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काफी फिल्मी है नीरज चोपड़ा के गोल्ड मेडलिस्ट बनने की कहानी, फूट-फूट कर रोये थे...10 अनकहीं बातें

Tue, 28 Aug 2018 02:45 PM IST
भूपेंद्र आट्टा/अमर उजाला, पानीपत(हरियाणा)
भूपेंद्र आट्टा/अमर उजाला, पानीपत(हरियाणा) Updated Tue, 28 Aug 2018 02:45 PM IST
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Asian Games 2018 Gold Medal Winner Neeraj Chopra Unknown Secrets
NEERAJ CHOPRA
एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाले नीरज चोपड़ा एक बार इतना फूट-फूट कर रोये थे कि चुप कराना मुश्किल हो गया था। एक शख्स ने इन्हें गोल्ड मेडलिस्ट बनाया, जानिए 10 अनकहीं बातें।
Asian Games 2018 Gold Medal Winner Neeraj Chopra Unknown Secrets
neeraj chopra
कामयाबी के पीछे जिगरी दोस्त का हाथ
नीरज की कामयाबी के पीछे सबसे बड़ा हाथ दोस्त जयवीर का है। 12 साल की उम्र में जब नीरज पानीपत जाने लगे तो वहां सीनियर खिलाड़ी जयवीर से मुलाकात की, जिन्होंने उनकी 6 फीट से ज्यादा की हाइट देखकर जेवेलिन खेलने के लिए कहा। शुरुआत में कई बार मन जेवेलिन के लिए नहीं हुआ, लेकिन जयवीर ने उसका हमेशा साथ दिया। उसकी कोशिशों के कारण ही वे आज नीरज स्टार खिलाड़ी बन पाया हैं।
Asian Games 2018 Gold Medal Winner Neeraj Chopra Unknown Secrets
neeraj chopra
24 दिसंबर 1997 को जन्मे नीरज चोपड़ा मूलरूप से हरियाणा में पानीपत के गांव खंदरा के रहने वाले हैं और उन्होंने चंडीगढ़ के सेक्टर-10 स्थित डीएवी कालेज से बीए प्रथम वर्ष की पढ़ाई की है। इसके बाद वह सेना में चले गए। बहरहाल, कालेज के प्रोफेसर अमनिंदर मान ने बताया कि जब वह कालेज में पढ़ाई करते थे तो उस समय वह अपना पूरा ध्यान खेल पर ही देते थे। इसी कालेज के प्रोफे सर रविंदर चौधरी, जो इस समय जकार्ता में एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया की ओर से अधिकारी नियुक्त हं, नीरज चोपड़ा के गुरु भी हैं। स्वर्ण पदक जीतने पर कालेज के स्टूडेंट्स और प्रबंधन वर्ग में खुशी का माहौल है।
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Asian Games 2018 Gold Medal Winner Neeraj Chopra Unknown Secrets
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अच्छी जैवलिन खरीदने तक के पैसे नहीं थे नीरज के पास
जैवलिन थ्रोअर बनने के दौरान नीरज के समय एक दौर यह भी आया कि उनके पास जैवलिन (भाला) खरीदने तक के पैसे नहीं थे। अच्छी जैवलिन की कीमत डेढ़ लाख रुपये थी पर नीरज ने हौसला नहीं खोया। पिता सतीश कुमार व चाचा भीम सिंह चोपड़ा से सात हजार रुपये लेकर सस्ता जैवलिन खरीदा और हर दिन आठ घंटे अभ्यास किया। इसी अभ्यास के बूते नीरज ने अंडर-16, 18 और 20 की मीट जीती व नेशनल रिकॉर्ड बना डाला। इसके बाद इंडिया कैंप में नीरज का चयन हुआ। शुरुआती दौर में नीरज ने जैवलिन थ्रो सीखने के लिए कहीं से ट्रेनिंग नहीं ली, बल्कि यू ट्यूब पर वीडियो देखकर इस खेल में खुद को बेहतर बनाया।
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neeraj chopra
जब भाला टूटने पर फूट फूटकर रोए थे नीरज...
नीरज चोपड़ा ने 9 साल पहले पानीपत के शिवाजी स्टेडियम से जैवलिन थ्रो करनी शुरू की थी। दोस्त जयबीर से प्रेरित होकर नीरज ने भाला फेंकना शुरू किया था। चाचा भीम बताते हैं कि उसने नीरज को 8 हजार रुपये का जैवलिन खरीदकर दिया था। एक दिन नीरज ने जैवलिन थ्रो किया और भाला पत्थर पर जा लगा। आगे से भाले की नोंक टूट गई। जब वो शाम को नीरज को घर के लिए लेने के लिए स्टेडियम में गए तो नीरज एकांत में बैठकर रो रहा था। उसने नीरज से बहुत पूछा लेकिन उसने रोने का कारण नहीं बताया। फिर उसके दोस्त ने बताया कि भाले की नोंक टूट गई है इसलिए वो रो रहा है। इस पर वो हंसने लगा था। फिर उसने नीरज से पूछा कि नया भाला कितने का आएगा। नीरज ने जब भाले की कीमत 50 हजार रुपये बताई तो वो भी चिंतित हो गए थे। लेकिन उन्होंने इस बारे में अपने परिवार में बात की और नीरज के लिए वह 50 हजार रुपये का भाला खरीदकर दिया।

 
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