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तस्वीरों में देखिए, चंडीगढ़ लिटरेचर फेस्टिवल का दूसरा दिन

Sat, 07 Nov 2015 02:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 07 Nov 2015 02:54 PM IST
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तस्वीरों में देखिए, चंडीगढ़ लिटरेचर फेस्टिवल का दूसरा दिन

chandigarh literature fest in photos

चंडीगढ़ लेक क्लब में लिटरेचर फेस्ट चल रहा है। इसमें देश भर के जाने-माने साहित्यकार, लेखक और समीक्षक शिरकत करने पहुंचे हुए हैं। तस्वीरों में एक झलक।

तस्वीरों में देखिए, चंडीगढ़ लिटरेचर फेस्टिवल का दूसरा दिन

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फेस्ट का आयोजन अदब फाउंडेशन की ओर से किया जा रहा है। इसमें लेखकों और समीक्षकों के बीच चर्चाओं के साथ फिल्म प्रदर्शित की गई। पहले सत्र में प्रोफेसर अक्षय कुमार ने इटिंग गॉड किताब की लेखिका अरुंधति सुब्रमण्यम से चर्चा छेड़ी। इस पुस्तक में 48 भक्तिकालीन कवियों की रचनाओं का अरुंधति समेत कई समकालीन कवियों ने अंग्रेजी में अनुवाद किया है। अरुंधति ने कविताओं के चार संग्रह प्रकाशित किए हैं।

तस्वीरों में देखिए, चंडीगढ़ लिटरेचर फेस्टिवल का दूसरा दिन

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इनके अलावा कन्फ्रंटिंग लव किताब में उन्होंने अंग्रेजी में लिखी भारतीय प्रेम कविताओं का संपादन किया है। उन्होंने रहीम, तुकाराम और अन्य कवियों का जिक्र करते हुए कहा कि इन कविताओं में भक्त को ईश्वर के सम्मुख समर्पित होते दर्शाया गया है। भक्ति कविताएं सिर्फ भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं, वरन इनमें प्रेम, वासना, क्रोध आदि का भी पर्याप्त समावेश है और संपूर्ण भाव में ये आध्यात्मिक प्रतीत होती हैं।

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दूसरे सत्र में, लेखक किरन नागरकर ने जय अर्जुन सिंह से आपातकाल पर लिखी उनकी किताब बैडटाइम स्टोरी के बारे में बातचीत की। आपातकाल समाप्त होने से ठीक पहले, 1977 में लिखा यह नाटक, पाबंदियों के चलते 17 साल तक प्रकाशित न हो सका। इसमें महाभारत से ली गयी कहानियां हैं, जिनमें धारणाओं और हकीकतों का घालमेल है।

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आउट ऑफ प्रिंट में छात्रों को लेखन के विविध पहलुओं से दो-चार कराया गया। इन छात्रों में हर आयु और वर्ग के लोग शामिल थे। अलताफ टायरवाला और सआदत हसन मंटो की दो कहानियों पर अलग दृष्टि से चर्चा की गई। इंदिरा ने बताया कि कैसे अल्ताफ और मंटो बिना हिंसा शब्द का जिक्र किए हिंसात्मक भीड़ और इसके पीछे के कारणों का वर्णन करते हैं।

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