'गोल्डन ब्वॉय' बजरंग पूनिया की जीत पर मां ओमप्यारी के आंसू छलक आए। उन्होंने एक बातचीत के दौरान पहलवान बेटे के वो राज खोले, जानकर देशवासी नाज करेंगे।
एशियन गेम्स में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतने वाले बजरंग पूनिया के लगातार आगे बढ़ने में परिवार के लोगों का भी बड़ा हाथ है। बजरंग की मां ओमप्यारी ने बताया कि बजरंग मेडल जीतकर तिरंगा ऊंचा करता रहे और उसकी प्रैक्टिस में कोई परेशानी नहीं आए, इसलिए परिवार वालों ने गांव भी छोड़ दिया। बजरंग पूनिया का साढ़े तीन साल पहले सोनीपत के साईं सेंटर में सलेक्शन हो गया और उसके झज्जर से यहां रोजाना आकर प्रैक्टिस करना नामुमकिन था तो यहां अकेले रहने पर भी प्रैक्टिस पर असर पड़ता था।
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- फोटो : अमर उजाला
बजरंग की प्रैक्टिस ठीक नहीं होने से उसका मेडल जीतना भी मुश्किल था। बस यह सोचकर ही पिता बलवान सिंह व भाई हरेंद्र ने गांव छोड़ने का फैसला कर लिया। गांव में 10 एकड़ जमीन भी ठेके पर दी हुई है और पूरा परिवार बजरंग के खानपान से लेकर हर सुविधा पर ध्यान रखता है। बजरंग पूनिया का परिवार पिछले साढ़े तीन सालों से सोनीपत में सुजान सिंह पार्क के पास रहता है। उसके परिवार में पिता बलवान सिंह के अलावा भाई हरेंद्र, मां ओमप्यारी, भाभी मोनिका व भतीजा नमन है। उसकी तीन बड़ी बहन है, जिनकी शादी हो चुकी है।
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बजरंग के पिता बलवान सिंह की झज्जर में खेती है और वह पहले खेती करते थे, लेकिन बजरंग का साढ़े तीन साल पहले सोनीपत के साईं सेंटर में सलेक्शन हो गया था। बजरंग ने चार-पांच महीने सोनीपत में अकेले रहकर प्रैक्टिस की, लेकिन उसके अकेले रहने का प्रैक्टिस पर असर पड़ता था और उसे अपने अन्य जरूरी कामों में समय देना पड़ता था। यह देखकर ही बजरंग के पिता व भाई ने फैसला किया कि वह भी परिवार के साथ सोनीपत में रहेंगे और वह झज्जर में अपना खुड्डन गांव छोड़कर यहां आ गए।
पिता बलवान सिंह व भाई हरेंद्र दोनों ही बजरंग के खाने का ध्यान रखने लगे तो उसके वजन व अन्य जरूरी काम भी भाई करने लगा। इसका असर भी बजरंग के खेल पर दिखाई देने लगा, क्योंकि वह केवल प्रैक्टिस पर ध्यान देता है और यह भी बड़ा कारण है कि वह देश के लिए लगातार बेहतर प्रदर्शन करके मेडल जीत रहा है। पहलवान बजरंग पूनिया ने एशियन गेम्स में देश के लिए ऐसे ही गोल्ड मेडल नहीं जीता है, बल्कि बजरंग ने पसीना बहाकर अपनी हर कमी को दूर किया था।