आई थी। मामले में दर्ज एफआईआर नंबर-345 के अन्य 15 आरोपितों को जमानत मिल चुकी है, तो 245 दिन जेल में रहने के बाद वह जमानत की हकदार हैं।
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पंचकूला कोर्ट में हनीप्रीत
यह बातें पंचकूला की एक अदालत में हनीप्रीत ने अपनी जमानत याचिका में कहीं। हनीप्रीत के एडवोकेट ने लगाई गई जमानत याचिका में बहस करते हुए दलील दी थी कि हनीप्रीत को जबरन मामले में फंसाया जा रहा है। हनीप्रीत से पुलिस को कोई खास रिकवरी भी नहीं हुई, जिसका हिंसा में इस्तेमाल किया गया। पंचकूला पुलिस ने इस जमानत याचिका का विरोध करते हुए कहा था कि हनीप्रीत इस हिंसा और देशद्रोह की मुख्य साजिशकर्ता है।

 
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