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1000/500 के नोट बंद होने का सबसे बड़ा घाटा पड़ा इस उद्योग को

Wed, 16 Nov 2016 10:02 AM IST
अंकित चौहान/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
अंकित चौहान/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा) Updated Wed, 16 Nov 2016 10:02 AM IST
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1000/500 Note Closing the industry had the largest deficit
नोटबंदी का असर

नोट बंदी की मार शहर के नट बोल्ट और आटो पार्ट्स उद्योग पर भी पड़ी है। बताया जा रहा है कि नौ नवंबर से अब तक (6 दिन) नट बोल्ट उद्योग को करीब 500 करोड़ रुपये का फटका लग चुका है। उद्यमियों का कहना है कि हालात ऐसे ही बने रहे तो आने वाले दिनों में नुकसान और बढ़ जाएगा। कच्चा माल नहीं आने और तैयार माल नहीं जाने से फैक्ट्रियों में उत्पादन घटाना पड़ गया है। स्थिति यह है कि तकरीबन 24 घंटे चलने वाली फैक्ट्रियां केवल एक शिफ्ट में आठ घंटे चलाई जा रही हैं। इस वजह से अधिकतर मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है। 

1000/500 Note Closing the industry had the largest deficit
नोटबंदी का असर - फोटो : अमर उजाला

रोहतक की फैक्ट्रियों में बनने वाले नट बोल्ट और आटो पार्ट्स की सप्लाई कई राज्यों दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र के अलावा विदेशों में होती है। यहां के नट बोल्ट रेलवे, मेट्रो, रक्षा विभाग में उपकरण बनाने में इस्तेमाल किए जाते हैं। सरकार के 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने से नट बोल्ट और आटो पार्ट्स उद्योग ठप हो गया है। नकदी की कमी के कारण सेल एवं परचेज नहीं हो पा रही है। बताया जा रहा है कि नकदी की कमी की वजह से न तो कच्चा माल आ पा रहा है, न ही उत्पादित माल जा पा रहा है।

1000/500 Note Closing the industry had the largest deficit
note - फोटो : अमर उजाला

ट्रांसपोर्ट की समस्या भी आड़े आ रही है। ट्रांसपोर्ट वाले पहले रुपये मांगते हैं, लेकिन उनको देने के लिए पैसे नहीं हैं। उद्यमियों का कहना है कि उन्होंने पुराने नोट बैंक में जमा करा दिए हैं, लेकिन बदले में नए नोट पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल रहे हैं। बैंक से जितनी नकदी दी जा रही है उतने में उद्योग नहीं चल सकते। हर रोज लाखों रुपये की जरूरत होती है और बैंक से दिए जा रहे हैं बीस हजार। उद्यमियों की मानें तो एक या दो दिन तक होने वाले नुकसान को तो कवर कर लेते हैं, लेकिन जिस तरह का नुकसान हो रहा है, वह अगले एक महीने तक सामान्य नहीं होगा। माना जा रहा है कि दिसंबर के अंत तक उद्योग सुचारू हो सकेंगे।

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note - फोटो : अमर उजाला

12 घंटे से 8 घंटे कर दी मजदूरों की शिफ्ट
नट बोल्ट और आटो पार्ट्स फैक्ट्रियों में काम की शिफ्ट 12 घंटे की रहती थी। जबकि फैक्ट्री चलाने की शिफ्ट 24 घंटे तक चलती थी। आर्डर ज्यादा होने से मजदूरों से दो से तीन शिफ्टों में काम कराया जाता था। नोट बंदी के कारण न माल आ रहा है न सप्लाई हो रही है। ऐसे में मजदूरों की शिफ्ट 8 घंटे कर दी गई है। इस तरह 24 घंटे चलने वाली फैक्ट्रियां आठ घंटे ही उत्पादन कर रही हैं। 

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note

उद्योग पूरी तरह से ठप हो गया है। मैटीरियल नहीं आने से काम नहीं हो रहा है। कर्मचारियों को पूरे वेतन देने पड़ रहे हैं। पुराने नोट देते हैं तो वह लेने में आनाकानी करते हैं। बैंकों में रुपये बदलने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। सरकार की गाइड लाइन पर भी बैंक काम नहीं कर रहे हैं। रुपये बदलने को कहते हैं तो पहले खाते में जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है। बैंक वालों की मनमानी के कारण भी परेशानी है। - एसके खटौड़, अध्यक्ष इंडस्ट्रियल एसोसिएशन 

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