उपलब्धि : निर्मल हुआ ब्यास का पानी, देश की पहली ‘बी क्लास’ नदी का खिताब मिला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नदियों के जल स्तर को तीन वर्गों में विभाजित किया गया है। ‘सी क्लास’ की नदी का जल न तो नहाने योग्य और न ही पीने योग्य होता है। ‘बी क्लास’ की नदी के पानी में व्यक्ति नहा सकता है और छानकर पानी पी सकता है। ‘ए क्लास’ का दर्जा जिस नदी को मिलता है, उसका पानी बिना छाने भी पिया जा सकता है।
पंजाब सरकार के पर्यावरण विभाग की ओर से ब्यास को शुद्ध करने के लिए कई तकनीकों का प्रयोग किया गया। औद्योगिक प्रदूषण रोकने के साथ ही डेयरी अवशेष के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट लगाए गए। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के इनलेट को बंद किया गया। पठानकोट आदि क्षेत्रों में लगे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को चालू कराया गया। इसके साथ ही कुछ एसटीपी को अपग्रेड भी किया गया।
सतलुज के जल को भी शुद्ध करने की प्रक्रिया शुरू होगी
पंजाब और हिमाचल के लिए ही नहीं बल्कि यह देश के लिए भी बड़ी उपलब्धि है। ब्यास के साथ ही अब सतलुज के जल को शुद्ध करने की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। लुधियाना में से गुजर रही सतलुज नदी की सहायक नदी, गंदा बुड्ढा नाला के प्रदूषण की समस्या को हल करने के लिए डेयरी अवशेष के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट लगाना है। इससे सतलुज नदी के पानी की गुणवत्ता में काफी सुधार होगा। - जसबीर सिंह, सेवानिवृत्त जस्टिस, पंजाब