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सरदार जोध सिंह ने अपनी आंखों से देखा था जलियांवाला बाग नरसंहार, बेटे ने सुनाया वो किस्सा

Sat, 13 Apr 2019 11:20 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अंबाला सिटी(हरियाणा)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अंबाला सिटी(हरियाणा) Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 13 Apr 2019 11:20 AM IST
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100 years of t Jallianwala Bagh massacre, Sardar Jodh Singh was the Eye Witness of Massacre
सरदार जोध सिंह
100 साल पहले बैसाखी के दिन जलियांवाला बाग में हुए नरसंहार के बारे में सुनकर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। स्वतंत्रता सेनानी जोध सिंह ने इस नरसंहार को अपनी आंखों से देखा था।
100 years of t Jallianwala Bagh massacre, Sardar Jodh Singh was the Eye Witness of Massacre
jallianwala bagh
जोध सिंह के बेटे त्रिचोलन सिंह ने बताया कि घटना से तीन दिन पहले 10 अप्रैल 1919 को हिंदुस्तानी क्रांतिकारियों ने कुछ अंग्रेज अधिकारियों को मौत के घाट उतार दिया था। उसके बाद ब्रिटिश सरकार ने अमृतसर की कमान जालंधर बिग्रेड के एक खूंखार कमांडर जनरल डायर को सौंप दी थी। जनरल डायर अमृतसर की गलियों और सड़कों पर मार्च करके अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते हुए घोषणाएं करवा रहा था कि कोई भी शख्स बिना अनुमति शहर से बाहर नहीं जाएगा।
100 years of t Jallianwala Bagh massacre, Sardar Jodh Singh was the Eye Witness of Massacre
jallianwala bagh
इस बीच सरदार जोध सिंह व उनके मौसेरे भाई सोहन सिंह ने कुछ लोगों को यह बातचीत करते हुए सुना कि आज शाम 4 बजे अमृतसर के जलियांवाला बाग में आजादी के संघर्ष से जुड़ा एक जलसा होने जा रहा है। उस समय देशभक्तों की बुलंद आवाज में भाषण सुनने का मजा ही कुछ और होता था। यही सोच कर सरदार जोध सिंह व उनके मौसेरे भाई सोहन सिंह जलियांवाला बाग पहुंच गए। शाम के 4 बज चुके थे। लोगों का अच्छा खासा हुजूम वहां एकत्रित हो चुका था।

 
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100 years of t Jallianwala Bagh massacre, Sardar Jodh Singh was the Eye Witness of Massacre
jallianwala bagh
जोध सिंह और सोहन सिंह एक जगह खड़े होकर देशभक्तों के भाषण सुनने लगे। ठीक उसी वक्त जनरल डायर अपनी फौज लेकर वहां आ पहुंचा। उसके साथ 50 बंदूकधारी जवान थे। उन्होंने पोजीशन लेकर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। अंग्रेज सिपाहियों के जलसे में विघ्न डालने का अंदेशा तो वहां मौजूद प्रत्येक व्यक्ति को था, लेकिन इस तरह के कत्लेआम की कल्पना किसी ने नहीं की थी।
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100 years of t Jallianwala Bagh massacre, Sardar Jodh Singh was the Eye Witness of Massacre
जलियांवाला बाग
बिना चेतावनी दिए जब निरीह जनता को घेरकर उस पर इस तरह गोलियां चलाई गईं तो जान बचाने के लिए लोग जिधर भी भाग सकते थे, भाग लिए। जोध सिंह का मौसेरा भाई सोहन सिंह भी गोली लगने से घायल हो गया था। जब वे उसकी मदद को आगे बढ़े तो एक गोली उनके कान के पास से सनसनाती हुई निकल गई। गोलियों से बचने के लिए वे खुद भी सोहन सिंह के साथ नीचे गिर गए। लेकिन दूसरे लोग उनके ऊपर गिरते चले गए।
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