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सीहोर: आशा उषा एवं आशा पर्यवेक्षकों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा दो, ज्ञापन सौंपकर की मांग

Thu, 03 Feb 2022 07:50 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर Published by: दिनेश शर्मा Updated Thu, 03 Feb 2022 07:50 PM IST
सार

आशा उषा एवं आशा पर्यवेक्षकों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने एवं कम से कम 26000 न्यूनतम वेतन निश्चित करने की मांग की गई है। इसके लिए सीएम और पीएम के नाम ज्ञापन सौंपा गया है।
 

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Sehore: Give status of government employees to Asha Usha and Asha supervisors, memorandum submitted to CM and PM
Sehore: आशाओं ने कलेक्टर कार्यालय में प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कलेक्टर कार्यालय में जिले की आशाओं ने एकत्रित होकर डिप्टी कलेक्टर विजय वर्मा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नाम ज्ञापन सौंपा। प्रधानमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में आशा उषा एवं आशा पर्यवेक्षकों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने एवं कम से कम 26000 न्यूनतम वेतन निश्चित करने की मांग की गई है।
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प्रधानमंत्री को सौंपे गए 10 सूत्री मांग पत्र में से संबंधित सामाजिक सुरक्षा अस्पतालों में कोविड बुनियादी सेवाओं बीमा कवर 50,00,000 की समय सीमा बढ़ाए जाने, चारों श्रम संहिताओं को वापस लिए जाने, आयकर से बाहर परिवारों को साढ़े सात हजार रुपए देने, सार्वभौमिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ सभी आशा उषा एवं पर्यवेक्षकों को दिए जाने की मांग की गई। 
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इसी तरह मुख्यमंत्री को छह सूत्री मांग पत्र दिया गया। आशा उषा एवं आशा सहयोगिनी एकता यूनियन सीटू की जिला महासचिव ममता राठौर ने कहा कि 45वें श्रम सम्मेलन में एवं 46वें श्रम सम्मेलन के अनुमोदन के बावजूद भी जिसकी अध्यक्षता स्वयं प्रधानमंत्री करते हैं आशा उषा एवं आशा पर्यवेक्षकों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं दिया गया है एवं न्यूनतम वेतन जो 26000 से कम नहीं होना चाहिए वह भी सरकार देने को तैयार नहीं है। महामारी एवं भीषण महंगाई के दौर में आशा उषा को केवल 2000 प्रतिमाह देकर सरकार अकल्पनीय शोषण कर रही है। जिसका हम विरोध करते हैं एवं हमारे 10 सूत्री मांगों को तत्काल पूरा करने की प्रधानमंत्री से मांग करते हैं।
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यूनियन की प्रदेश नेत्री शकुन पाटिल ने मांग की है कि प्रदेश सरकार अन्य प्रदेशों की तरह अपनी तरफ से आशाओं को कुछ भी नहीं दे रही है, जबकि अन्य सरकारें आशाओं को अपनी तरफ से 10000 तक का वेतन भुगतान कर रही हैं। प्रदेश की महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने की दावा करने वाली सरकार मामा शिवराज सिंह चौहान स्वयं आशाओं का अकल्पनीय शोषण कर रहे हैं। मात्र दो हजार में घर चलाना असंभव ही नहीं नामुमकिन है। हम दिन रात भीषण कोरोना काल में भी जनता की सेवा में तत्पर रहे जिनकी प्रशंसा स्वयं प्रधानमंत्री कर चुके हैं। इसके बावजूद भी प्रदेश के मुख्यमंत्री हमारी पूर्ण तरह जायज 6 सूत्री मांगों को पूरा करने के लिए तैयार नहीं हैं। हम हमारी पूर्णतः न्याय संगत मांगों को पूरा होने तक अनवरत संघर्ष जारी रखेंगे। अखिल भारतीय कार्यक्रम का नेतृत्व जिले में जिला महासचिव ममता राठौर, शकुन पाटिल, शकुन धुर्वे, संतोषी कटारिया ने प्रमुख रूप से किया।
 
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