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बेटी के हौंसले की दास्तां हैरान कर देगी आपको

Mon, 20 Apr 2015 07:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 20 Apr 2015 07:41 AM IST
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बेटी के हौंसले की दास्तां हैरान कर देगी आपको

beti hi bachayegi: motivational story of a girl

कीर्ति की हिम्मत, उसका हौसला और जज्बा देखिए। एक हादसे में कीर्ति की रीढ़ की हड्डी टूट गई, लेकिन उसकी हिम्मत नहीं टूटी। तस्वीरों में पूरा मामला। रिपोर्टः सुमित सिंह श्यौराण


बेटी के हौंसले की दास्तां हैरान कर देगी आपको

beti hi bachayegi: motivational story of a girl

बठिंडा के मलोट निवासी चार बहनों में सबसे छोटी कीर्ति के सामने जिंदगी के सुनहरे सपने पूरे होने से चंद दिन बचे थे। वह भी प्रोफेसर बनकर मां-बाप के सपनों को साकार करना चाहती थी, लेकिन होनी को शायद कुछ ओर ही मंजूर था। एक एक्सीडेंट ने पल भर में कीर्ति के सारे अरमानों पर पानी फेर दिया। 2011 से अस्पताल तो कभी घर में बेड पर गुजारने के बावजूद घायल कीर्ति ने हौसला नहीं हारा। मजबूत इरादों की कीर्ति पीएचडी पूरी करना चाहती है। कीर्ति के कैरियर का फैसला अब पीयू सिंडीकेट की बैठक में लिया जाएगा।

बेटी के हौंसले की दास्तां हैरान कर देगी आपको

beti hi bachayegi: motivational story of a girl

पीयू के इतिहास विभाग में कीर्ति को 9 जनवरी 2007 में पीएचडी में दाखिला मिल गया। मेधावी कीर्ति का 21 फरवरी 2011 को विभाग के ही एक सेमिनार में हिस्सा लेकर हॉस्टल लौटते हुए एक्सीडेंट हो गया। कीर्ति की रीढ़ की हड्डी में बुरी तरह चोटें लगी। उसे लगभग 2 साल तक अस्पताल में रहना पड़ा। दिल्ली में भी इलाज चला और कई ऑपरेशन भी हुए। कीर्ति की आवाज जाती रही और हाथ पैरों ने भी काम करना बंद कर दिया।

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कीर्ति को पीएचडी पूरी करने के लिए दो बार एक्टेंशन भी दिया गया। लेकिन हाथ और पैर न हिल पाने की वजह से वह निर्धारित समय में पीएचडी नहीं कर सकी। कीर्ति ने पीयू वाइस चांसलर को चिट्ठी लिखकर थीसिस जमा करने के लिए 31 दिसंबर 2015 का समय मांगा है। कीर्ति की गाइड डॉ. अंजू सूरी ने भी कीर्ति को समय देने की मांग की है। पीयू नियमों के तहत रिसर्च स्कॉलर को अधिकतम आठ साल का समय मिल सकता है। लेकिन कुलपति और सिंडीकेट विशेष परिस्थितियों में ही किसी कैंडीडेट को एक से दो साल का अतिरिक्त समय दे सकती है।

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‘अमर उजाला’ से कीर्ति ने अपने बुरे दिनों को सांझा किया। उन्होंने बताया कि 21 फरवरी को वह दोस्त के साथ स्कूटर पर हॉस्टल जा रही थी। अचानक स्कूटर से गिरने से उसे गंभीर चोट लगी। कीर्ति ने कहा कि बुरे वक्त में भी उसके दोस्तों और उनकी गाइड डॉ. अंजू सूरी ने उनका पूरा साथ दिया।

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