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Chandigarh News: यहां खड़े विमान मशीन नहीं...1971 से कारगिल-बालाकोट तक शौर्य की जिंदा दास्तान हैं

Thu, 08 Oct 2026 01:41 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 08 Oct 2026 01:41 AM IST
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The aircraft standing here are not merely machines... they are living testaments to valor, spanning from 1971 to Kargil and Balakot.
वायु सेना दिवस पर विशेष
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सेक्टर-18 का एयरफोर्स हेरिटेज सेंटर है देश के वीर वायु योद्धाओं की गाथा का जीवंत दस्तावेज

ग्नैट से मिग-21 तक हर विमान सुनाता है वीरता की कहानी, शहीदों की प्रतिमाएं और युद्धों के 3डी दृश्य बढ़ाते हैं रोमांच
पांच सेवामुक्त विमानों, 3डी डायोरामा और शहीदों की प्रतिमाओं के बीच महसूस होती है वायुसेना की जांबाजी
इतिहास देखकर बच्चों में जगा आसमान छूने का जुनून

चंडीगढ़। सेक्टर-18 के इंडियन एयरफोर्स हेरिटेज सेंटर में कदम रखते ही ऐसा महसूस होता है, जैसे इतिहास सामने आकर खड़ा हो गया हो। बाहर शान से खड़े विमान कौतूहल जगाते हैं और भीतर पहुंचते ही भारतीय वायुसेना के युद्धों, वीरता और बलिदान की कहानियां रोमांचित करती हैं। देश के पहले एयरफोर्स हेरिटेज सेंटर में कलाकृतियों, भित्तिचित्रों, युद्ध स्मृतियों, डीकमीशन विमानों, 3डी डायोरामा और आधुनिक तकनीक के जरिए वायुसेना की गौरवशाली यात्रा को जीवंत किया गया है।
1971 का ग्नैट आज भी सीना ताने खड़ा
सेंटर के प्रमुख आकर्षणों में ग्नैट विमान शामिल है। 1971 के भारत-पाक युद्ध में ग्नैट ने पाकिस्तानी सेबर विमानों के सामने अपनी क्षमता साबित की थी। इसी युद्ध से फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों की वीरता की कहानी भी जुड़ी है। उन्हें मरणोपरांत देश के सर्वोच्च सैन्य वीरता पुरस्कार परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। सेंटर के बाहर 1971 से जुड़ा ग्नैट आज भी शान से खड़ा है।
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पांच विमान, पांच अलग वीरगाथाएं
हेरिटेज सेंटर में पांच विंटेज डीकमीशन विमान प्रदर्शित हैं। इनमें ग्नैट, मिग-21 और एयरफोर्स कानपुर-1 प्रमुख हैं। एचपीटी-32 और मिग-23 जैसे पुराने विमान भी यहां मौजूद हैं। एयरफोर्स कानपुर-1 को दिवंगत एयर वाइस मार्शल हरजिंदर सिंह ने 1958 में डिजाइन और तैयार किया था। वहीं मिग-21 भारतीय वायुसेना के इतिहास का अहम हिस्सा रहा है। यहां लोग इसके कॉकपिट का अनुभव भी ले सकते हैं।
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सामने खड़ा है शौर्य और बलिदान
सेंटर में कॉरपोरल गुरसेवक सिंह और कॉरपोरल ज्योति प्रकाश निराला की आदमकद प्रतिमाएं वीरता और बलिदान की कहानी कहती हैं। गुरसेवक सिंह 2016 के पठानकोट एयरबेस हमले में शहीद हुए थे, जबकि ज्योति प्रकाश निराला को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था। मार्शल ऑफ द एयर फोर्स अर्जन सिंह की प्रतिमा 1965 के युद्ध में उनके नेतृत्व की याद दिलाती है।
1965 से बालाकोट तक दीवारों पर जिंदा इतिहास
भित्तिचित्रों, मॉडलों और 3डी डायोरामा के जरिए 1965 और 1971 के युद्ध, कारगिल और 2019 के बालाकोट एयर स्ट्राइक की घटनाओं को दिखाया गया है। महिलाओं की भूमिका पर भी अलग सेक्शन है, जिसमें महिला पायलटों और अधिकारियों की उपलब्धियां प्रदर्शित हैं।
सिमुलेटर में खुद महसूस करें उड़ान
फ्लाइट सिमुलेटर सेंटर का खास आकर्षण है। इसमें बैठकर पर्यटक टेकऑफ से मिशन तक का वर्चुअल अनुभव कर सकते हैं। पुरानी वर्दियों, वीरता पुरस्कार पाने वाले जवानों की निजी वस्तुओं, विमान मॉडल और हथियारों के जरिए वायु सैनिकों की व्यक्तिगत कहानियां भी सामने आती हैं।

गुरुकुल के बच्चों ने कहा-हम भी बनेंगे पायलट
बुधवार को करनाल के गुरुकुल से आए बच्चों ने सेंटर का दौरा किया। सिमुलेटर में उड़ान का अनुभव लेने के बाद कृष, सक्षम, शेखर और आर्यन ने कहा कि अब तक विमानों को आसमान में उड़ते देखा था, लेकिन पहली बार उन्हें इतने करीब से देखने का मौका मिला। वायु सैनिकों की कहानियों ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उन्होंने कहा कि वे भी भारतीय वायुसेना का हिस्सा बनना चाहते हैं। इस दौरान गुरुकुल के अध्यापक भी उनके साथ रहे।
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