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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Satna: Crowd gathered to have the last darshan of Pt. Devi Prasad, the former head priest of Maihar temple

Satna: मैहर मंदिर के पूर्व प्रधान पुजारी देवी प्रसाद के अंतिम दर्शन करने उमड़ा जनसैलाब, नम आंखों से दी विदाई

Thu, 16 Nov 2023 11:09 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सतना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सतना Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Thu, 16 Nov 2023 11:09 AM IST
सार

मैहर स्थित शारदा शक्ति पीठ के पूर्व प्रधान पुजारी देवी प्रसाद के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी।

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Satna: Crowd gathered to have the last darshan of Pt. Devi Prasad, the former head priest of Maihar temple
अंतिम दर्शन करने उमड़ा जनसैलाब - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मैहर स्थित शारदा शक्ति पीठ के पूर्व प्रधान पुजारी देवी प्रसाद का अंतिम संस्कार गुरुवार को किया गया। उनके अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। नम आंखों से लोगों ने उन्हें अंतिम विदाई दी।
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बता दें, मां शारदा देवी मंदिर के पूर्व प्रधान पुजारी पंडित देवी प्रसाद महाराज का मंगलवार को दिल्ली के भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान AIIMS में निधन हो गया। वे पिछले काफी समय से बीमार थे। उन्हें दो दिन पहले ही दिल्ली ले जाया गया था। पंडित देवी प्रसाद 75 साल के थे। वे अपने पिता जी के बाद शारदा देवी मंदिर के प्रधान पुजारी बने थे। महज 12 वर्ष की उम्र से ही उनका मन पूजा पाठ में लग गया था। कई दशकों तक मातारानी की पूजा अर्चना करते आए देवी प्रसाद महाराज मातारानी को प्रसन्न करने के लिए तीन बार अपनी जीभ माता शारदा के चरणों मे समर्पित की थी। माता की आरती की रचना भी उन्होंने ही की। वे सिर्फ घर से मंदिर और मंदिर से घर तक ही आते जाते थे।
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कहा जाता है कि उन्होंने कभी मैहर की गलियों को जानने में भी रुचि नहीं ली। उनके लिए घर के बाद दूसरा एकमात्र स्थान मंदिर ही रहा। बेहद शालीन व्यक्तित्व के धनी पंडित देवी प्रसाद महाराज का आसन मंदिर की पहाड़ी में बनी गुफा में ही लगता था। उसी गुफा में वे भक्तों से मिलते और उन्हें आशीर्वाद देते थे। पिछले कुछ समय से मन्दिर के प्रधान पुजारी का जिम्मा उनके बड़े बेटे पवन पांडेय महाराज संभाल रहे हैं। लेकिन फिर भी वे गुफा में ही रह कर स्वयं पूरी व्यवस्था पर नजर रखते थे। इस बार के शारदीय नवरात्रि मेले के दौरान उन्होंने घर जाने के बजाय मंदिर में ही रहने का निर्णय ले लिया था। लेकिन तबीयत बिगड़ने पर परिजनों के आग्रह के बाद वे घर आए थे।
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