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आस्ट्रेलिया ने बदल दिया पीआर का एक नियम, विदेश में बसने का सपना है तो...अब भूल जाएं

Wed, 18 Jul 2018 02:17 PM IST
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर(पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर(पंजाब) Updated Wed, 18 Jul 2018 02:17 PM IST
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Australia Changed PR Rules, Indians Career in Problem
कॉलेज स्टूडेंट - फोटो : अमर उजाला
आस्ट्रेलिया ने पीआर लेने के नियमों में बदलाव कर दिया है। अब अगर आप भी विदेश में बसने की सोच रहे हैं तो भूल जाइए। नई शर्त से कई भारतीयों का भविष्य दांव पर लग गया है।
Australia Changed PR Rules, Indians Career in Problem
कॉलेज स्टूडेंट - फोटो : amar ujala
ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने देश की पीआर यानी परमानेंट रिहायश के लिए शर्त अब 60 अंक से 65 कर दी है। इससे उन भारतीय विद्यार्थियों के लिए मुसीबत खड़ी हो गई है, जो पीआर होने का सपना संजोकर ऑस्ट्रेलिया में स्टडी वीजा पर पढ़ाई कर रहे हैं। साथ ही ऑस्ट्रेलिया में बसने की सोच रहे लोगों को भी खासा झटका लगा है।
Australia Changed PR Rules, Indians Career in Problem
कॉलेज स्टूडेंट
ऑस्ट्रेलिया जाकर पढ़ने वाले विद्यार्थियों में दूसरे नंबर पर भारत है। ऑस्ट्रेलिया के अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा बाजार में भारतीयों का योगदान करीब 400 अरब रुपये का है। आस्ट्रेलियन एजूकेशन इंटरनेशनल (एईआई) के सूत्रों के अनुसार, पिछले साल करीब 40 हजार विद्यार्थियों ने ऑस्ट्रेलियाई शिक्षण संस्थानों में प्रवेश लिया। विक्टोरिया यूनिवर्सिटी में 47 प्रतिशत भारतीय विद्यार्थी उच्चस्तरीय पाठ्यक्रम कर रहे हैं। 100 से भी अधिक विद्यार्थी पीएचडी कर रहे हैं और दो-तिहाई विद्यार्थी मास्टर डिग्री में शिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।
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Australia Changed PR Rules, Indians Career in Problem
कॉलेज स्टूडेंट
इन विद्यार्थियों का कंप्यूटर, इंजीनियरिंग जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की ओर रुझान कम है, बिजनेस और नर्सिंग, हार्टिकल्चर, एग्रीकल्चर जैसे विषयों के पाठ्यक्रम लोकप्रिय हो रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में डिग्री की फीस प्रति वर्ष 25 हजार डालर के करीब है, जो भारतीय मुद्रा में 12 लाख से अधिक बनती है। डिग्री कोर्स तीन साल का होता है, इसके बाद विद्यार्थी दो साल का वर्क परमिट ले सकता है। वर्क परमिट यानी नौकरी के दौरान ही 900 घंटे पूरे होने पर उम्मीदवार पीआर के लिए आवेदन कर सकता है।
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कॉलेज स्टूडेंट
सरकार की तरफ से डिग्री, इंगलिश, उम्र, तजुर्बा, पिछड़े इलाके में रिहायश करने के लिए प्वाइंट सिस्टम बनाकर पीआर दी जाती है। पहले जो विद्यार्थी स्टडी पूरी कर वर्क वीजा पर काम कर रहे होते थे, वह 60 अंक पूरे कर पीआर हासिल कर लेते थे, अब ऑस्ट्रेलिया सरकार ने 5 अंक बढ़ा दिए हैं, जिससे पीआर लेना अब मुश्किल हो गया है। वर्क वीजा खत्म होने के बाद अगर पीआर न मिली तो विद्यार्थियों को भारत लौटना पड़ेगा। इस समय 1.5 लाख भारतीय विद्यार्थी ऐसे हैं, जो वहां पर स्टडी वीजा या वर्क वीजा पर हैं।
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