मायावती ने बताई क्या होगी सपा व भाजपा के खिलाफ रणनीति
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बसपा सुप्रीमो मायावती ने पार्टी नेताओं, पदाधिकारियों और उम्मीदवारों से कहा है कि वे सपा और भाजपा की मिलीभगत के बारे में जनता को बताएं।
कैराना से लेकर कांधला तक दोनों दलों ने मिलकर जिस तरह माहौल को सांप्रदायिक बनाकर उसका चुनावी लाभ उठाने की साजिश रची, उसकी जानकारी दें। उन्होंने कहा कि प्रदेश का माहौल सपा और भाजपा के खिलाफ तथा बसपा के पक्ष में है।
मायावती रविवार को बसपा के प्रदेश मुख्यालय में संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों, पार्टी विधायकों व आगामी विधानसभा चुनाव के लिए तय उम्मीदवारों को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने पार्टी संगठन की जमीनी स्तर पर तैयारियों व सर्वसमाज में पार्टी के जनाधार को बढ़ाने के कार्यों के साथ-साथ चुनावी तैयारियों की चर्चा की और जरूरी दिशा-निर्देश दिए।
मायावती ने कहा कि जैसे-जैसे प्रदेश में विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे साबित होता जा रहा है कि सपा और भाजपा मिलकर बसपा के खिलाफ काम कर रही हैं। चुनाव को प्रभावित करने के लिए सांप्रदायिक दंगा कराने का षड्यंत्र कर रही हैं।
कैराना मामले पर नजर आई सपा व बसपा की मिलीभगत
उन्होंने कहा कि भाजपा ने कैराना क्षेत्र से लोगों के पलायन को जिस तरह से प्रचारित किया और सपा सरकार ने जिस तरह से पलायन की वास्तविकता को उजागर करने में लापरवाही बरती, वह दोनों की मिलीभगत साबित करने के लिए काफी है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश को सांप्रदायिकता की आग में झोंकने की पूरी तैयारी थी लेकिन मीडिया ने इस साजिश को विफल कर दिया है। मायावती ने बाद में जोनल को-ऑर्डिनेटरों के साथ अलग-अलग बैठक की और उनके क्षेत्र के हिसाब से दिशा-निर्देश भी दिए।
चुनावी बाजी हारते देख भाजपा, सपा, कांग्रेस रचेंगी साजिश
मायावती ने कहा कि बसपा को नुकसान पहुंचाने के लिए भाजपा, सपा व कांग्रेस साम, दाम, दंड, भेद जैसे सभी हथकंडों का इस्तेमाल करेंगी। इन्हें अपनी चुनावी बाजी हारती हुई नजर आ रही है।
प्रदेश के लोगों ने अमन-चैन व शांति-व्यवस्था के लिए बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का मन बना लिया है। ऐसे में कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है कि वे जनता के दु:ख-सुख के साथी बनें।
सरकार की जनविरोधी नीतियों से बड़े पैमाने पर हुआ पलायन
मायावती ने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार की जनविरोधी नीतियों से लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। इस वजह से प्रदेश के समस्त क्षेत्रों से पलायन हुआ है।
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के दो वर्ष का कार्यकाल व प्रदेश में सपा सरकार का चार साल का कार्यकाल जनता से विश्वासघात करने वाला साबित हुआ है।
कांग्रेस की मदद पर दी सफाई, अकले चुनाव लड़ने का वादा
मायावती ने काडर को समझाया कि सांप्रदायिक ताकतों को कमजोर करने की नीति के तहत ही उत्तराखंड, मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव में भाजपा को हराने का काम किया गया है।
बसपा आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड व पंजाब में भी अकेले विधानसभा चुनाव लड़ेगी। कहीं भी किसी पार्टी के साथ चुनावी गठबंधन या समझौता नहीं किया जाएगा।
बसपा की मीटिंग में कांग्रेस व सपा विधायक भी पहुंचे
बसपा की बैठक में विधान परिषद व राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग करने वाले तीन विधायक भी पहुंचे। बैठक में राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र अमेठी की तिलोई सीट से कांग्रेस विधायक मो. मुस्लिम व श्याना (बुलंदशहर) से कांग्रेस विधायक दिलनवाज खान व हरदोई से सपा विधायक श्याम प्रकाश के शामिल होने की चर्चा रही। हालांकि पार्टी में इनके शामिल होने का एलान नहीं किया गया।
बैठक में बसपा के राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र, नेता प्रतिपक्ष विधान परिषद नसीमुद्दीन सिद्दीकी, नेता प्रतिपक्ष विधानसभा स्वामी प्रसाद मौर्य, प्रदेश अध्यक्ष राम अचल राजभर, सांसद अशोक सिद्धार्थ व पूर्व सांसद बृजेश पाठक उपस्थित रहे।