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सिंगरौली में उप पंजीयक कार्यालय में बवाल: फाइल को लेकर वेंडर-फोटोग्राफर में मारपीट; दोनों पक्षों की शिकायत
Fri, 04 Sep 2026 11:07 AM IST
सिंगरौली ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिंगरौली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सिंगरौली
Published by: सिंगरौली ब्यूरो
Updated Fri, 04 Sep 2026 11:07 AM IST
सार
सिंगरौली के कलेक्ट्रेट परिसर स्थित उप पंजीयक कार्यालय में जमीन के पंजीयन से जुड़ी फाइल को लेकर स्टाम्प वेंडर और फोटोग्राफर के बीच मारपीट हो गई। दोनों पक्षों ने कोतवाली थाने में एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।
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फोटोग्राफर उप पंजीयक
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
सिंगरौली कलेक्ट्रेट परिसर स्थित उप पंजीयक कार्यालय गुरुवार को उस समय विवादों के घेरे में आ गया, जब जमीन के पंजीयन से जुड़ी फाइल को लेकर उप पंजीयक कार्यालय में स्टाम्प वेंडर और एक फोटोग्राफर के बीच जमकर मारपीट हो गई। घटना के बाद कार्यालय परिसर में अफरा-तफरी का माहौल निर्मित हो गया। बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों की ओर से कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है। मामले की पुलिस जांच के बाद ही घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
स्टाम्प वेंडर द्वारा फाइल देखने का आग्रह किया गया
मिली जानकारी के अनुसार, पाठक ऑनलाइन के प्रोप्राइटर गुरुवार दोपहर जमीन के रजिस्ट्रेशन से संबंधित फाइल लेकर उप पंजीयक अशोक सिंह परिहार के पास पहुंचे थे। आरोप है कि फाइल देखने के बजाय उसे कथित तौर पर फेंक दिया गया। इस पर स्टाम्प वेंडर द्वारा फाइल देखने का आग्रह किया गया। इसी दौरान उप पंजीयक के करीबी बताए जा रहे एक फोटोग्राफर के कार्यालय से बाहर आने के बाद स्टाम्प वेंडर से कथित रूप से विवाद और बदसलूकी शुरू हो गई। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के बीच हाथापाई शुरू हो गई। कार्यालय में मौजूद लोगों के मुताबिक, कुछ देर तक दोनों पक्षों में मारपीट होती रही। बाद में मौके पर मौजूद उप पंजीयक और अन्य स्टाम्प वेंडरों ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया। घटना के बाद दोनों पक्ष कोतवाली थाने पहुंचे और एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।
कार्यालय की कार्यप्रणाली पर पहले से उठते रहे हैं सवाल
मारपीट की इस घटना ने उप पंजीयक कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर पहले से उठ रहे सवालों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। कार्यालय से जुड़े लोगों का आरोप है कि यहां कथित रूप से कुछ चुनिंदा लोगों को अधिक महत्व दिया जाता है, जबकि अन्य स्टाम्प वेंडरों और दस्तावेज तैयार कराने वाले लोगों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
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आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं
कुछ लोगों का यह भी आरोप है कि जमीन के दस्तावेजों के पंजीयन से जुड़े मामलों में कथित रूप से मनमाने तरीके से लेन-देन की मांग किए जाने और नियमों से इतर काम कराने का दबाव बनाया जाता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना भी आवश्यक है। लोगों का कहना है कि जमीन की रजिस्ट्री जैसे संवेदनशील कार्य से जुड़े कार्यालय में पारदर्शिता और नियमों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि किसी कर्मचारी, अधिकारी अथवा कार्यालय से जुड़े व्यक्ति पर नियम विरुद्ध कार्य कराने या किसी पक्ष के साथ अनुचित व्यवहार करने के आरोप लगते हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।
ये भी पढ़ें- सागर में गरीबों के राशन पर डाका?: पांच उचित मूल्य दुकानों में लाखों के खाद्यान्न का गबन, विक्रेताओं पर एफआईआर
जिला प्रशासन से जांच की उठी मांग
गुरुवार की मारपीट की घटना के बाद अब जिला प्रशासन की भूमिका पर भी नजरें टिक गई हैं। सवाल यह है कि आखिर कलेक्ट्रेट परिसर में संचालित महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय में बाहरी व्यक्तियों की सक्रियता और आपसी विवाद किस तरह गंभीर मारपीट तक पहुंच गया।
साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी
स्थानीय लोगों और दस्तावेज लेखकों का कहना है कि उप पंजीयक कार्यालय में आने वाले आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। कार्यालय में कौन व्यक्ति अधिकृत रूप से काम कर रहा है और कौन व्यक्ति किस क्षमता में मौजूद है, इसकी निगरानी भी जरूरी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जमीन के पंजीयन से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की कथित अनियमितता या भ्रष्टाचार के आरोपों को केवल शिकायत मानकर नजरअंदाज करने के बजाय प्रशासन को उनकी तथ्यात्मक जांच करनी चाहिए। यदि आरोप निराधार हैं तो स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए और यदि कहीं नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। फिलहाल मारपीट की घटना पुलिस जांच के दायरे में है। दोनों पक्षों की शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी। वहीं, उप पंजीयक कार्यालय को लेकर सामने आए आरोपों पर जिला प्रशासन क्या कदम उठाता है, यह देखने वाली बात होगी। घटना ने इतना जरूर स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी कार्यालय में अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की जरूरत को अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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स्टाम्प वेंडर द्वारा फाइल देखने का आग्रह किया गया
मिली जानकारी के अनुसार, पाठक ऑनलाइन के प्रोप्राइटर गुरुवार दोपहर जमीन के रजिस्ट्रेशन से संबंधित फाइल लेकर उप पंजीयक अशोक सिंह परिहार के पास पहुंचे थे। आरोप है कि फाइल देखने के बजाय उसे कथित तौर पर फेंक दिया गया। इस पर स्टाम्प वेंडर द्वारा फाइल देखने का आग्रह किया गया। इसी दौरान उप पंजीयक के करीबी बताए जा रहे एक फोटोग्राफर के कार्यालय से बाहर आने के बाद स्टाम्प वेंडर से कथित रूप से विवाद और बदसलूकी शुरू हो गई। देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के बीच हाथापाई शुरू हो गई। कार्यालय में मौजूद लोगों के मुताबिक, कुछ देर तक दोनों पक्षों में मारपीट होती रही। बाद में मौके पर मौजूद उप पंजीयक और अन्य स्टाम्प वेंडरों ने बीच-बचाव कर मामला शांत कराया। घटना के बाद दोनों पक्ष कोतवाली थाने पहुंचे और एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।
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कार्यालय की कार्यप्रणाली पर पहले से उठते रहे हैं सवाल
मारपीट की इस घटना ने उप पंजीयक कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर पहले से उठ रहे सवालों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। कार्यालय से जुड़े लोगों का आरोप है कि यहां कथित रूप से कुछ चुनिंदा लोगों को अधिक महत्व दिया जाता है, जबकि अन्य स्टाम्प वेंडरों और दस्तावेज तैयार कराने वाले लोगों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
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आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं
कुछ लोगों का यह भी आरोप है कि जमीन के दस्तावेजों के पंजीयन से जुड़े मामलों में कथित रूप से मनमाने तरीके से लेन-देन की मांग किए जाने और नियमों से इतर काम कराने का दबाव बनाया जाता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना भी आवश्यक है। लोगों का कहना है कि जमीन की रजिस्ट्री जैसे संवेदनशील कार्य से जुड़े कार्यालय में पारदर्शिता और नियमों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। यदि किसी कर्मचारी, अधिकारी अथवा कार्यालय से जुड़े व्यक्ति पर नियम विरुद्ध कार्य कराने या किसी पक्ष के साथ अनुचित व्यवहार करने के आरोप लगते हैं, तो उनकी निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।
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जिला प्रशासन से जांच की उठी मांग
गुरुवार की मारपीट की घटना के बाद अब जिला प्रशासन की भूमिका पर भी नजरें टिक गई हैं। सवाल यह है कि आखिर कलेक्ट्रेट परिसर में संचालित महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय में बाहरी व्यक्तियों की सक्रियता और आपसी विवाद किस तरह गंभीर मारपीट तक पहुंच गया।
साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी
स्थानीय लोगों और दस्तावेज लेखकों का कहना है कि उप पंजीयक कार्यालय में आने वाले आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी न हो, इसके लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाई जानी चाहिए। कार्यालय में कौन व्यक्ति अधिकृत रूप से काम कर रहा है और कौन व्यक्ति किस क्षमता में मौजूद है, इसकी निगरानी भी जरूरी है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जमीन के पंजीयन से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की कथित अनियमितता या भ्रष्टाचार के आरोपों को केवल शिकायत मानकर नजरअंदाज करने के बजाय प्रशासन को उनकी तथ्यात्मक जांच करनी चाहिए। यदि आरोप निराधार हैं तो स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए और यदि कहीं नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। फिलहाल मारपीट की घटना पुलिस जांच के दायरे में है। दोनों पक्षों की शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी। वहीं, उप पंजीयक कार्यालय को लेकर सामने आए आरोपों पर जिला प्रशासन क्या कदम उठाता है, यह देखने वाली बात होगी। घटना ने इतना जरूर स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी कार्यालय में अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की जरूरत को अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
