घर में शादी है, बैंड-बाजा और बारात भी तैयार है, लेकिन दूल्हा/दुल्हन और उसके घरवाले बैंकों के चक्कर काट रहे हैं। कारण, शादी पर होने वाले खर्च की पेमेंट के लिए बैंक से कैश का इंतजाम करना है। इस काम के लिए दूल्हा पक्ष हो या दुल्हन उनके परिवार से अधिकतर लोग रोजाना बैंकों के चक्कर काट रहे हैं। बैंकों की ओर से कैश के लिए जिन जरूरी प्रमाण या दस्तावेजों की लिस्ट दी गई है उसे पूरा करने में लोगों के पसीने छूट रहे हैं।
दुल्हा और दुल्हन संग बैंड-बाजा तो है तैयार, लेकिन ये बनी बड़ी मुश्किल
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केंद्र सरकार की ओर से शादी के लिए लोगों को ढाई लाख रुपये तक कैश देने की योजना अब तक पूरी तरह से मूर्त रूप नहीं ले पाई है। अधिकतर बैंकों को अब जाकर आरबीआई से सर्कुलर मिला है। सर्कुलर के तहत मांगे गए दस्तावेज की लंबी फेहरिस्त देखकर शादी के लिए कैश लेने आने वाले भी सिर पकड़ते देखे जा रहे हैं। वहीं बैंक अधिकारी भी आरबीआई की ओर से जारी दिशा-निर्देश के बाद लोगों को इसमें किसी तरह की राहत दे पाने में असमर्थता जता रहे हैं।
कुलदीप ने बताया कि कई दिन से वह बैंकों के चक्कर काट रहे हैं। पहले बैंक सर्कुलर न मिलने की बात कह रहे थे और अब जब सर्कुलर आ गया है तो उसमें मांगे गए प्रमाण और दस्तावेज देख सिर चकरा रहा है। बैंक प्रूफ के तौर पर शादी का कार्ड, बैंक्वेट हॉल, कैटरिंग की एडवांस बुकिंग की रसीद मांग रहे हैं। इसके अलावा शादी पर जिन लोगों को भुगतान करना है उन सबकी लिस्ट मांग रहे हैं। वहीं ऐसे लोग जिन्हें भुगतान करना है और उनका बैंक अकाउंट नहीं है तो उनसे इसकी अंडरटेकिंग मांगी जा रही है।
सर्कुलर के तहत घोड़ीवाला, बैंड वाले, ढोल वाला आदि की अंडरटेकिंग लानी होगी कि उनके पास किसी तरह का बैंक खाता नहीं है। कुलदीप सिंह का कहना है कि पहले तो ये शर्तें सुनकर उनका दिमाग चकरा गया, लेकिन बावजूद इसके वह इन सब के पास गए तो उनका साफ कहना था कि शादी में काम करवाना है तो ठीक है, नहीं तो बुकिंग कैंसिल करवा लें। वह किसी तरह की अंडरटेकिंग नहीं दे सकते। ऐसे में अब वह परेशान है कि वह जांए तो जाएं कहां।
कैश कि किल्लत बरकरार- नोटबंदी के बाद से अब तक लोगों को अपने ही खातों से पैसे निकालने में परेशानी हो रही है। बैंकों में कैश आ तो रहा है, लेकिन 2-3 घंटे में ही खत्म हो रहा है। लोग पहले एटीएम में लंबी लाइन में लग रहे हैं, वहां कैश नहीं मिल रहा तो ब्रांचों में जा रहे हैं। जब तक लोग कैश लेने के लिए ब्रांचों में पहुंचते हैं, तब तक वहां पर कैश खत्म
हो जाता है। वहीं बुधवार को अधिकतर बैंकों में भीड़ नहीं देखी गई। इसका कारण बैंकों में कैश न होना भी था। वहीं एटीएम के बाहर और दिनों की तरह लंबी लाइनें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं।