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बेमिसालः कभी साइकिल पर च्यवनप्राश बेचता था, आज 10 हजार करोड़ का एम्पायर
Tue, 09 May 2017 09:56 AM IST
amarujala.com- Written by: खुशबू गोयल
amarujala.com- Written by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 09 May 2017 09:56 AM IST
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बाबा रामदेव
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देखिए एक शख्स, जो कभी साइकिल पर गली गली घूमकर च्यवनप्राश बेचा करता है। आज वह 10 हजार करोड़ के एम्पायर का मालिक है। जानिए कैसे?
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- फोटो : अमर उजाला
हम बात कर रहे हैं, बाबा रामदेव की। इनकी बनाई पतंजलि कंपनी का सालाना टर्नओवर 10 हजार करोड़ के पार पहुंच चुका है। यह अपने आप में एक बड़ी बात है और इसके पीछे बाबा रामदेव की कड़ी मेहनत लगन और कुछ कर गुजरने का जज्बा है। ये वही इंसान है, जो कभी साइकिल चलाया करता था और योगगुरु बने जिसे 22 साल हो गए हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
पूरी दुनिया को योग का पाठ पढ़ाने वाले बाबा रामदेव का असली नाम राम कृष्ण यादव है। करीब 50 साल के बाबा का जन्म हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के अली सैयद्पुर गांव में हुआ। बचपन यहीं पर बीता। बचपन का नाम रामकृष्ण था। खबरें मिली हैं कि बचपन में ही शहीद भगत सिंह, रामप्रसाद बिस्मिल की तस्वीरें देखकर रामदेव क्रांतिकारी बनने की सोचा करते थे। किसे पता था कि ये एक दिन देश में योग की क्रांति लाएंगे?
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- फोटो : अमर उजाला
बाबा रामदेव को शुरू से ही योग में दिलचस्पी थी। योग के प्रति लगाव के कारण एक दिन उन्होंने घर-बार छोड़कर ऋषिकेश जाने की ठान ली। आचार्य प्रद्युम्न व योगाचार्य बल्देवजी से संस्कृत व योग की शिक्षा ली। युवावस्था में संन्यास लिया और पहले वाला रामकृष्ण, स्वामी रामदेव के नये रूप में बदल गया। रामदेव ने कालवा गुरुकुल, जींद जाकर नि:शुल्क योग सिखाया उसके बाद हिमालय में ध्यान और धारणा का अभ्यास करने निकल गए।
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बाबा रामदेव वहां से सिद्धि प्राप्त कर प्राचीन पुस्तकों व पाण्डुलिपियों का अध्ययन करने हरिद्वार आकर कनखल के कृपालु बाग आश्रम में रहने लगे। यहीं उन्हें अपने जीवन का निर्णायक मोड़ मिला। एक धार्मिक टीवी चैनल ने उन्हें योग के एक प्रोग्राम में फीचर करना शुरू किया। बाबा ने टीवी के माध्यम से जनता तक योग की शक्ति को पहुंचाया। यहीं से बाबा रामदेव ने योग को एक बड़ा ब्रांड बनाने की शुरुआत कर दी।
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