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राजस्व विभाग का कारनामा: एमपी में जीवित किसान को रिकॉर्ड में बताया मृत, जिंदा होने की गवाही दे-देकर थका पीड़ित
Tue, 29 Nov 2022 02:13 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सतना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सतना
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Tue, 29 Nov 2022 02:13 PM IST
सार
पटवारी ने किसान से किसान सम्मान निधि योजना का लाभ निरंतर लेने के लिए रिश्वत की मांग की थी, जब किसान पटवारी को पांच हजार रुपये रिश्वत के तौर पर नहीं दे सका, तो पटवारी ने उसे रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया।
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जिंदा किसान रिकॉर्ड में मृत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मध्यप्रदेश गजब है, यहां आये दिन हर विभाग की अजीबोगरीब लापरवाहियां देखने को मिलती रहती हैं। हाल ही में सतना जिले में राजस्व विभाग की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। विभाग ने एक जीवित किसान को रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया है, पीड़ित किसान बीते चार साल से खुद के जिंदा होने की गवाही दे-देकर थक चुका है।
रिश्वत न देने पर पटवारी ने घोषित किया मृत
मामला सतना जिले के सहिजना गांव का है। यहां रामसुजान चौधरी सीमांत किसान हैं। सरकार ने 2018 में इन्हें किसान सम्मान निधि दी थी। किसान को योजना के तहत चार किश्तें भी मिली, लेकिन एक साल बाद उन्हें योजना का लाभ मिलना बंद हो गया। दरअसल पटवारी गणेश कोल ने योजना का लाभ अनवरत मिलते रहने के एवज में किसान से पांच हजार रुपये की मांग की थी। किसान ने किसी तरह 2000 रुपये पटवारी को दिए, लेकिन पटवारी को ये बात ठीक नहीं लगी, पटवारी ने किसान को 2019 में राजस्व रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया, जिसके चलते पीड़ित को किसान सम्मान निधि की राशि मिलना बंद हो गई।
कई आवेदनों के बाद भी नहीं हुई सुनवाई
पीड़ित किसान ने खुद को रिकॉर्ड में जीवित दर्ज कराने के लिए कई आवेदन भी दिए लेकिन विभाग ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। वहीं विभाग की इस बड़ी गलती का खामियाजा किसान को उठाना पड़ रहा है। सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में डेड घोषित होने के कारण किसान को प्रदेश और केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली किसान सम्मान निधि का लाभ नहीं मिल पा रहा है। किसान रामसुजान ने सीएम हेल्पलाइन और जिला कलेक्टर से भी इसकी शिकायक की लेकिन अब तक रिकॉर्ड में सुधार नहीं हुआ। किसान बीते चार साल से खुद को जिंदा होने की गवाही दे-देकर हार गया लेकिन अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। वहीं, मामले पर जिले के आलाधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं, हालांकि जिले के प्रभारी मंत्री ने मामला सामने आने के बाद राजस्व अधिकारियों द्वारा रिकॉर्ड में जल्द सुधार करने की बात कही है। हालांकि मीडिया द्वारा मामला सामने लाने के बाद कलेक्टर ने दस्तावेजों में सुधार कर दिया है।
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रिश्वत न देने पर पटवारी ने घोषित किया मृत
मामला सतना जिले के सहिजना गांव का है। यहां रामसुजान चौधरी सीमांत किसान हैं। सरकार ने 2018 में इन्हें किसान सम्मान निधि दी थी। किसान को योजना के तहत चार किश्तें भी मिली, लेकिन एक साल बाद उन्हें योजना का लाभ मिलना बंद हो गया। दरअसल पटवारी गणेश कोल ने योजना का लाभ अनवरत मिलते रहने के एवज में किसान से पांच हजार रुपये की मांग की थी। किसान ने किसी तरह 2000 रुपये पटवारी को दिए, लेकिन पटवारी को ये बात ठीक नहीं लगी, पटवारी ने किसान को 2019 में राजस्व रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया, जिसके चलते पीड़ित को किसान सम्मान निधि की राशि मिलना बंद हो गई।
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कई आवेदनों के बाद भी नहीं हुई सुनवाई
पीड़ित किसान ने खुद को रिकॉर्ड में जीवित दर्ज कराने के लिए कई आवेदन भी दिए लेकिन विभाग ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। वहीं विभाग की इस बड़ी गलती का खामियाजा किसान को उठाना पड़ रहा है। सरकारी राजस्व रिकॉर्ड में डेड घोषित होने के कारण किसान को प्रदेश और केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली किसान सम्मान निधि का लाभ नहीं मिल पा रहा है। किसान रामसुजान ने सीएम हेल्पलाइन और जिला कलेक्टर से भी इसकी शिकायक की लेकिन अब तक रिकॉर्ड में सुधार नहीं हुआ। किसान बीते चार साल से खुद को जिंदा होने की गवाही दे-देकर हार गया लेकिन अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। वहीं, मामले पर जिले के आलाधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं, हालांकि जिले के प्रभारी मंत्री ने मामला सामने आने के बाद राजस्व अधिकारियों द्वारा रिकॉर्ड में जल्द सुधार करने की बात कही है। हालांकि मीडिया द्वारा मामला सामने लाने के बाद कलेक्टर ने दस्तावेजों में सुधार कर दिया है।
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