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Chandigarh News: 20 हजार लीटर मुफ्त पानी और पार्किंग फ्री के फैसले पर प्रशासन की आपत्ति नौ महीने दबाए रखी

Fri, 21 Aug 2026 02:32 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 21 Aug 2026 02:32 AM IST
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The administration kept its objection to the decision regarding 20,000 liters of free water and free parking suppressed for nine months.
चंडीगढ़। नगर निगम सदन में 20 हजार लीटर मुफ्त पानी और पार्किंग फ्री करने के फैसले पर चंडीगढ़ प्रशासन की आपत्ति का पत्र करीब नौ महीने तक सदन के सामने नहीं आने का मामला वीरवार को निगम हाउस की बैठक में गरमा गया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रशासन की ओर से नवंबर 2025 में निगम को भेजे गए पत्र को पूर्व मेयर ने सदन के संज्ञान में नहीं आने दिया। पत्र में प्रशासन ने निगम सदन के फैसले को संबंधित बायलॉज के विपरीत बताया था। साथ ही इसे निरस्त करने की कार्रवाई के लिए निगम को शो-कॉज नोटिस जारी करने की बात कही गई थी।
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वीरवार को निगम सदन की बैठक में नेता प्रतिपक्ष गुरप्रीत सिंह गाबी, कांग्रेस पार्षद तरुणा मेहता, प्रेम लता और सचिन गालव वेल में पहुंच गए। उन्होंने प्रशासन की ओर से भेजे गए पत्र को हाथों में लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस पार्षदों ने आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा फैसले पर आपत्ति जताने और शो-कॉज नोटिस की बात कहे जाने के बावजूद पत्र को सदन के सामने नहीं लाया गया।
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नवंबर 2025 में भेजा था प्रशासन ने पत्र
प्रशासन की लोकल गवर्नमेंट एंड अर्बन डेवलपमेंट ब्रांच ने नवंबर 2025 में नगर निगम को पत्र भेजा था। इसमें कहा गया कि 20 हजार लीटर मुफ्त पानी और पार्किंग फ्री करने से संबंधित निगम सदन का निर्णय संबंधित बायलॉज के विपरीत है। पत्र में प्रशासन ने निर्णय को निरस्त करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने की बात भी कही थी। यह मामला नौ जुलाई 2024 को हुई नगर निगम सदन की 336वीं बैठक के मिनट्स से जुड़ा है। निगम की ओर से एजेंडा और संबंधित रिकॉर्ड प्रशासन को भेजे गए थे। इस मामले में ला डिपार्टमेंट से राय ली गई। इसके बाद लोकल गवर्नमेंट ब्रांच ने निगम को पत्र भेजकर प्रशासन की स्थिति से अवगत कराया।
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गाबी बोले- आपत्ति थी तो सदन में क्यों नहीं रखा पत्र
नेता प्रतिपक्ष गुरप्रीत सिंह गाबी ने सवाल उठाया कि जब प्रशासन ने नवंबर 2025 में ही निगम के फैसले पर आपत्ति जता दी थी तो पत्र को 20 अगस्त 2026 से पहले हुई निगम सदन की किसी बैठक में सदस्यों के सामने क्यों नहीं रखा गया। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से भेजे गए ऐसे पत्र, जिनका सीधा संबंध सदन के पुराने फैसलों से है, सदस्यों के सामने रखे जाने चाहिए ताकि उनकी वैधानिक स्थिति स्पष्ट हो सके। गाबी ने यह भी कहा कि जिस निर्णय को निगम सदन ने मंजूरी दी थी, उसे बाद की बैठक में दोबारा मंजूरी देना भी संबंधित बायलॉज के अनुरूप नहीं था। प्रशासन ने पत्र में स्पष्ट किया था कि निर्णय को रद्द करने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।
बबला बोलीं- पत्र में मेरा नाम नहीं
पूर्व मेयर हरप्रीत कौर बबला ने सदन में आरोपों पर सफाई देते हुए कहा कि प्रशासन की ओर से भेजा गया पत्र नगर निगम कमिश्नर को संबोधित था। उसमें कहीं भी उनका नाम नहीं है। उन्होंने कहा कि पत्र प्रशासन की लोकल गवर्नमेंट ब्रांच की ओर से भेजा गया था।

मेयर बोले- पुराने मामलों का भी खोलेंगे चिट्ठा
मेयर सौरभ जोशी ने कहा कि वह भी 2011 से सदन में हैं और इस दौरान कई टेबल एजेंडा और प्रशासन के पत्र आए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को भी दबाया गया है। वह पिछले वर्षों से अब तक के सभी मामलों का चिट्ठा खोलेंगे। इस विवाद के बाद 20 हजार लीटर मुफ्त पानी और पार्किंग फ्री करने के फैसले की वैधानिकता के साथ-साथ निगम में प्रशासनिक पत्रों को सदन के सामने रखने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
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