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विशेषः 52 शक्तिपीठों में एक मंदिर ऐसा, जहां काफी देर रुके थे गुरु गोबिंद सिंह

Fri, 06 Jan 2017 09:31 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़
टीम डिजिटल/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Fri, 06 Jan 2017 09:31 AM IST
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350th birth anniversary of guru gobind singh special, sikh people faith in naina devi mandir
नैना देवी का म‌ंदिर
350वें प्रकाशोत्सव पर हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिससे गुरु गोबिंद सिंह जी का खास कनेक्शन है। इसके चलते सिख इसमें अटूट आस्था रखते हैं।
350th birth anniversary of guru gobind singh special, sikh people faith in naina devi mandir
नैना देवी मंदिर में सिखों की अटूट आस्था - फोटो : फाइल फोटो
बात हो रही है, देश में मौजूद 52 शक्तिपीठों में से एक शक्तिपीठ माता नैना देवी मंदिर की। पंजाब-हिमाचल बार्डर पर स्थित यह मंदिर हिन्दू-सिखों का साझा तीर्थ स्थान है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं में 60 फीसदी सिख होते हैं। मंदिर के पुजारी के अनुसार माता नयना देवी के मंदिर में श्रावण अष्टमी के मेले में साठ फीसदी सिख आते हैं। सिखों के दसवें गुरु गोबिंद सिंह ने माता नैना देवी के मंदिर में तपस्या की थी और एक साल से अधिक समय तक मंदिर के हवन कुंड में हवन किया था।
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मां नयनादेवी
मान्यता है कि तपस्या व हवन से खुश होकर मां भवानी ने स्वयं प्रकट होकर गुरु जी को प्रसाद के रूप में तलवार भेंट की और गुरु जी को वरदान दिया था कि तुम्हारी विजय होगी और इस धरती पर तुम्हारा पंथ सदैव चलता रहेगा। हवन आदि के बाद जब गुरु जी आनंदपुर साहब की ओर जाने लगे तो उन्होंने अपने तीर की नोक से तांबे की एक प्लेट पर अपने पुरोहित को हुक्मनामा लिखकर दिया, जो आज भी नयना देवी के पंडित बांके बिहारी शर्मा के पास सुरक्षित है।
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नैना देवी मंदिर में सिखों की अटूट आस्था - फोटो : फाइल फोटो
अगस्त 2008 में नैना देवी मंदिर में चट्टान खिसकने की अफवाह के बाद मची भगदड़ में 145 लोगों की मौत हो गई थी। दुर्घटना के शिकार हुए लोगों के जूते, चप्पल और अन्य सामान बिखरे पड़े होने के बावजूद भक्तों का आना लगातार जारी था। नैना देवी के अवतार के बारे में पौराणिक मान्यता के अनुसार यह स्थान विश्व के कुल 52 शक्ति पीठों में से एक माना जाता है। मान्यता है कि मां सती के नयन इसी स्थान पर गिरे थे, इसलिए इस स्थान का नाम नयना देवी पड़ा है। कई पौराणिक कहानियां श्री नैना देवी मंदिर की स्थापना के साथ जुडी हुई हैं।
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नैना देवी मंदिर में सिखों की अटूट आस्था - फोटो : फाइल फोटो
एक पौराणिक कथा के अनुसार, देवी सती ने खुद को यज्ञ में जिंदा जला दिया, जिससे भगवान शिव व्यथित हो गए। उन्होंने सती के शव को कंधे पर उठाया और तांडव नृत्य शुरू कर दिया। इसने स्वर्ग में सभी देवताओं को भयभीत कर दिया कि भगवान शिव का यह रूप प्रलय ला सकता है। भगवान विष्णु से यह आग्रह किया कि अपने चक्र से सती के शरीर को 51 टुकड़ों में काट दें। श्री नैना देवी मंदिर वह जगह है जहां सती की आंखें गिरीं।
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