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हाईकोर्ट ने गैंगरेप में फंसे गायत्री की जमानत पर लगाई रोक

Sat, 29 Apr 2017 01:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 29 Apr 2017 01:14 AM IST
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gayatri prajapati bail stay by lucknow bench of allahabad high court
गायत्री प्रसाद प्रजापति - फोटो : amar ujala

मां-बेटी से गैंगरेप व नाबालिग के यौन शोषण के आरोपों में जेल में बंद पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति की जमानत पर लखनऊ हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने 25 अप्रैल को सत्र न्यायालय से गायत्री को मिली जमानत के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार की अर्जी मंजूर करते हुए शुक्रवार को उसकी जमानत पर रोक लगा दी है।
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निचली अदालत से जमानत मिलने के बाद भी दो अन्य मामलों की वजह से गायत्री को जेल में ही रखा गया था, लेकिन दो अन्य आरोपियों विकास और पिंटू को छोड़ दिया गया था। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस दिलीप बाबासाहेब भोसले ने इन दोनों को गिरफ्तार करने के भी आदेश दिए हैं।
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इस मामले में राज्य सरकार की ओर से शुक्रवार को दाखिल अर्जी में अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार साही ने दो आधार पर सत्र न्यायालय के जमानत के आदेश का विरोध किया। उन्होंने कहा कि गायत्री ने 24 अप्रैल को जमानत अर्जी दाखिल की थी। इस पर 25 अप्रैल को सुनवाई करते हुए सत्र न्यायालय ने जमानत के आदेश जारी कर दिए, जबकि सरकारी वकील और पुलिस के जांच अधिकारी ने न्यायालय से अपना पक्ष रखने के लिए पर्याप्त समय देने की मांग की थी।

गायत्री की जमानत अर्जी में थीं ये बातें

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उनका कहना था कि वे केस डायरी व मामले से जुडे़ रिकॉर्ड्स का अध्ययन करके जवाब दे सकेंगे, लेकिन इसे नकार दिया गया।

जमानत के विरोध का दूसरा आधार गायत्री प्रजापति की जमानत अर्जी थी, जिसमें उसने अपने खिलाफ कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होने की बात कही थी। अपर महाधिवक्ता ने कहा कि गायत्री ने झूठ बोला है क्योंकि उसके खिलाफ छह मामले चल रहे हैं।

सरकार ने हाईकोर्ट से कहा कि एक महिला ने गायत्री व उसके साथियों पर तीन वर्ष तक सामूहिक दुराचार करने का आरोप लगाया है। उसकी बेटी का भी यौनशोषण किया गया। इन गंभीर आरोपों को देखते हुए उसे जमानत नहीं दी जानी चाहिए।

सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस डीबी भोसले ने अपने निर्णय में सरकार की अर्जी को मंजूर करते हुए निचली अदालत के जमानत के आदेश पर रोक लगा दी। साथ ही कहा कि दो अन्य आरोपी जिन्हें जमानत पर छोड़ दिया गया है, उन्हें पुलिस तत्काल गिरफ्तार करे।

देखें, कब क्या हुआ

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- 50 वर्षीय महिला ने कैबिनेट मंत्री रहे गायत्री प्रजापति व छह अन्य पर सामूहिक दुराचार के आरोप लगाए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 17 फरवरी को इन सभी पर एफआईआर दर्ज हुई थी।

- महिला का कहना था कि 2014 से 2016 के बीच उससे दुराचार किया गया।

- आरोपियों ने उसकी बेटी के साथ भी दुराचार की कोशिश की। 17 दिन अंडरग्राउंड रहने के बाद गायत्री को 15 मार्च को गिरफ्तार किया गया था।

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