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जानिए क्यों एक जवान ने लिखा- हमें यहां बहुत मारा-पीटा जाता है, घर से किसी को फौज में मत भेजना

Sun, 09 Dec 2018 03:40 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 09 Dec 2018 03:40 PM IST
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British Officers did not send Indian soldiers's letter to home in first world war
world war - फोटो : फाइल फोटो

सैनिकों से जुड़े दर्द भरे किस्से कभी न कभी हमारे सामने आ ही जाते हैं। लेकिन सबसे बड़ा दर्द वो होता है जब उनके साथ अनुचित व्यवहार किया जाता है। कई बार सैनिक इस व्यथा को जाहिर भी करते हैं। आज हम भारतीय सैनिकों की वो दर्दभरी कहानी आपके सामने लेकर आए हैं, जिसे पढ़कर आप भी हैरान रह जाएंगे।

British Officers did not send Indian soldiers's letter to home in first world war
first world war - फोटो : Magnolia Box

यह बात तब की जब देश आजाद नहीं हुआ था। देश में ब्रिटिश हूकूमत थी। अंग्रेजों के राज में सैनिकों के साथ कई तरह के पक्षपात की कहानी पहले भी सामने आ चुकी हैं। लेकिन ये कहानी थोड़ी सी अलग है। हमारे जांबाज सैनिकों को अपनी बात घरवालों तक पहुंचाने में कठिनाईयों से गुजरना पड़ता था।

सन 1914 में प्रथम विश्व युद्ध शुरू हुआ। इस युद्ध में ब्रिटेन की तरफ से भारतीय सैनिक भी लड़े। सैनिक जब युद्ध क्षेत्र से कोई खत घर के लिए लिखते थे तो अंग्रेज अफसर उसे पहले चेक करते थे। 

British Officers did not send Indian soldiers's letter to home in first world war
world war

पांच साल से अधिक ये जवान अपने घरों से दूर रहे। ऐसे में खत ही इन जवानों के लिए अपने घरवालों से जुड़े रहने का एक जरिया था। लेकिन इसके लिए भी भारतीय जवानों को ब्रिटिश आर्मी अफसरों की दगाबाजी सहनी पड़ती थी। ये अफसर जवानों के वही पत्र घर भेजते थे जो उनके अनुकूल होते थे बाकी खतों को वो रख लेते थे और इसका पता जवानों को नहीं चलता था।

इन्हीं खतों पर वर्ष 2004 से रिसर्च कर रही डा. प्रभजोत परमार ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि अब भी ब्रिटिश लाइब्रेरी लंदन में ऐसे काफी संख्या में खत पड़े हैं। इन खतों का अंग्रेजों ने बाकायदा अंग्रेजी अनुवाद करवाकर वहां सहेज कर रखा है। 

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British Officers did not send Indian soldiers's letter to home in first world war
प्रथम विश्व युद्ध

एक जवान से मोर्चे से लिखा कि, हमें यहां बहुत मारा-पीटा जाता है, हालात बहुत खराब है, घर से किसी को भी फौज में भर्ती मत होने देना। वहीं दूसरे जवान ने लिखा कि, हमारे साथ यहां भेड़-बकरियों से भी ज्यादा बदतर हालात हो रहे हैं, हालात हम बता नहीं सकते।

एक अन्य जवान ने लिखा, हम घायल हो गए, हमें तीन महीने तक अस्पताल में ही रखा गया, बाहर आने तक की इजाजत नहीं दी गई, पता नहीं कब लौटेंगे।

- एक जवान ने लिखा, मुझे गोली लगी है, सोचा था शायद वापस आ जाऊंगा, लेकिन इलाज के बाद मुझे दोबारा मोर्चे पर भेजा जाएगा, मन बहुत उदास है।

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British Officers did not send Indian soldiers's letter to home in first world war
world war

- एक जवान ने लिखा, युद्ध के हालात बहुत खराब हैं, हमारे कई साथी मारे जा चुके हैं, बहुत से घायल हो गए, मालूम नहीं जिंदा लौटूंगा या नहीं।

- एक जवान ने लिखा, युद्धस्थल पर ही खाना बनाना पड़ता है, कई-कई रातें जागना पड़ता है, परिस्थितियां बहुत ही मुश्किल है, कब लौटेंगे पता नहीं। 
 

यह बात बिल्कुल सच है कि अंग्रेजों के शासनकाल में भारतीयों और भारतीय सैनिकों के साथ अमानवीय बर्ताव होता था। उपरोक्त सैनिकों की लिखी पंक्तियां उसी की एक बानगी हैं। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान भारतीय जवानों के साथ क्रूर व्यवहार हुआ। हजारों की तादाद में ऐसे पत्र हैं जिनमें इन सब बातों का जिक्र है। उस समय की सैनिकों के साथ जो होता था उसे वो खतों में लिखते थे। हालांकि अंग्रेज इसे छिपा लेते थे। 

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