मैं कराची में अपने दूर के रिश्तेदार के घर में सात महीने तक फंसी हुई थी। मुझे वहां पर कोई तकलीफ नहीं थी लेकिन कुछ कमी सी थी। दूर के रिश्तेदार के घर कितने दिन रहें, यही बात मुझे मानसिक पीड़ा दे रही थी। मैं जल्द अपने घर लौटूं, इसके लिए लगातार इस्लामाबाद स्थित भारतीय दूतावास के संपर्क में थी। मेरे पिता इंदौर के सांसद शंकर लालवानी से मिल मेरी वापसी के प्रयास कर रहे थे।
यह शब्द हैं इंदौर निवासी मोनिशा के, जो सात महीने बाद मंगलवार को पाकिस्तान से भारत लौटीं। मंगलवार को पाकिस्तान से 400 भारतीय अटारी सड़क सीमा के रास्ते वतन पहुंचे। सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने भारत प्रवेश कर रहे इन नागरिकों के दस्तावेज की जांच करने के बाद उन्हें प्रवेश दिया।
अटारी सड़क सीमा पर जब वह अपने पिता के गले मिली तो दोनों की आंखें नम हो गई। पिता ने कहा- बेटी तुझको देखने के लिए आंखें तरस गई थी। वहीं मोनिशा ने पिता के आंसू पोंछते हुए कहा कि पापा, मेरा शरीर वहां था, लेकिन दिल तो यहीं था। सादवाणी ने बताया कि उनकी बेटी अपने भाई की शादी में सात मार्च को कराची गई थी।
कोरोना के कारण वह पाकिस्तान में फंस गई। सात महीने के बाद बेटी को गले लगाना किती कितनी खुशी दे रहा है, इसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। बेटी को पाकिस्तान से वापस लाने में इंदौर के सांसद शंकर लालवानी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कराची से आई फातिमा इजाज ने बताया कि वह नूरी वीजा से अपने माता-पिता को मिलने गई थी।
कराची में अपने मायके में थी, इसके बावजूद दिल भारत में रहने वाले शौहर और बच्चों में ही अटका था। अटारी सीमा पर तैनात प्रोटोकॉल अधिकारी अरुण पाल ने बताया कि आने वाले भारतीयों की कोरोना जांच के लिए पंजाब सरकार ने मेडिकल टीम आईसीपी में तैनात की है। सभी की थर्मल स्क्रीनिंग हो रही है। जिनकी रिपोर्ट निगेटिव होगी, उनको उनके राज्यों में भेज दिए जाएगा।