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करनालः कोरोना संकट से पसरा है सन्नाटा, लॉकडाउन से पहले और अनलॉक के बाद के हालात
Mon, 24 Aug 2020 04:07 PM IST
खुशबू गोयल
अमर उजाला, करनाल(हरियाणा)
अमर उजाला, करनाल(हरियाणा)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 24 Aug 2020 04:07 PM IST
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लॉकडाउन से पहले ऐसे थे हालात
- फोटो : अमर उजाला
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कोरोना संकट के कारण लगे लॉकडाउन को पांच महीने हो चुके हैं, इस दौरान हरियाणा में पहले और अब में बहुत कुछ बदला है। रहन-सहन, खाने पीने, बाजार जाने, सैर सपाटा करने, पढ़ाई लिखाई, पूजा करने आदि के तरीकों में अहम बदलाव आया है। ऐसे में शहर के कुछ प्रमुख स्थल जहां लॉकडाउन से पहले काफी चहल पहल रहती थी, अब अनलॉक शुरू होने के बाद भी वहां सन्नाटा पसरा है, पूर्व की स्थिति बहाल नहीं हो सकी है। आइये, कर्ण नगरी करनाल के कुछ प्रमुख स्थानों की पहले और अब की स्थिति को कैमरे की नजर से देखते हैं।
लॉकडाउन से पहले और अनलॉक के बाद के हालात
- फोटो : अमर उजाला
कर्ण झील
यह स्थान महाभारत काल से जुड़ा बताया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस क्षेत्र के राज्य को दुर्योधन ने अपने मित्र कर्ण को सौंपा था। राजा कर्ण इसी झील में स्नान किया करते थे। यहीं पर कर्ण ने अपने कवज कुंडल देवराज इंद्र को सौंपे थे। जिसके बाद ही कर्ण को दानवीर नाम मिला, इसलिए इस झील का नाम कर्ण झील पड़ गया। यहां दूर दूर से लोग आते हैं। हर रोज रौनक रहती थी, लेकिन लॉकडाउन में पहली बार यह झील सूख गई थी, कछुआ, मछलियां आदि मर गई थी, अनलॉक में इसमें पानी तो आ गया लेकिन अभी भी लोगों की आवाजाही काफी कम होने से यहां सन्नाटा ही रहता है।
यह स्थान महाभारत काल से जुड़ा बताया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस क्षेत्र के राज्य को दुर्योधन ने अपने मित्र कर्ण को सौंपा था। राजा कर्ण इसी झील में स्नान किया करते थे। यहीं पर कर्ण ने अपने कवज कुंडल देवराज इंद्र को सौंपे थे। जिसके बाद ही कर्ण को दानवीर नाम मिला, इसलिए इस झील का नाम कर्ण झील पड़ गया। यहां दूर दूर से लोग आते हैं। हर रोज रौनक रहती थी, लेकिन लॉकडाउन में पहली बार यह झील सूख गई थी, कछुआ, मछलियां आदि मर गई थी, अनलॉक में इसमें पानी तो आ गया लेकिन अभी भी लोगों की आवाजाही काफी कम होने से यहां सन्नाटा ही रहता है।
लॉकडाउन से पहले और अनलॉक के बाद के हालात
- फोटो : अमर उजाला
घंटाघर चौक
यह शहर का सबसे महत्वपूर्ण चौराहा है, जो पूरे शहर को जोड़ता है। पहले इसका नाम कमेटी चौक था, अब घंटाघर चौक कहते हैं लेकिन अब इसका नाम महर्षि वाल्मीकि चौक किया गया है। यह पुराना बाईपास भी हैं। लॉकडाउन से पहले यहां पैर रखने की भी जगह मिलना मुश्किल हो जाता था लेकिन अब अनलॉक होने के बावजूद भी अभी तक पहले जैसी रौनक नहीं लौट पाई है।
यह शहर का सबसे महत्वपूर्ण चौराहा है, जो पूरे शहर को जोड़ता है। पहले इसका नाम कमेटी चौक था, अब घंटाघर चौक कहते हैं लेकिन अब इसका नाम महर्षि वाल्मीकि चौक किया गया है। यह पुराना बाईपास भी हैं। लॉकडाउन से पहले यहां पैर रखने की भी जगह मिलना मुश्किल हो जाता था लेकिन अब अनलॉक होने के बावजूद भी अभी तक पहले जैसी रौनक नहीं लौट पाई है।
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लॉकडाउन से पहले और अनलॉक के बाद के हालात
- फोटो : अमर उजाला
मुगल कैनाल सब्जी मंडी
यह शहर का पॉश इलाका माना जाता है। बताते यहां से एक का एक बड़ा नाला गुजरता है, जिसके कारण पहले यहां काफी गंदगी रहती थी लेकिन इस नाले को कवर किए जाने के बाद यहां शहर की बड़ी मार्केट बन गई है। कोचिंग सेंटर के साथ-साथ अलग अलग वस्तुओं की दुकानें हैं। सब्जी मंडी में यहां के पॉश कालोनियों के लोग सब्जियां खरीदने आते हैं, क्योंकि यहां कार पार्किंग की बड़ी सुविधा है। इलाका काफी हरा भरा हो गया है। अनलॉक के बावजूद अभी यहां पुरानी स्थिति बहाल नहीं हो सकी है।
यह शहर का पॉश इलाका माना जाता है। बताते यहां से एक का एक बड़ा नाला गुजरता है, जिसके कारण पहले यहां काफी गंदगी रहती थी लेकिन इस नाले को कवर किए जाने के बाद यहां शहर की बड़ी मार्केट बन गई है। कोचिंग सेंटर के साथ-साथ अलग अलग वस्तुओं की दुकानें हैं। सब्जी मंडी में यहां के पॉश कालोनियों के लोग सब्जियां खरीदने आते हैं, क्योंकि यहां कार पार्किंग की बड़ी सुविधा है। इलाका काफी हरा भरा हो गया है। अनलॉक के बावजूद अभी यहां पुरानी स्थिति बहाल नहीं हो सकी है।
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लॉकडाउन से पहले और अनलॉक के बाद के हालात
- फोटो : अमर उजाला
जीटी रोड
यह रोड दिल्ली से चंडीगढ़ जाने वाला प्रमुख हाइवे हैं। करनाल दिल्ली व चंडीगढ़ के मध्य स्थित है। लॉकडाउन से पहले चौबीस घंटे इस मार्ग पर वाहन फर्राटा भरते थे। लेकिन लॉकडाउन में सिर्फ आवश्यक वस्तुओं को ले जाने वाले वाहन ही दिखे। अब अनलॉक चल रहा है लेकिन इसके बावजूद अभी इस मार्ग से गुजरने वाले वाहनों की संख्या आधे से भी कम है।
यह रोड दिल्ली से चंडीगढ़ जाने वाला प्रमुख हाइवे हैं। करनाल दिल्ली व चंडीगढ़ के मध्य स्थित है। लॉकडाउन से पहले चौबीस घंटे इस मार्ग पर वाहन फर्राटा भरते थे। लेकिन लॉकडाउन में सिर्फ आवश्यक वस्तुओं को ले जाने वाले वाहन ही दिखे। अब अनलॉक चल रहा है लेकिन इसके बावजूद अभी इस मार्ग से गुजरने वाले वाहनों की संख्या आधे से भी कम है।