ई-रिक्शा ठगी का हाईटेक खेल: ऐप से रिक्शा बंद कर बनते थे मददगार, फिर वसूलते थे रुपये, एक हिरासत में
उज्जैन में ई-रिक्शा चालकों से ठगी करने वाले हाईटेक गिरोह का खुलासा हुआ है। आरोपी मोबाइल ऐप से ई-रिक्शा का सिस्टम बंद कर खुद मैकेनिक बनकर 200-300 रुपये वसूलते थे। शिकायत पर पुलिस ने एक युवक को हिरासत में लिया है। तकनीकी जांच और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
विस्तार
शहर में ई-रिक्शा चालकों को निशाना बनाने वाले हाईटेक ठगों का पर्दाफाश हुआ है। शातिर बदमाश मोबाइल ऐप से चलती ई-रिक्शा को हैक कर बंद कर देते थे, फिर खुद तकनीकी एक्सपर्ट बनकर चालकों से 200-300 रुपये ऐंठते थे। असंगठित ई-रिक्शा चालक संघ की शिकायत पर पुलिस ने नवली निवासी 18 वर्षीय रीतेश भानूपा को हिरासत में लिया है। पुलिस संगठित गिरोह और ऐप के तकनीकी पहलुओं की जांच कर रही है।
शहर में रात के समय सुनसान और कम भीड़ वाले इलाकों में ई-रिक्शा चालकों से ठगी का नया तरीका सामने आया है। शिकायत के मुताबिक, कुछ युवक मोबाइल ऐप के जरिए ई-रिक्शा की बैटरी या सिस्टम को हैक कर अचानक बंद कर देते थे। वाहन बंद होते ही आरोपी खुद मददगार बनकर चालक के पास पहुंचते और कुछ मिनटों में रिक्शा चालू करने के नाम पर 200 से 300 रुपये या उससे ज्यादा वसूल लेते।
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यह लोग कई बार भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी बैटरी ब्लॉक कर जाम लगवा देते थे। लगातार शिकायतें मिलने पर असंगठित ई-रिक्शा चालक-परिचालक संघ के पदाधिकारियों ने एडिशनल एसपी आलोक शर्मा से शिकायत की। एएसपी के निर्देश पर क्राइम ब्रांच और नीलगंगा थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने जांच शुरू की।
जांच के बाद पुलिस ने ग्राम नवली निवासी 18 वर्षीय रीतेश भानूपा को संदेह के आधार पर हिरासत में लिया है। उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या वाकई किसी ऐप से ई-रिक्शा का सिस्टम हैक किया जा सकता है। इसके लिए तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि पूरे गिरोह का खुलासा हो सके।
इनका कहना
ई-रिक्शा चालकों की शिकायत मिली थी कि कुछ लोग ऐप के जरिए रिक्शा बंद कर पैसे वसूल रहे हैं। एक संदेही को हिरासत में लिया है। जांच कर रहे हैं कि तकनीकी रूप से यह संभव है या नहीं। तकनीकी विशेषज्ञों से राय ली जा रही है। चालकों से अपील है कि अनजान लोगों को पैसे न दें, अधिकृत सर्विस सेंटर से ही संपर्क करें।
- आलोक शर्मा, एडिशनल एसपी, उज्जैन
