कोरोना संक्रमण दिल का बहुत बड़ा और घातक दुश्मन है। यह दिल की पूरी बनावट में ही बदलाव कर देता है। इसलिए दिल के मरीजों को विशेष सावधानियां बरतने की जरूरत है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
कोरोना दिल की मांसपेशियों की सूजन बढ़ा रहा है और इससे मांसपेशियां कमजोर होकर ब्लॉक हो रही हैं। यही वजह है कि दिल के रोगियों के लिए कोरोना जानलेवा बन रहा है। किसी हृदय रोगी को कोरोना संक्रमण हो जाए तो उसकी सांस फूलने लगती है और मौत का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए चिकित्सकों ने अब खून को जमने से रोकने वाली दवाओं पर जोर देना शुरू कर दिया है। एंटी कोग्यूलेंट दवाएं चिकित्सक अब मरीजों को देने लगे हैं।
जर्मनी की यूनिवर्सिटी अस्पताल फ्रैंकफर्ट में कोरोना संक्रमित 100 मरीजों में से 80 की एमआरआई जांच की गई तो पता चला कि कोरोना वायरस से मरीजों के दिल की बनावट में परिवर्तन हुआ है, जिसके बाद हृदय रोग विशेषज्ञों की चिंता बढ़ना स्वभाविक है। कोरोना वायरस से मौत के अधिकतर मरीज ऐसे हैं, जो दिल की बीमारी से ग्रस्त हैं। यह भी सामने आया है कि संक्रमित मरीजों में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है, जिसका हृदय की गति पर असर पड़ रहा है।
दिल के रोग विशेषज्ञ डॉ. धीरज भाटिया का कहना है कि कोरोना अपनी म्युटेशन लगातार कर रहा है। अभी इस पर स्टडी पूरी नहीं हो पाई है। अब कोरोना दिल के रोगियों के लिए जानलेवा बन रहा है। कोरोना के कारण हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक के केस बढ़ रहे हैं। एक स्वस्थ व्यक्ति की सामान्य हृदय गति 60 और 100 बीट प्रति मिनट के बीच होती है, लेकिन कोरोना संक्रमित मरीजों की हृदय गति 30 से 40 बीट प्रति मिनट तक भी नोट की जा रही है।
डॉ. धीरज भाटिया का कहना है कि कोरोना संक्रमित मरीज की रक्तवाहिनियों में खून के थक्के भी बन जाते हैं, जिस कारण खून को जमने से रोकने के लिए दवाओं पर जोर दिया जा रहा है। मरीजों को रिवारोक्साबेन व एपिक्साबेन सॉल्ट की दवाएं लगातार दी जा रही हैं, ताकि खून शरीर में पतला रहे और जम न सके। दोनों दवाएं थक्कारोधी हैं, जिसका उपयोग रक्त के थक्कों के उपचार और रोकथाम के लिए किया जाता है।