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1971 के भारत-पाक युद्ध के हीरो लेफ्टिनेंट जनरल जैकब नहीं रहे
Thu, 14 Jan 2016 12:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 14 Jan 2016 12:50 PM IST
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1971 के भारत पाक युद्ध के हीरो लेफ्टिनेंट जनरल जेएफआर जैकब का निधन हो गया। दिल्ली के आर्मी हॉस्पिटल में आखिरी सांस ली। आर्मी से रिटायरमेंट के बाद वे गोवा और पंजाब के गवर्नर भी रहे थे। देखिए प्रोफाइल
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लेफ्टिनेंट जनरल जैकब का जन्म 1923 में कोलकाता में हुआ था। उनका असली नाम जैक फर्ज राफेज जैकब था। जैकब 19 साल की उम्र में सेना में शामिल हुए। अपने 36 साल के कॅरियर में वे दूसरे विश्व युद्ध का हिस्सा रहे। बंटवारे के बाद जैकब भारतीय सेना में शामिल हो गए। इसके बाद 1965 और 1971 के युद्ध का वे हिस्सा बने। 1971 के युद्ध में पाकिस्तानी सेना को घुटने टेकने के लिए मजबूर करने में जैकब की अहम भूमिका रही।
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पंजाब के पूर्व गवर्नर एवं चंडीगढ़ के प्रशासक ले. जनरल जेएफआर जैकब के निधन पर पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल ने शोक व्यक्त किया है। बंसल का कहना है कि चंडीगढ़ में प्रशासक रहते हुए जैकब ने लोगों के हित में कई काम किए। उनका कहना है कि जो शहर में इस समय आईटी पार्क है वह जैकब की ही देन है। उन्होंने बताया कि शहर में बने हुए साइकिल ट्रेक भी उनकी देन है उनके कार्यकाल में ही ट्रेक का निर्माण हुआ था।
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मेयर अरुण सूद का कहना है कि पूर्व प्रशासक जैकब ने शहर के विकास में अहम भूमिका निभाई है। उनका कहना है कि गरीबों और आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों की मदद करने की भावना उनकी हमेशा यादगार रहेगी। उन्होंने बताया कि आने वाले सदन की बैठक में शोक प्रस्ताव भी पास किया जाएगा। सूद का कहना है कि शहरवासी जैकब के कामों को हमेशा याद रखेंगे।
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पूर्व जनरल जेएफआर जैकब साल 1999 से लेकर 2003 तक चंडीगढ़ के प्रशासक के पद पर रहे। उनके बारे में एक चींज खासियत थी कि वह कही पर भी उन्होंने औचक निरीक्षण करना होता तो कार में बैठने के बाद भी अपने स्टाफ को नहीं बताते थे कि उन्होंने कहा जाना है। कार के चालक को सिर्फ सड़क की दिशा ही बताते थे। इसके साथ ही जैकब सरदी में रात के समय जो लोग खुले में सोते थे उन्हें कंबल बांटने भी जाते थे।
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