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Sehore: सलकनपुर विजयासन धाम के नाम पर फर्जी चंदा वसूली का खुलासा, ट्रस्ट ने जारी की सख्त चेतावनी; जानें
Sat, 11 Jul 2026 02:36 PM IST
सीहोर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
Published by: सीहोर ब्यूरो
Updated Sat, 11 Jul 2026 02:36 PM IST
सार
सलकनपुर विजयासन धाम ट्रस्ट ने फर्जी रसीदों से चंदा वसूली करने वालों के खिलाफ चेतावनी जारी की है। श्रद्धालुओं से केवल अधिकृत काउंटर या बैंक खाते में दान करने की अपील की गई।
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ठगी की घटना
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में चंदा और चढ़ावे को लेकर उठ रहे विवादों के बीच मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां विजयासन धाम सलकनपुर भी चर्चा में आ गया है। मंदिर ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं को फर्जी रसीदों के जरिए दान वसूली करने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। वहीं दूसरी ओर, मंदिर में आने वाली करोड़ों रुपये की दानराशि और चढ़ावे के सार्वजनिक लेखे-जोखे को लेकर पुराने विवाद भी एक बार फिर सामने आ गए हैं।
फर्जी चंदा वसूली पर ट्रस्ट की सख्त चेतावनी
सलकनपुर देवी ट्रस्ट के अध्यक्ष महेश उपाध्याय ने पत्र जारी कर बताया कि कुछ लोग आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में वाहनों से घूम-घूमकर मां विजयासन धाम एवं भंडारा कराने के नाम पर नकली रसीदें देकर श्रद्धालुओं से नकद राशि और अन्नदान एकत्रित कर रहे हैं। इस संबंध में ट्रस्ट को लगातार शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट ने किसी भी व्यक्ति, संस्था या वाहन को गांव-गांव जाकर चंदा या अन्नदान एकत्रित करने की अनुमति नहीं दी है।
श्रद्धालुओं से आधिकारिक माध्यम से ही दान करने की अपील
ट्रस्ट अध्यक्ष ने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को माताजी के नाम पर नकद राशि या अन्नदान न दें। उन्होंने कहा कि यदि श्रद्धालु दान करना चाहते हैं तो वे मंदिर परिसर के अधिकृत दान काउंटर पर रसीद प्राप्त कर राशि जमा करें या ट्रस्ट के अधिकृत बैंक खाते में ऑनलाइन दान करें। मंदिर परिसर में इस संबंध में जागरूकता बोर्ड भी लगाए गए हैं ताकि श्रद्धालु किसी प्रकार की धोखाधड़ी का शिकार न हों।
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दान और चढ़ावे को लेकर फिर तेज हुई बहस
सलकनपुर मंदिर प्रदेश के सबसे बड़े देवी धामों में शामिल है, जहां प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यहां नकद दान के अलावा सोना-चांदी के आभूषण, बहुमूल्य वस्त्र और अन्य कीमती सामग्री भी बड़ी मात्रा में चढ़ाई जाती है। इसी कारण समय-समय पर मंदिर में आने वाली कुल दानराशि और चढ़ावे का सार्वजनिक विवरण जारी किए जाने की मांग उठती रही है।
कांग्रेस ने लगाए थे पारदर्शिता पर सवाल
कांग्रेस नेता विक्रम मस्ताल शर्मा पहले भी मंदिर समिति पर चंदा और चढ़ावे की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से मंदिर में आने वाली दानराशि, आभूषणों और अन्य चढ़ावे की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की थी। उनका कहना था कि श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने के लिए नियमित रूप से आय-व्यय का सार्वजनिक विवरण जारी किया जाना चाहिए। हालांकि मंदिर समिति ने इन सभी आरोपों को पहले भी निराधार बताते हुए खारिज किया था।
पढे़ं: शहडोल के नए एसपी का एक्शन प्लान, 15 जुलाई से चलेगा विशेष नशा विरोधी अभियान
सूचना के अधिकार को लेकर भी उठ रहे प्रश्न
मंदिर ट्रस्ट पर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराने के आरोप भी लगाए गए हैं। जानकारी के अनुसार कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मंदिर की दानराशि और चढ़ावे का विवरण प्राप्त करने के लिए आवेदन दिए, लेकिन उन्हें अपेक्षित जानकारी नहीं मिली। इसे लेकर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं।
अध्यक्ष बोले- पूरा हिसाब-किताब उपलब्ध है
ट्रस्ट अध्यक्ष महेश उपाध्याय ने कहा कि मंदिर ट्रस्ट का पूरा वित्तीय रिकॉर्ड व्यवस्थित और लिखित रूप में उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि एक-एक रुपये का हिसाब रखा जाता है और शासन द्वारा गठित समिति पूरी पारदर्शिता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सूचना के अधिकार के तहत जानकारी प्राप्त करने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और शुल्क का पालन करना आवश्यक है। यदि कोई व्यक्ति नियमानुसार आवेदन करता है तो उसे आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है। उनके अनुसार कुछ लोग बिना निर्धारित प्रक्रिया अपनाए केवल भ्रम और विवाद की स्थिति पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं।
देशभर में चढ़ावे को लेकर बढ़ी संवेदनशीलता
हाल के दिनों में देश के कुछ प्रमुख मंदिरों में चंदा और चढ़ावे को लेकर सामने आए मामलों के बाद धार्मिक संस्थाओं की वित्तीय पारदर्शिता चर्चा का विषय बनी हुई है। ऐसे माहौल में सलकनपुर मंदिर ट्रस्ट द्वारा जारी यह चेतावनी श्रद्धालुओं को फर्जी चंदा वसूली से बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। दूसरी ओर, मंदिर की आय और चढ़ावे के सार्वजनिक लेखे-जोखे की मांग भी लगातार जोर पकड़ रही है।
श्रद्धालुओं के लिए ट्रस्ट की अपील
मंदिर ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति गांव या शहर में माताजी के नाम पर रसीद दिखाकर चंदा मांगता है तो उसे दान न दें। किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत मंदिर प्रबंधन या स्थानीय प्रशासन को दें। ट्रस्ट का कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था और दान की पवित्रता बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा फर्जी वसूली करने वालों के विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
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फर्जी चंदा वसूली पर ट्रस्ट की सख्त चेतावनी
सलकनपुर देवी ट्रस्ट के अध्यक्ष महेश उपाध्याय ने पत्र जारी कर बताया कि कुछ लोग आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में वाहनों से घूम-घूमकर मां विजयासन धाम एवं भंडारा कराने के नाम पर नकली रसीदें देकर श्रद्धालुओं से नकद राशि और अन्नदान एकत्रित कर रहे हैं। इस संबंध में ट्रस्ट को लगातार शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ट्रस्ट ने किसी भी व्यक्ति, संस्था या वाहन को गांव-गांव जाकर चंदा या अन्नदान एकत्रित करने की अनुमति नहीं दी है।
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श्रद्धालुओं से आधिकारिक माध्यम से ही दान करने की अपील
ट्रस्ट अध्यक्ष ने सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को माताजी के नाम पर नकद राशि या अन्नदान न दें। उन्होंने कहा कि यदि श्रद्धालु दान करना चाहते हैं तो वे मंदिर परिसर के अधिकृत दान काउंटर पर रसीद प्राप्त कर राशि जमा करें या ट्रस्ट के अधिकृत बैंक खाते में ऑनलाइन दान करें। मंदिर परिसर में इस संबंध में जागरूकता बोर्ड भी लगाए गए हैं ताकि श्रद्धालु किसी प्रकार की धोखाधड़ी का शिकार न हों।
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दान और चढ़ावे को लेकर फिर तेज हुई बहस
सलकनपुर मंदिर प्रदेश के सबसे बड़े देवी धामों में शामिल है, जहां प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। यहां नकद दान के अलावा सोना-चांदी के आभूषण, बहुमूल्य वस्त्र और अन्य कीमती सामग्री भी बड़ी मात्रा में चढ़ाई जाती है। इसी कारण समय-समय पर मंदिर में आने वाली कुल दानराशि और चढ़ावे का सार्वजनिक विवरण जारी किए जाने की मांग उठती रही है।
कांग्रेस ने लगाए थे पारदर्शिता पर सवाल
कांग्रेस नेता विक्रम मस्ताल शर्मा पहले भी मंदिर समिति पर चंदा और चढ़ावे की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने जिला प्रशासन से मंदिर में आने वाली दानराशि, आभूषणों और अन्य चढ़ावे की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की थी। उनका कहना था कि श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने के लिए नियमित रूप से आय-व्यय का सार्वजनिक विवरण जारी किया जाना चाहिए। हालांकि मंदिर समिति ने इन सभी आरोपों को पहले भी निराधार बताते हुए खारिज किया था।
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सूचना के अधिकार को लेकर भी उठ रहे प्रश्न
मंदिर ट्रस्ट पर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराने के आरोप भी लगाए गए हैं। जानकारी के अनुसार कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मंदिर की दानराशि और चढ़ावे का विवरण प्राप्त करने के लिए आवेदन दिए, लेकिन उन्हें अपेक्षित जानकारी नहीं मिली। इसे लेकर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं।
अध्यक्ष बोले- पूरा हिसाब-किताब उपलब्ध है
ट्रस्ट अध्यक्ष महेश उपाध्याय ने कहा कि मंदिर ट्रस्ट का पूरा वित्तीय रिकॉर्ड व्यवस्थित और लिखित रूप में उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि एक-एक रुपये का हिसाब रखा जाता है और शासन द्वारा गठित समिति पूरी पारदर्शिता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सूचना के अधिकार के तहत जानकारी प्राप्त करने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और शुल्क का पालन करना आवश्यक है। यदि कोई व्यक्ति नियमानुसार आवेदन करता है तो उसे आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है। उनके अनुसार कुछ लोग बिना निर्धारित प्रक्रिया अपनाए केवल भ्रम और विवाद की स्थिति पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं।
देशभर में चढ़ावे को लेकर बढ़ी संवेदनशीलता
हाल के दिनों में देश के कुछ प्रमुख मंदिरों में चंदा और चढ़ावे को लेकर सामने आए मामलों के बाद धार्मिक संस्थाओं की वित्तीय पारदर्शिता चर्चा का विषय बनी हुई है। ऐसे माहौल में सलकनपुर मंदिर ट्रस्ट द्वारा जारी यह चेतावनी श्रद्धालुओं को फर्जी चंदा वसूली से बचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। दूसरी ओर, मंदिर की आय और चढ़ावे के सार्वजनिक लेखे-जोखे की मांग भी लगातार जोर पकड़ रही है।
श्रद्धालुओं के लिए ट्रस्ट की अपील
मंदिर ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति गांव या शहर में माताजी के नाम पर रसीद दिखाकर चंदा मांगता है तो उसे दान न दें। किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत मंदिर प्रबंधन या स्थानीय प्रशासन को दें। ट्रस्ट का कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था और दान की पवित्रता बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा फर्जी वसूली करने वालों के विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
