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MP News: अफसर ही लगा रहे सरकार को चूना, सरकारी कार्यालयों में ऐसे चल रहा खेल, जानें क्या है मामला?

Sat, 19 Jul 2025 10:06 PM IST
सीहोर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर Published by: सीहोर ब्यूरो Updated Sat, 19 Jul 2025 10:06 PM IST
सार

सीहोर जिले के कई सरकारी विभाग बिना टैक्सी परमिट वाले निजी वाहनों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे शासन को राजस्व की हानि हो रही है। नियमों के बावजूद 50 से अधिक निजी वाहन कार्यालयों में लगे हैं। 

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MP NEWS: Officers themselves are cheating the government
सरकारी कार्यालयों में बिना परमिट दौड़ रहे वाहन।

विस्तार

सीहोर जिले में बिना परमिट सड़कों पर दौड़ने वाले वाहनों पर पुलिस, प्रशासन और परिवहन विभाग द्वारा कार्रवाई की जाती है, लेकिन यही अफसर खुद बिना परमिट के वाहनों में सरकारी कामकाज के लिए दिनभर घूमते नजर आते हैं। कई सरकारी विभागों में अनुबंध पर लगे चार पहिया वाहनों में अधिकांश के पास टैक्सी परमिट तक नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि इन पर कार्रवाई कौन करेगा?

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सरकारी विभागों में टैक्सी परमिट की जगह निजी वाहन अटैच किए गए हैं, जबकि नियमों के अनुसार विभागों में लगाए जाने वाले वाहनों का टैक्सी श्रेणी में पंजीकरण होना अनिवार्य है। यह नियम सभी जिला अधिकारियों को ज्ञात है, फिर भी शासन के निर्देशों की अनदेखी करते हुए निजी वाहनों को कार्यालय कार्यों में उपयोग किया जा रहा है। इससे परिवहन विभाग को हर वर्ष लाखों रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है।
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50 से अधिक निजी वाहन सरकारी कार्यालयों में उपयोग में लाए जा रहे
शासन ने लगभग एक दशक पूर्व सभी विभागों में टैक्सी पास वाहनों की अनिवार्यता को लेकर निर्देश जारी किए थे। इसके बावजूद जिले के विभिन्न कार्यालयों में 50 से अधिक निजी वाहन उपयोग किए जा रहे हैं। ये वाहन जिला पंचायत, जनपद पंचायत, खनिज विभाग सहित कई अन्य कार्यालयों में कार्यरत हैं। नियमों के अनुसार, निजी वाहन केवल निजी उपयोग में ही लाए जा सकते हैं, कार्यालय उपयोग के लिए नहीं।
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टैक्सी पास कराने में आता है अतिरिक्त खर्च
टैक्सी पास कराने के लिए वाहन की कीमत पर लगभग 8 से 9 प्रतिशत टैक्स देना होता है, साथ ही 3-4 हजार रुपये की पंजीयन शुल्क और हर साल 1 से 1.5 हजार रुपये की फिटनेस फीस चुकानी पड़ती है। इस प्रक्रिया से बचने के लिए अधिकारी निजी वाहन अटैच कर रहे हैं।

रिश्तेदारों के नाम पर खरीदे वाहन, सरकारी भुगतान से चला रहे हैं
कई अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपने भाई या रिश्तेदारों के नाम पर वाहन खरीदकर अपने कार्यालय में तैनात कर दिए हैं। शासन द्वारा ऐसे वाहनों के लिए 25 से 40 हजार रुपये प्रति माह भुगतान किया जाता है, जिससे वाहन अधिकारी की देखरेख में रहते हैं और उनकी निजी सुविधा भी बनी रहती है।


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टैक्सी और निजी वाहनों में अंतर
परिवहन विभाग ने टैक्सी और निजी वाहनों की पहचान के लिए नंबर प्लेट में अंतर किया है। टैक्सी वाहनों की नंबर प्लेट पीली होती है, जबकि निजी वाहनों की सफेद। बावजूद इसके, कई कार्यालय टैक्सी परमिट के बिना ही अनुबंध कर रहे हैं।

क्या बोले अधिकारी? 

  • जनपद सीईओ सीहोर नमिता बघेल ने कहा, टैक्सी पास का वाहन उपलब्ध न होने के कारण फिलहाल निजी वाहन लगाया गया है। उसे टैक्सी पास में बदलने की प्रक्रिया चल रही है।
  • जिला पंचायत सीईओ डॉ. नेहा जैन ने कहा, अगर, कार्यालयों में निजी वाहन लगे हैं तो इसकी जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
  • जिला परिवहन अधिकारी रितेश तिवारी ने कहा, शासकीय कार्यालयों में टैक्सी पास वाहन ही अटैच करना चाहिए। निजी वाहनों से राजस्व की हानि होती है।

 

जिला पंचायत, जनपद पंचायत, खनिज विभाग सहित अनेक सरकारी कार्यालयों में दौड़ रहे टेक्सी की जगह प्र

 

जिला पंचायत, जनपद पंचायत, खनिज विभाग सहित अनेक सरकारी कार्यालयों में दौड़ रहे टेक्सी की जगह प्र

 

जिला पंचायत, जनपद पंचायत, खनिज विभाग सहित अनेक सरकारी कार्यालयों में दौड़ रहे टेक्सी की जगह प्र

 

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