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सिंहस्थ-2028 से पहले बारहमासी होगी शिप्रा: सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी प्रोजेक्ट 80% पूरा, इस मानसून पहली टेस्टिंग
Fri, 05 Jun 2026 06:51 PM IST
उज्जैन ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
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Published by: उज्जैन ब्यूरो
Updated Fri, 05 Jun 2026 06:51 PM IST
सार
उज्जैन में सिंहस्थ-2028 के लिए स्थायी जल व्यवस्था सुनिश्चित करने की तैयारी तेज हो गई है। 445 करोड़ रुपये की सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना का अधिकांश काम पूरा हो चुका है और अब मानसून में इसकी पहली अहम परीक्षा होने जा रही है।
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परियोजना का 80 प्रतिशत कार्य पूर्ण
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विस्तार
सिंहस्थ-2028 के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं को शिप्रा नदी में शुद्ध और पर्याप्त जल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाई जा रही सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है। जल संसाधन विभाग की इस महत्वाकांक्षी योजना का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और आगामी मानसून में इसकी पहली बड़ी तकनीकी टेस्टिंग की जाएगी।
जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री शुभम अग्रवाल ने बताया कि 445 करोड़ रुपये की इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य शिप्रा नदी को बारहमासी जल उपलब्ध कराना है। इसके तहत सेवरखेड़ी में 5.5 मीटर ऊंचा और 100 मीटर लंबा बैराज लगभग तैयार हो चुका है। यहां एकत्रित बरसाती पानी को 5.5 किलोमीटर लंबी और 3000 मिमी व्यास की पाइप लाइन के माध्यम से सिलारखेड़ी पहुंचाया जाएगा।
विशाल जलाशय के रूप में विकसित हो रहा सिलारखेड़ी
सिलारखेड़ी स्थित पुराने तालाब को बड़े जलाशय के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां 22 मीटर ऊंचा और 6.5 किलोमीटर लंबा बांध बनाया जा रहा है, जिसका लगभग 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। परियोजना के तहत जल संग्रहण क्षमता को 5 मिलियन क्यूबिक मीटर से बढ़ाकर 51 मिलियन क्यूबिक मीटर किया जा रहा है, जिससे वर्षभर पानी का भंडारण संभव हो सकेगा।
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ये भी पढ़ें: उज्जैन का ‘त्रिनेत्र’ बना देशभर में मिसाल: श्री महाकाल मंदिर के एआई सिस्टम को मिलेगा ये पुरस्कार, बढ़ा गौरव
मानसून में होगी पहली बड़ी टेस्टिंग
कार्यपालन यंत्री शुभम अग्रवाल के अनुसार आगामी मानसून में बैराज और बांध में पानी भरकर उनकी क्षमता, संरचनात्मक मजबूती और कार्यप्रणाली का परीक्षण किया जाएगा। यह परियोजना के लिए महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।
मई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य
परियोजना को मई 2027 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। दूसरे चरण में सिलारखेड़ी से त्रिवेणी घाट तक 6.30 किलोमीटर लंबी और 1300 मिमी व्यास की पाइपलाइन बिछाई जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर इसी पाइपलाइन के जरिए शिप्रा नदी में पानी छोड़ा जाएगा।
इस परियोजना का निर्माण कार्य ग्वालियर की करण डेवलपर्स कंपनी द्वारा किया जा रहा है। मौके पर कार्यपालन यंत्री शुभम अग्रवाल और एसडीओ योगेश सेवक की टीम निगरानी कर रही है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 13 जनवरी 2025 को इस परियोजना का भूमिपूजन किया था।
जल संसाधन विभाग का मानना है कि सिंहस्थ-2028 के लिए स्थायी जल व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री शुभम अग्रवाल ने बताया कि 445 करोड़ रुपये की इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य शिप्रा नदी को बारहमासी जल उपलब्ध कराना है। इसके तहत सेवरखेड़ी में 5.5 मीटर ऊंचा और 100 मीटर लंबा बैराज लगभग तैयार हो चुका है। यहां एकत्रित बरसाती पानी को 5.5 किलोमीटर लंबी और 3000 मिमी व्यास की पाइप लाइन के माध्यम से सिलारखेड़ी पहुंचाया जाएगा।
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विशाल जलाशय के रूप में विकसित हो रहा सिलारखेड़ी
सिलारखेड़ी स्थित पुराने तालाब को बड़े जलाशय के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां 22 मीटर ऊंचा और 6.5 किलोमीटर लंबा बांध बनाया जा रहा है, जिसका लगभग 80 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। परियोजना के तहत जल संग्रहण क्षमता को 5 मिलियन क्यूबिक मीटर से बढ़ाकर 51 मिलियन क्यूबिक मीटर किया जा रहा है, जिससे वर्षभर पानी का भंडारण संभव हो सकेगा।
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मानसून में होगी पहली बड़ी टेस्टिंग
कार्यपालन यंत्री शुभम अग्रवाल के अनुसार आगामी मानसून में बैराज और बांध में पानी भरकर उनकी क्षमता, संरचनात्मक मजबूती और कार्यप्रणाली का परीक्षण किया जाएगा। यह परियोजना के लिए महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।
मई 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य
परियोजना को मई 2027 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। दूसरे चरण में सिलारखेड़ी से त्रिवेणी घाट तक 6.30 किलोमीटर लंबी और 1300 मिमी व्यास की पाइपलाइन बिछाई जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर इसी पाइपलाइन के जरिए शिप्रा नदी में पानी छोड़ा जाएगा।
इस परियोजना का निर्माण कार्य ग्वालियर की करण डेवलपर्स कंपनी द्वारा किया जा रहा है। मौके पर कार्यपालन यंत्री शुभम अग्रवाल और एसडीओ योगेश सेवक की टीम निगरानी कर रही है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 13 जनवरी 2025 को इस परियोजना का भूमिपूजन किया था।
जल संसाधन विभाग का मानना है कि सिंहस्थ-2028 के लिए स्थायी जल व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में यह परियोजना महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

परियोजना का 80 प्रतिशत कार्य पूर्ण

परियोजना का 80 प्रतिशत कार्य पूर्ण

परियोजना का 80 प्रतिशत कार्य पूर्ण
