पहले 500 और हजार के नोट बंद किए गए और अब 10-10 के सिक्के भी चलने बंद हो गए हैं। लोग इतने परेशान हैं कि वे प्रधानमंत्री मोदी पर गरियाने लगे हैं।
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एसबीआई की शाखा में रुपये जमा करने के लिए फार्म काउंटर लगी भीड़
दरअसल, एक तरफ 500 और 1000 के नोट नहीं चल रहे हैं। दूसरी ओर दुकानदार और ऑटो वाले 10-10 के सिक्के नहीं ले रहे हैं। वे यह कहकर सिक्के लेने से इंकार कर रहे हैं कि ये नकली हैं। ऐसे में अब लोग भी बैंकों से सिक्के लेने में कतराने लगे हैं।
हालांकि यह आरबीआई के नियमों के मुताबिक़ गलत है। बैंक ने दस रुपये का सिक्का चलन से बाहर नहीं किया है। अगर कोई सिक्के लेने से मना करता है तो उसे जेल हो सकती है। एफआईआर दर्ज होने पर पुलिस ऐसे लोगों के खिलाफ चालान करके न्यायालय से सजा दिला सकती है।
आरबीआई के मुताबिक, 10 रुपए का सिक्का पूरी तरह से वैध है, लोग लेनदेन में इसका खुलकर इस्तेमाल करें। इसे लेने से मना करना भारतीय मुद्रा का अपमान है। अगर दुकानदार लेने से इंकार करता है कि उसके खिलाफ कई धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
यह है सजा का प्रावधान: नोट या सिक्के का जाली मुद्रण, जाली नोट या सिक्के चलाना और सही सिक्कों को लेने से मना करना भारतीय दंड संहिता की धारा 489ए से 489इ के तहत अपराध है। इन धाराओं के तहत किसी विधिक न्यायालय द्वारा आर्थिक दंड, कारावास अथवा दोनों की सजा दी जा सकती है।