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सीहोर: नामांतरण के बदले रिश्वत मांगने वाले पटवारी पर चलेगा मुकदमा, कलेक्टर ने अभियोजन की दी मंजूरी

Thu, 08 Oct 2026 08:52 AM IST
सीहोर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर Published by: सीहोर ब्यूरो Updated Thu, 08 Oct 2026 08:52 AM IST
सार

जावर में भूमि नामांतरण के बदले 10 हजार रुपये रिश्वत मांगने के आरोप में पटवारी के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी मिल गई है। लोकायुक्त की रिकॉर्डिंग और एफएसएल जांच में आवाज की पुष्टि के बाद कलेक्टर ने स्वीकृति जारी की है।

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Sehore: Patwari to Face Prosecution for Bribe Demand in Land Mutation Case, Collector Grants Sanction
जावर तहसील

विस्तार

भूमि नामांतरण जैसे राजस्व कार्य के लिए रिश्वत मांगने के मामले में जावर के पटवारी धर्मेन्द्र सिंह राठौर के खिलाफ अब न्यायालय में अभियोजन की कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। लोकायुक्त की शिकायत, रिश्वत की मांग की रिकॉर्डिंग और एफएसएल जांच में आवाज की पुष्टि के बाद कलेक्टर बालागुरु के. ने पटवारी के विरुद्ध अभियोजन की स्वीकृति जारी कर दी है। मामला सामने आने के बाद राजस्व विभाग में रिश्वतखोरी के आरोपों को लेकर कार्रवाई को लेकर हलचल तेज हो गई है।

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नामांतरण के बदले मांगे 10 हजार
जारी आदेश के अनुसार शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त कार्यालय में शिकायत देकर आरोप लगाया था कि पटवारी धर्मेन्द्र सिंह राठौर भूमि नामांतरण के एवज में 10 हजार रुपये रिश्वत की मांग कर रहे हैं। शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त ने मामले का सत्यापन कराया। सत्यापन की प्रक्रिया में रिश्वत की मांग से जुड़े साक्ष्य जुटाए गए।
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शिकायत के सत्यापन के दौरान निरीक्षक मुकेश तिवारी ने शिकायतकर्ता को डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर उपलब्ध कराया। रिकॉर्डिंग में पटवारी द्वारा 8 हजार रुपये रिश्वत लेने पर सहमति व्यक्त किए जाने की बात सामने आई। इसके बाद स्वतंत्र पंच साक्षियों की मौजूदगी में रिकॉर्डेड बातचीत का अवलोकन किया गया और प्रारंभिक पंचनामा तैयार किया गया। मामले में आगे ट्रेप कार्रवाई की प्रक्रिया भी की गई।
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साक्ष्य ने बढ़ाई मुश्किल
जांच के दौरान तहसील कार्यालय जावर में पंचों की उपस्थिति में वॉयस रिकॉर्डर और मेमोरी कार्ड का जप्ती पंचनामा तैयार किया गया। दोनों को सीलबंद कर साक्ष्य के रूप में सुरक्षित किया गया। इसके बाद आरोपी पटवारी का वॉइस सैंपल लिया गया और जांच के लिए एफएसएल भोपाल भेजा गया। मामले में एफएसएल भोपाल से प्राप्त रिपोर्ट महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में सामने आई। रिपोर्ट में रिकॉर्ड की गई बातचीत में मौजूद आवाज को पटवारी धर्मेन्द्र सिंह राठौर की आवाज होना प्रमाणित किया गया। इससे रिश्वत की मांग से संबंधित रिकॉर्डिंग को जांच में अहम आधार मिला और पटवारी धर्मेन्द्र सिंह राठौर के विरुद्ध लोक सेवक के पद का दुरुपयोग करते हुए भूमि नामांतरण के लिए 8 हजार रुपये रिश्वत मांगने के आरोप के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया गया था।

अब न्यायालय में चलेगा मुकदमा
उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद कलेक्टर बालागुरु के. ने माना कि आरोपी के विरुद्ध अभियोजन की कार्रवाई के लिए पर्याप्त आधार मौजूद हैं। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 19(1)(बी) एवं (सी) के प्रावधानों के तहत अभियोजन स्वीकृति आवश्यक होने के कारण कलेक्टर ने पटवारी धर्मेन्द्र सिंह राठौर के विरुद्ध न्यायालय में अभियोजन चलाने की स्वीकृति प्रदान कर दी है। कलेक्टर की अभियोजन स्वीकृति के साथ ही मामले में कानूनी कार्रवाई का अगला चरण शुरू होने का रास्ता खुल गया है। शिकायत से लेकर आवाज की रिकॉर्डिंग, पंचनामा और एफएसएल रिपोर्ट तक सामने आए साक्ष्यों के आधार पर अब प्रकरण न्यायालयीन प्रक्रिया में आगे बढ़ेगा।

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