फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Crime ›   Scissors in neck of baba running for treatment in kalpna chawla medical college

गर्दन में आर-पार घुसी थी कैंची, निकलवाने के लिए 11 घंटे तक भटकता रहा बाबा

Sun, 13 Aug 2017 03:45 PM IST
amarujala.com, Presented by: शाहरुख खान
amarujala.com, Presented by: शाहरुख खान Updated Sun, 13 Aug 2017 03:45 PM IST
विज्ञापन
Scissors in neck of baba running for treatment in kalpna chawla medical college
फाइल
उत्तर प्रदेश की सीएम सिटी गोरखपुर मेडिकल कॉलेज की करतूत की वजह से चर्चा में है। कॉलेज प्रशासन की लापरवाही से करीब 40 मासूमों सहित 62 लोगों की जान चली गई है। ऐसा ही कुछ हाल हरियाणा की सीएम सिटी करनाल के मेडिकल कॉलेज का भी है। इस मेडिकल कॉलेज में स्वास्थ्य सेवाओं का हाल यह है कि एक बाबा की गर्दन में घुसी कैंची को निकालने में 11 घंटे लग गए।
विज्ञापन


यही नहीं, बाबा को चेकअप के नाम पर कभी नए भवन तो कभी पुराने भवन भेजा गया। हालांकि डाक्टरों का कहना है कि बाबा का केस बहुत संवेदनशील था। इस कारण ऑपरेशन में समय लगा। 
विज्ञापन


जानकारी के मुताबिक, बाबा आत्मनाथ गिरी जनकपुरी के एक अखाड़े में रहते हैं। शनिवार सुबह बाबा के एक चेले ने कैंची से बाबा पर हमला कर दिया। कैंची बाबा के गर्दन के आरपार होकर फंस गई। बाबा की चीख सुनकर आसपास के लोग आ गए और बाबा को इलाज के लिए कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर लेकर गए।
विज्ञापन
विज्ञापन


बाबा सुबह छह बजे मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर पहुंचे थे, लेकिन 11 बजे तक वह प्राथमिक उपचार तक के लिए भटकते रहे। जब मामले को मीडिया ने उठाया तो 11 बजे के बाद सिटी थाना पुलिस अस्पताल पहुंची और बाबा के बयान दर्ज करके इलाज शुरू करवाया। 

शाम करीब चार बजे डॉक्टरों की टीम ने बाबा का ऑपरेशन शुरू किया, जोकि डेढ़ घंटे तक चला। शाम करीब साढ़े पांच बजे बाबा की गर्दन से कैंची निकाली गई। इसके बाद बाबा को आईसीयू में शिफ्ट किया गया। फिलहाल, बाबा की हालात ठीक बताई जा रही है।

बाबा को नहीं मिला स्ट्रेचर
इलाज के लिए सुबह छह बजे अस्पताल पहुंचे बाबा 11 बजे तक इधर-उधर पैदल चक्कर लगाते रहे। इस बीच बाबा को स्ट्रेचर तक नहीं मिला। बाबा को एक्सरे करवाने के लिए ट्रामा सेंटर से करीब 600 मीटर की दूरी पर पुरानी बिल्डिंग में एक्सरे और सीटी स्कैन के लिए पैदल जाना पड़ा। बताया गया कि ट्रामा सेंटर में स्ट्रेचरों की काफी कमी है। इस कारण गंभीर घायल मरीजों को उनके परिजन गोद में उठाकर ट्रामा सेंटर में पहुंचाते हैं। 

तीन घंटे तक बिजली नहीं होने से नहीं हो पाया एक्सरे 
बाबा सुबह छह बजे मेडिकल कॉलेज आ गए थे। 11 बजे तक बाबा का प्राथमिक उपचार तक नहीं किया गया। 11 बजे के बाद बाबा को एक्सरे और सीटी स्कैन के लिए भेजा गया तो वहां तीन घंटे तक बिजली नहीं थी। इस कारण न तो एक्सरे हो पाया न सिटी स्कैन। बिजली आने के बाद सीटी स्कैन और एक्सरे हुआ। जब तक रिपोर्ट नहीं आई तब तक बाबा दर्द से तड़पते रहे।


बाबा की गर्दन में कैंची आरपार हो गई थी। यह बहुत संवेदनशील था। गर्दन में खाने और सांस की नलियां होती हैं। इसी के साथ रीढ़ की भी हड्डी होती है। इस कारण इसका सावधानी पूर्वक ऑपरेशन किया गया। 
-डॉ. जगदीश दुरेजा, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, कल्पना चावला राजकीय मेडिकल कॉलेज करनाल
 
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed