Sehore News: मतदाता सूची में बड़ा शुद्धिकरण, 43 हजार नाम कटेंगे; अब 11 हजार वोटर्स को साबित करनी होगी पहचान
सीहोर जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। जांच में 43,431 ऐसे मतदाता पाए गए, जिनका अब कोई अस्तित्व नहीं है।
विस्तार
सीहोर जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) ने लोकतंत्र की जड़ों को झकझोर देने वाली हकीकत सामने ला दी है। डेढ़ महीने तक चले इस अभियान में प्रशासनिक अमले की गहन पड़ताल के बाद यह स्पष्ट हुआ कि जिले की मतदाता सूची में 43,431 ऐसे नाम दर्ज हैं, जिनका अब कोई अस्तित्व नहीं मिल रहा। कोई मृत्यु को प्राप्त हो चुका है, कोई वर्षों पहले पलायन कर गया, तो कुछ मतदाता अन्य जिलों में नाम दर्ज करवा चुके हैं, लेकिन सीहोर से नाम कटवाना भूल गए। यह आंकड़ा केवल संख्या नहीं, बल्कि व्यवस्था में वर्षों से चली आ रही लापरवाही की कहानी कहता है।
11,274 मतदाता रडार पर, पहचान साबित करना अनिवार्य
एसआईआर के दौरान एक और गंभीर तथ्य सामने आया। जिले के 11,274 मतदाता ऐसे पाए गए, जिनकी 2003 की मूल मतदाता सूची से मैपिंग नहीं हो सकी। इनके नाम तो मौजूदा सूची में दर्ज हैं, लेकिन डिजिटल रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रहे। अब इन्हें नोटिस जारी किए जाएंगे और इन मतदाताओं को अपनी पहचान साबित करनी होगी। यदि तय दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए, तो इनके नाम भी मतदाता सूची से हट सकते हैं। यह प्रक्रिया 23 दिसंबर से ड्राफ्ट सूची के प्रकाशन के साथ शुरू होगी।
23 दिसंबर से नोटिस, हर मतदान केंद्र पर सूची होगी सार्वजनिक
निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार 23 दिसंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। इसी दिन से अनमैप्ड मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाएंगे। हर मतदान केंद्र पर सूची चस्पा की जाएगी, ताकि आम नागरिक अपने नाम स्वयं जांच सकें। दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर भी मिलेगा। एआरओ (एसडीएम या तहसीलदार) द्वारा नोटिस जारी किए जाएंगे और सुनवाई अतिरिक्त एआरओ यानी नायब तहसीलदार के समक्ष होगी। अंतिम मतदाता सूची 21 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी।
पहचान के लिए 13 में से कोई एक दस्तावेज जरूरी
जिन 11,274 मतदाताओं की मैपिंग नहीं हो पाई है, उन्हें निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित 13 दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज देना होगा। इनमें वोटर आईडी, आधार कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, सरकारी फोटो पहचान पत्र, मनरेगा जॉब कार्ड, बैंक या डाकघर की पासबुक, पेंशन दस्तावेज, निवास प्रमाण पत्र जैसे अहम दस्तावेज शामिल हैं। कई बुजुर्ग और ग्रामीण मतदाताओं के लिए यह प्रक्रिया भावनात्मक और चुनौतीपूर्ण भी साबित हो सकती है।
प्रशासनिक अमला महीनों तक उलझा, अब लंबित कामों पर लौटेगा फोकस
4 नवंबर से शुरू हुए इस अभियान में शिक्षा, राजस्व, नगरीय निकाय, पंचायत सहित लगभग हर विभाग का अमला झोंक दिया गया था। शिक्षकों से लेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक, सभी ने घर-घर जाकर सत्यापन किया। इस कारण शासकीय कामकाज पर भी असर पड़ा। अब एसआईआर का मुख्य काम पूरा होने के बाद विभाग अपने लंबित कार्यों पर ध्यान देंगे। हालांकि बीएलओ बनाए गए शिक्षक अभी भी नोटिस वितरण और अपडेट प्रक्रिया में लगे रहेंगे।
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सबसे बड़ा सवाल: हर साल पुनरीक्षण के बावजूद 43 हजार फर्जी नाम कैसे?
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि चुनाव आयोग हर साल मतदाता सूची का पुनरीक्षण कराता है, फिर भी 43 हजार से अधिक मृत, पलायन कर चुके या लापता मतदाता सूची में बने रहे। आंकड़ों के अनुसार 9,164 मतदाता मृत पाए गए, 24,910 पलायन कर चुके हैं और 6,422 ऐसे हैं, जिनका कोई ठोस पता ही नहीं चल सका। जानकारों का मानना है कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए गंभीर चेतावनी है। सवाल यह भी उठता है कि इन नामों पर अब तक कितनी फर्जी वोटिंग होती रही होगी।
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