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5 साल की बच्ची को भूख न लगी तो जो कदम उठाया, वो जानलेवा साबित
अमर उजाला ब्यूरो, यमुनानगर
Updated Sat, 13 Aug 2016 08:46 AM IST
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doctor beaten by parents
- फोटो : amar ujala
नंद ज्वैलर्स के मालिक की 5 साल की पोती को भूख नहीं लगी तो परिवारवालों ने जो कदम उठाया, वो बच्ची के लिए जानलेवा साबित हुआ। देखिए, पूरी रिपोर्ट
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- फोटो : file photo
मामला, यमुनानगर से जुड़ा है। छोटी लाइन निवासी नंद ज्वैलर्स के संचालक संदीप कुमार की 5 वर्षीय पोती तनवी को भूख नहीं लगती थी। 8 अगस्त को परिवार घर के नजदीक लगते अस्पताल में बच्ची को दिखाने लाए। यहां पर बच्ची
का ब्लड सैंपल लिया जिसके बाद वे घर चले गए। थोड़ी ही देर में परिजन फिर आए और कहने लगे कि बच्ची की तबीयत खराब हो गई है जिसके बाद उसे दाखिल कर लिया गया।
का ब्लड सैंपल लिया जिसके बाद वे घर चले गए। थोड़ी ही देर में परिजन फिर आए और कहने लगे कि बच्ची की तबीयत खराब हो गई है जिसके बाद उसे दाखिल कर लिया गया।
doctor beaten by parents
- फोटो : amar ujala
परिवार का आरोप है कि अस्पताल में गलत इंजैक्शन देने की वजह से उनकी बेटी की तबीयत बिगड़ी है। गंभीर हालत में डॉक्टर उसे निजी अस्पताल ले गए जहां पर दिन-प्रतिदिन उसकी तबीयत बिगड़ती चली गई। उसी रात बच्ची को
वैंटीलेटर पर लगा दिया तथा बी.पी. 60 तक पहुंच गया और बुधवार अल सुबह बच्ची ने आखिरी सांस ली। परिवार ने बच्ची का अंतिम संस्कार कर दिया। परिवार का कहना है कि इतने बड़े हादसे के बाद भी अस्पताल प्रबंधन ने उनकी
सुध नहीं ली।
वैंटीलेटर पर लगा दिया तथा बी.पी. 60 तक पहुंच गया और बुधवार अल सुबह बच्ची ने आखिरी सांस ली। परिवार ने बच्ची का अंतिम संस्कार कर दिया। परिवार का कहना है कि इतने बड़े हादसे के बाद भी अस्पताल प्रबंधन ने उनकी
सुध नहीं ली।
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doctor beaten by parents
- फोटो : amar ujala
अस्पताल के संचालक विमल कम्बोज का कहना है कि उनके स्तर पर कोई लापरवाही नहीं है। एक एमएल खून फ्रैश सुई से सैंपल के तौर पर लिया गया। न ही उसे कोई इलाज दिया गया और न ही कोई दवाई। ऐसे में लापरवाही का
सवाल ही नहीं उठता। बुधवार सायं ही परिवार के 10-12 लोग उनसे मिलने आए थे तब कोई दिक्कत नहीं थी। यदि दिक्कत थी तो परिवार पोस्टमार्टम करवाता, वह हर तरह की जांच के लिए तैयार हैं।
सवाल ही नहीं उठता। बुधवार सायं ही परिवार के 10-12 लोग उनसे मिलने आए थे तब कोई दिक्कत नहीं थी। यदि दिक्कत थी तो परिवार पोस्टमार्टम करवाता, वह हर तरह की जांच के लिए तैयार हैं।
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- फोटो : amar ujala
आईएमए के जिलाध्यक्ष डा. विक्रम भारती का कहना है कि परिवार को कानून हाथ में नहीं लेना चाहिए था। दिक्कत थी तो शिकायत करते। जांच में सबकुछ स्पष्ट हो जाता। 2008 में अस्पताल व मरीज के लिए कानून बना था कि
कोई भी कानून को हाथ में नहीं लेगा। मसलन मरीज को दिक्कत है तो वह तोडफ़ोड़ की बजाय शिकायत करे।
कोई भी कानून को हाथ में नहीं लेगा। मसलन मरीज को दिक्कत है तो वह तोडफ़ोड़ की बजाय शिकायत करे।