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टीकमगढ़ में नकली खाद बेचने पर कार्रवाई: दुकानदार के खिलाफ एफआईआर; डीएपी की पांच बोरियां जब्त
Sun, 18 Oct 2026 07:05 PM IST
टीकमगढ़ ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टीकमगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टीकमगढ़
Published by: टीकमगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 18 Oct 2026 07:05 PM IST
सार
मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ में अमानक खाद बेचने के मामले में जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। हवेली रोड स्थित मेसर्स अनिल एंड संस के प्रोपराइटर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। जांच में बिना लॉट नंबर की डीएपी की पांच बोरियां जब्त की गईं। प्रयोगशाला जांच में खाद में पोषक तत्वों की मात्रा निर्धारित मानकों से कम पाई गई।
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कार्रवाई करता कृषि विभाग
विस्तार
टीकमगढ़ किसानों को अमानक और नकली खाद बेचने के मामले में टीकमगढ़ जिला प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। हवेली रोड स्थित मेसर्स अनिल एंड संस के प्रोपराइटर कृष्णा भामड़ी के विरुद्ध पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई गई है। कृषि विभाग की जांच के दौरान फर्म के गोदाम से बिना लॉट नंबर की डीएपी की पांच बोरियां जब्त की गईं और गोदाम को सील कर दिया गया। प्रयोगशाला जांच में खाद में पोषक तत्वों की मात्रा निर्धारित मानकों से काफी कम पाई गई।
किसान की शिकायत पर हुई कार्रवाई
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम अस्तोन, तहसील टीकमगढ़ निवासी किसान अजय साहू और उनके भाई अभय साहू ने 29 सितंबर 2026 को संबंधित फर्म से डीएपी और यूरिया खरीदा था। डीएपी की बोरी पर लॉट नंबर अंकित नहीं होने के कारण किसानों को खाद की गुणवत्ता पर संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने कृषि विभाग को शिकायत की।
मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने उपसंचालक कृषि विभाग को कार्रवाई के निर्देश दिए। सहायक संचालक कृषि रवि अमलियार और उर्वरक निरीक्षक एवं प्रभारी वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कैलाश प्रसाद अहिरवार के जांच दल ने फर्म का निरीक्षण किया। गोदाम में बिना लॉट नंबर की डीएपी की चार बोरियां मिलीं। किसान द्वारा लौटाई गई एक बोरी सहित कुल पांच बोरियां जब्त की गईं।
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प्रयोगशाला रिपोर्ट में सामने आई गंभीर गड़बड़ी
जब्त खाद का नमूना उर्वरक गुण नियंत्रण प्रयोगशाला, ग्वालियर भेजा गया था। 14 अक्टूबर 2026 को प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, डीएपी में नाइट्रोजन की मात्रा निर्धारित मानक 18 प्रतिशत के मुकाबले केवल 1.75 प्रतिशत और फास्फोरस की मात्रा 46 प्रतिशत के मुकाबले मात्र 3.20 प्रतिशत पाई गई। रिपोर्ट में पोषक तत्वों की मात्रा में भारी अंतर सामने आने के बाद फर्म के खिलाफ कार्रवाई की गई।
ये भी पढ़ें- ग्वालियर में बड़ा हादसा: शीतला माता मंदिर जा रहे श्रद्धालुओं को ट्रक ने कुचला, 15 की मौत, 26 घायल
किसानों के हितों से समझौता नहीं
कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने स्पष्ट किया कि किसानों को गुणवत्तायुक्त खाद उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। अमानक उर्वरक की बिक्री, कालाबाजारी और किसानों के साथ धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कृषि विभाग के अधिकारियों को खाद विक्रय केंद्रों और गोदामों का नियमित निरीक्षण करने तथा अनियमितता मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
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किसान की शिकायत पर हुई कार्रवाई
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम अस्तोन, तहसील टीकमगढ़ निवासी किसान अजय साहू और उनके भाई अभय साहू ने 29 सितंबर 2026 को संबंधित फर्म से डीएपी और यूरिया खरीदा था। डीएपी की बोरी पर लॉट नंबर अंकित नहीं होने के कारण किसानों को खाद की गुणवत्ता पर संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने कृषि विभाग को शिकायत की।
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मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने उपसंचालक कृषि विभाग को कार्रवाई के निर्देश दिए। सहायक संचालक कृषि रवि अमलियार और उर्वरक निरीक्षक एवं प्रभारी वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कैलाश प्रसाद अहिरवार के जांच दल ने फर्म का निरीक्षण किया। गोदाम में बिना लॉट नंबर की डीएपी की चार बोरियां मिलीं। किसान द्वारा लौटाई गई एक बोरी सहित कुल पांच बोरियां जब्त की गईं।
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प्रयोगशाला रिपोर्ट में सामने आई गंभीर गड़बड़ी
जब्त खाद का नमूना उर्वरक गुण नियंत्रण प्रयोगशाला, ग्वालियर भेजा गया था। 14 अक्टूबर 2026 को प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार, डीएपी में नाइट्रोजन की मात्रा निर्धारित मानक 18 प्रतिशत के मुकाबले केवल 1.75 प्रतिशत और फास्फोरस की मात्रा 46 प्रतिशत के मुकाबले मात्र 3.20 प्रतिशत पाई गई। रिपोर्ट में पोषक तत्वों की मात्रा में भारी अंतर सामने आने के बाद फर्म के खिलाफ कार्रवाई की गई।
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किसानों के हितों से समझौता नहीं
कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने स्पष्ट किया कि किसानों को गुणवत्तायुक्त खाद उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। अमानक उर्वरक की बिक्री, कालाबाजारी और किसानों के साथ धोखाधड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। कृषि विभाग के अधिकारियों को खाद विक्रय केंद्रों और गोदामों का नियमित निरीक्षण करने तथा अनियमितता मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

कार्रवाई करता कृषि विभाग

कार्रवाई करता कृषि विभाग
