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राहुल गांधी का दौराः पुलिस ने राजीव गांधी हत्याकांड की सुरक्षा चूकें गिनाईं, 31 शर्तें भी लगाईं
Thu, 17 Sep 2026 10:43 PM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Thu, 17 Sep 2026 10:43 PM IST
सार
19 सितंबर को होने वाले राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के लिए पुलिस ने राजीव गांधी हत्याकांड की सुरक्षा चूकों का हवाला देते हुए 31 शर्तें जारी की हैं। आयोजकों को 1500 स्वयंसेवक, 40 सीसीटीवी, पार्किंग और चिकित्सा जैसी व्यवस्थाएं करनी होंगी।
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राहुल गांधी के छात्रों की गूंज कार्यक्रम का दृश्य।
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के इंदौर में 19 सितंबर को प्रस्तावित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम को लेकर पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड़ में आ गया है। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए पुलिस ने आयोजकों के सामने 31 कड़ी शर्तें रखी हैं। इसके साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के समय हुई सुरक्षा चूकों का ब्योरा भी साझा किया गया है। 21 मई 1991 को श्रीपेरंबदूर में हुई घटना की जांच के लिए गठित जस्टिस जेएस वर्मा आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए पुलिस ने आयोजकों की जिम्मेदारियां तय की हैं। कांग्रेस शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे को दी गई शर्तों की सूची में स्पष्ट किया गया है कि इन सभी नियमों का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा।
1500 स्वयंसेवक तैनात करना होंगे
कार्यक्रम स्थल पर भीड़ को नियंत्रित रखने के लिए पूरे मैदान को अधिकतम 2 हजार लोगों की क्षमता वाले छोटे सेक्टरों में बांटा जाएगा। प्रत्येक सेक्टर में प्रभारी बनाए जाएंगे। आयोजकों को अपेक्षित भीड़ की संख्या और महिला-पुरुष अनुपात का शपथ-पत्र देना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा कम से कम 1500 स्वयंसेवक तैनात करने की शर्त रखी गई है, जिनमें न्यूनतम 500 महिला स्वयंसेवक होंगी।
सीसीटीवी से हर कोने की निगरानी होगी
सुरक्षा जांच को पुख्ता करने के लिए 6 प्रवेश और 8 निकास द्वार बनाए जाएंगे, जिनकी चौड़ाई कम से कम 6 मीटर होगी। जांच के लिए 20 डीएफएमडी और 30 से 40 एचएचएमडी लगाए जाएंगे। पूरे परिसर पर नजर रखने के लिए 40 नाइट-विजन सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जिनकी रिकॉर्डिंग को 30 दिनों तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा।
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मंच की सुरक्षा और आपातकालीन सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान
मंच के सामने 25 से 30 फीट का डी-एरिया पूरी तरह खाली रहेगा, जहां केवल सुरक्षा बल मौजूद रहेंगे। यहां डबल बैरिकेडिंग की जाएगी और मंच तक पहुंचने के लिए नियंत्रित मार्ग होगा। मंच के 30 मीटर के दायरे में एंबुलेंस तैयार रहेगी। इसके अलावा आपात चिकित्सा के लिए दो डॉक्टर, चार पैरामेडिक और चार एंबुलेंस तैनात रहेंगी, जिनमें एक एएलएस एंबुलेंस शामिल होगी। पास के अस्पताल में बेड रिजर्व रखने का टाई-अप भी अनिवार्य है।
कार्यक्रम रोकने का अंतिम निर्णय प्रशासन और पुलिस के पास होगा
पंडाल को अग्निरोधी सामग्री से निर्मित करना होगा। मुख्य मार्गों पर पार्किंग प्रतिबंधित रहेगी और दूरस्थ पार्किंग से शटल सेवा की जिम्मेदारी आयोजकों की होगी। परिसर में हर 500 लोगों पर जल-बिंदु और हर 250 लोगों पर मोबाइल शौचालय की व्यवस्था करनी होगी। मौसम बिगड़ने या आपात स्थिति उत्पन्न होने पर कार्यक्रम को रोकने, छोटा करने या रद्द करने का अंतिम अधिकार पुलिस और जिला प्रशासन के पास रहेगा।
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1500 स्वयंसेवक तैनात करना होंगे
कार्यक्रम स्थल पर भीड़ को नियंत्रित रखने के लिए पूरे मैदान को अधिकतम 2 हजार लोगों की क्षमता वाले छोटे सेक्टरों में बांटा जाएगा। प्रत्येक सेक्टर में प्रभारी बनाए जाएंगे। आयोजकों को अपेक्षित भीड़ की संख्या और महिला-पुरुष अनुपात का शपथ-पत्र देना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा कम से कम 1500 स्वयंसेवक तैनात करने की शर्त रखी गई है, जिनमें न्यूनतम 500 महिला स्वयंसेवक होंगी।
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सीसीटीवी से हर कोने की निगरानी होगी
सुरक्षा जांच को पुख्ता करने के लिए 6 प्रवेश और 8 निकास द्वार बनाए जाएंगे, जिनकी चौड़ाई कम से कम 6 मीटर होगी। जांच के लिए 20 डीएफएमडी और 30 से 40 एचएचएमडी लगाए जाएंगे। पूरे परिसर पर नजर रखने के लिए 40 नाइट-विजन सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, जिनकी रिकॉर्डिंग को 30 दिनों तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा।
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मंच की सुरक्षा और आपातकालीन सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान
मंच के सामने 25 से 30 फीट का डी-एरिया पूरी तरह खाली रहेगा, जहां केवल सुरक्षा बल मौजूद रहेंगे। यहां डबल बैरिकेडिंग की जाएगी और मंच तक पहुंचने के लिए नियंत्रित मार्ग होगा। मंच के 30 मीटर के दायरे में एंबुलेंस तैयार रहेगी। इसके अलावा आपात चिकित्सा के लिए दो डॉक्टर, चार पैरामेडिक और चार एंबुलेंस तैनात रहेंगी, जिनमें एक एएलएस एंबुलेंस शामिल होगी। पास के अस्पताल में बेड रिजर्व रखने का टाई-अप भी अनिवार्य है।
कार्यक्रम रोकने का अंतिम निर्णय प्रशासन और पुलिस के पास होगा
पंडाल को अग्निरोधी सामग्री से निर्मित करना होगा। मुख्य मार्गों पर पार्किंग प्रतिबंधित रहेगी और दूरस्थ पार्किंग से शटल सेवा की जिम्मेदारी आयोजकों की होगी। परिसर में हर 500 लोगों पर जल-बिंदु और हर 250 लोगों पर मोबाइल शौचालय की व्यवस्था करनी होगी। मौसम बिगड़ने या आपात स्थिति उत्पन्न होने पर कार्यक्रम को रोकने, छोटा करने या रद्द करने का अंतिम अधिकार पुलिस और जिला प्रशासन के पास रहेगा।
