उज्जैन: कांग्रेस नेत्री नूरी खान ने दिया इस्तीफा, पार्टी पर अल्पसंख्यको की उपेक्षा का लगाया आरोप
नूरी ने पार्टी पर अल्पसंख्यकों की उपेक्षा का आरोप लगाया है। इस्तीफे में जिक्र किया कि कांग्रेस पार्टी की विचारधारा अल्पसंख्यक वर्ग के प्रति भेदभाव पूर्ण है।
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मध्य प्रदेश के उज्जैन से कांग्रेस को झटका लगने वाली खबर सामने आई है। कांग्रेस नेत्री नूरी खान ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। वे कांग्रेस की प्रवक्ता भी थीं। नूरी खान कांग्रेस की तर्जतर्रार नेत्री के रूप में ख्यात रहीं है। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ को इस्तीफा लिखकर ट्वीट किया है। नूरी ने पार्टी पर अल्पसंख्यकों की उपेक्षा का आरोप लगाया है। इस्तीफे में जिक्र किया कि कांग्रेस पार्टी की विचारधारा अल्पसंख्यक वर्ग के प्रति भेदभाव पूर्ण है।
नूरी खान ने जो इस्तीफा लिखा है वह सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल पत्र में लिखा है कि मैने स्वयं यह महसूस किया कि मुझे जिस तरह से इतनी मेहनत और लगन से कार्य करने के बाद भी सिर्फ वर्ग विशेष होने की वजह से पार्टी में जिम्मेदार पदों पर नहीं बैठाया जाता। जब मेरे साथ यह स्थिति है तो प्रदेश के अन्य जिलों में अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व की पार्टी में क्या स्थिति होगी, यह समझा जा सकता है।
कांग्रेस पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा..
— Noori Khan (@NooriKhanINC) December 5, 2021
कांग्रेस पार्टी में रहकर अल्पसंख्यक कार्यकर्ताओं एवं अपने लोगों को राजनैतिक एवं सामाजिक न्याय दिलाने में असहज महसूस कर रही हूँ भेदभाव की शिकार हो रही हूँ अतः अपने सारे पदों से आज इस्तीफ़ा दे रही हूँ@RahulGandhi @OfficeOfKNath @INCIndia pic.twitter.com/1QEON7RBBs
पढ़िए नूरी ने इस्तीफ में क्या-क्या कहा
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ को लिखे पत्र में उन्होंने लिखा कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में कांग्रेस पार्टी की विचारधारा अल्पसंख्यक समाज के प्रति भेदभाव पूर्ण रवैया की है। पार्टी में सिर्फ इस वजह से प्रतिभाओं को मौका नहीं दिया जाता क्योंकि अल्पसंख्यक वर्ग से हैं। यह मेरा कोई राजनीतिक आरोप नहीं है। आप खुद तथ्यात्मक रूप से आकलन करें कि प्रदेश के जिलों में जिला कांग्रेस कमेटियों में कितने अध्यक्ष अल्पसंख्यक वर्ग से हैं। प्रदेश के अग्रिम संगठनों में कोई प्रदेश अध्यक्ष अल्पसंख्यक वर्ग से नहीं है। मैंने स्वयं यह महसूस किया है कि मुझे जिस तरह से इतनी मेहनत और लगन से कार्य करने के बाद भी सिर्फ वर्ग विशेष से होने की वजह से पार्टी मैं जिम्मेदार पद पर नहीं बैठाया जाता, जबकि यदि यह स्थिति मेरे जैसी कार्यकर्ता के साथ है प्रदेश के अन्य जिले के अल्पसंख्यक वर्ग के कार्यकर्ताओं में कितना उपेक्षा का व्यवहार होगा।
उन्होंने लिखा कि सांप्रदायिक संगठनों से लड़ने की बात सिर्फ कागजों पर है यदि हम अपनी पार्टी में इसका पालन नहीं करा सकते तो शायद हम अपनी विचारधारा से विमुख हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में मेरे लिए कार्य कर पाना असंभव है मैं आपके प्रति व्यक्तिगत रूप से कृतज्ञता व्यक्त करती हूं और अपने सभी कांग्रेस के पदों से इस्तीफा देती हूं। साथ ही मैं अपनी प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा देती हूं।
उन्होंने लिखा कि अपने से जुड़े कार्यकर्ताओं जनता को यह आश्वस्त करना चाहती हूं कि भविष्य में अपने राजनीतिक आंदोलन को और मजबूत करने के लिए आपकी जनसेवा के लिए नई राजनीतिक दिशा जल्दी तय करूंगी और आपके बीच में राजनीतिक जन सेवा के लिए कार्य करूंगी। एक नई राजनीतिक दिशा और सोच के साथ आप सभी के सहयोग और प्यार के लिए धन्यवाद!
उन्होंने इस्तीफे के अंतिम में लिखा, 'उसूलों पर गर आंच आए तो टकराना जरूरी है जिंदा हो तो जिंदा नजर आना जरूरी है.....'
