अगर आप अपनी शादीशुदा लाइफ में रोमांस बरकरार रखना चाहते हैं, तो ऐसी दवाइयां और ये सभी चीजें संभल कर खाएं, नहीं तो नपुंसक बन सकते हैं।
दवा में नैनोपार्टिकल्स का ज्यादा इस्तेमाल किसी भी तंदुरुस्त इंसान को नपुंसक बना सकता है। करीब डेढ़ साल तक बकरे पर चली इस रिसर्च केबाद यह तथ्य सामने आया है। इंसानी दवा केअलावा खेती में इस्तेमाल होने वाली दवाओं में भी नैनोपार्टिकल्स का इस्तेमाल हो रहा है। हालांकि, नैनो तकनीक भारत में भी पूरे चरम पर नहीं है।
रिसर्च में पाया गया कि किसी दवा की एक एमएल मात्रा में 50 माइक्रो ग्राम से ज्यादा नैनोपार्टिकल्स खतरनाक परिणाम दे सकते हैं। इससे अधिक मात्रा कोशिकाओं के लिए नुकसानदायक है। करनाल स्थित एनडीआरआई में तैनात कपिल देव पुनिया कुरूक्षेत्र यूनिवर्सिटी से इस तकनीक पर रिसर्च कर रहे हैं।
कपिल ने पीयू में नैनो साईटेक में अपना पेपर प्रेजेंट किया और उनकी रिसर्च को अप्रूवल भी मिल चुकी है। कपिल ने बताया कि नैनोपार्टिकल्स को सुरक्षा मानकों पर परखने केलिए रिसर्च की गई। इसमें एक बकरे पर डेढ़ साल तक अलग-अलग पहलुओं से शोध किया गया। रिसर्च में पाया गया कि जैसे-जैसे नैनोपार्टिकल्स की मात्रा बढ़ती रही, बकरे में इंफर्टिलिटी आई।
नैनो तकनीक बेहतरीन, उचित प्रयोग की जरूरत
नैनो साईटेक में एक्सपर्ट्स ने बताया कि यह तकनीक बेहतरीन है। क्योंकि इस तकनीक से बनी दवाएं ज्यादा असरदार हैं, लेकिन इस तकनीक के उचित प्रयोग की जरूरत है। हालांकि, फिलहाल कैंसर जैसे गंभीर रोग में नैनो तकनीक की दवाओं के प्रयोग हो रहे हैं। साईटेक में बताया गया कि नैनो तकनीक पर अमेरिका में बड़े स्तर की रिसर्च हो रही है।