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मानव शरीर में ही बीमार माइटोकांड्रिया को दुरुस्त करने का तरीका ढूंढ़ निकाला
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sun, 30 Sep 2018 02:15 PM IST
सार
- मधुमेह, अस्थमा, फेफड़े की कई गंभीर बीमारियों का हो सकेगा स्थायी इलाज
- आईआईटी पहुंचे सीएसआईआर के वैज्ञानिक डॉ. अरुण अग्रवाल ने दी जानकारी
- आईआईटी में बायोलॉजिकल एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग का 17वां स्थापना दिवस समारोह
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विस्तार
मानव शरीर की कोशिकाओं के पॉवर हाउस माइटोकांड्रिया (सूत्रकणिका) के डैमेज होने से ही मधुमेह, अस्थमा, फेफड़े के कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां होती हैं। यह बात रिसर्च में सामने आ चुकी है। इसका इलाज भी इंसान के पेट में ही है। यह बात शनिवार को आईआईटी कानपुर पहुंचे इंस्टीट्यूट ऑफ जीनॉमिक्स एंड इंटरग्रेटिव बायोलॉजी, सीएसआईआर नई दिल्ली के वैज्ञानिक डॉ. अनुराग अग्रवाल ने बताई। वे इंस्टीट्यूट के बायोलॉजिकल एंड बायोइंजीनियरिंग (बीएसबीई) विभाग के 17वें स्थापना दिवस समारोह में शामिल होने आए थे।
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि वह और उनकी टीम ने चंडीगढ़ पीजीआई के साथ मिलकर माइटोकांड्रिया को मानव शरीर में ही दुरुस्त करने का तरीका ढूंढ़ निकाला है। इसमें इंसान के पेट में मित्र बैक्टीरिया काफी कारगार साबित होंगे। मित्र बैक्टीरिया से खराब हो चुके माइटोकांड्रिया को ठीक कराया जा सकता है। इसके सही होने से मधुमेह, अस्थमा, लंग फाइब्रोसिस (कैंसर) का भी काफी हद तक इलाज किया जा सकता है। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि इस पर हाल ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिसर्च काम शुरू हुआ है। पिछले साल ही अमेरिकन सोसायटी की तरफ से आयोजित सिंपोेजियम में भी इसको लेकर प्रस्ताव पास हुआ, जिसकी अध्यक्षता डॉ. अग्रवाल ने खुद की थी। समारोह में आईआईएससी बंगलूरू के डॉ. राघवेंद्र गडाकर ने सोशल रेगुलेशन ऑफ प्रोडक्शन इन ट्रॉपिकल इंसेक्ट सोसायटी विषय पर कई रिसर्च पत्र प्रस्तुत किए। ऑरोलैब्स मदुरै (तमिलनाडु) के आरडी श्रीराम, डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्रो. एस गणेश, डॉ. आर रामकृष्णनन, प्रो. जानकी सेन, प्रो. अशोक कुमार, प्रो. अरुण शुक्ला, डॉ. जयनधरन राव आदि मौजूद रहे।
क्या है माइटोकांड्रिया
प्रत्येक इंसान के शरीर में कोशिकाएं होती हैं। माइटोकांड्रिया इन कोशिकाओं का एक हिस्सा होता है। तमाम कारणों से यह डैमेज हो जाता है। इसके चलते इंसान को कई बीमारियां हो जाती हैं।
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चूहे पर हो चुकी है रिसर्च
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि पेट के मित्र बैक्टीरिया से माइटोकांड्रिया को सही करने के लिए एक रिसर्च चूहे पर पूरी तरह सफल हो चुकी है। अब इंसान के पेट से बैक्टीरिया लेकर रिसर्च किया जा रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही इसके सकारात्मक परिणाम आएंगे। अगर ऐसा होता है तो यह चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि होगी।
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डॉ. अग्रवाल ने बताया कि वह और उनकी टीम ने चंडीगढ़ पीजीआई के साथ मिलकर माइटोकांड्रिया को मानव शरीर में ही दुरुस्त करने का तरीका ढूंढ़ निकाला है। इसमें इंसान के पेट में मित्र बैक्टीरिया काफी कारगार साबित होंगे। मित्र बैक्टीरिया से खराब हो चुके माइटोकांड्रिया को ठीक कराया जा सकता है। इसके सही होने से मधुमेह, अस्थमा, लंग फाइब्रोसिस (कैंसर) का भी काफी हद तक इलाज किया जा सकता है। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि इस पर हाल ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिसर्च काम शुरू हुआ है। पिछले साल ही अमेरिकन सोसायटी की तरफ से आयोजित सिंपोेजियम में भी इसको लेकर प्रस्ताव पास हुआ, जिसकी अध्यक्षता डॉ. अग्रवाल ने खुद की थी। समारोह में आईआईएससी बंगलूरू के डॉ. राघवेंद्र गडाकर ने सोशल रेगुलेशन ऑफ प्रोडक्शन इन ट्रॉपिकल इंसेक्ट सोसायटी विषय पर कई रिसर्च पत्र प्रस्तुत किए। ऑरोलैब्स मदुरै (तमिलनाडु) के आरडी श्रीराम, डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्रो. एस गणेश, डॉ. आर रामकृष्णनन, प्रो. जानकी सेन, प्रो. अशोक कुमार, प्रो. अरुण शुक्ला, डॉ. जयनधरन राव आदि मौजूद रहे।
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क्या है माइटोकांड्रिया
प्रत्येक इंसान के शरीर में कोशिकाएं होती हैं। माइटोकांड्रिया इन कोशिकाओं का एक हिस्सा होता है। तमाम कारणों से यह डैमेज हो जाता है। इसके चलते इंसान को कई बीमारियां हो जाती हैं।
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चूहे पर हो चुकी है रिसर्च
डॉ. अग्रवाल ने बताया कि पेट के मित्र बैक्टीरिया से माइटोकांड्रिया को सही करने के लिए एक रिसर्च चूहे पर पूरी तरह सफल हो चुकी है। अब इंसान के पेट से बैक्टीरिया लेकर रिसर्च किया जा रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही इसके सकारात्मक परिणाम आएंगे। अगर ऐसा होता है तो यह चिकित्सा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि होगी।