एमपी: हाईवे से 300 से ज्यादा दुकानें-टपरे हटे, किसी ने ट्रक को बनाया दुकान, किसी ने ऐसे जमाया कारोबार
सागर में बांदरी-मालथौन के बीच एनएच-44 किनारे 300 से अधिक अवैध दुकानें और टपरे हटाए गए। रोजगार छिनने के बाद छोटे दुकानदारों ने ट्रक और सार्वजनिक प्रतीक्षालय में चाय-नाश्ते की दुकानें शुरू कर परिवार चलाने का प्रयास किया।
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सागर जिले में प्रशासन की ओर से नेशनल हाईवे-44 के किनारे बड़े पैमाने पर अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई के बाद अब छोटे दुकानदारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। बांदरी से मालथौन तक करीब 52 किलोमीटर के दायरे में हुई कार्रवाई के दौरान 300 से अधिक अवैध दुकानें और टपरे हटाए गए। इससे वर्षों से हाईवे किनारे कारोबार कर रहे कई परिवारों का रोजगार छिन गया। दुकानें टूटने के बाद अब ये परिवार गुजर-बसर के लिए नए और अनोखे ठिकाने तलाशने को मजबूर हैं। कोई पांच हजार रुपए महीने के किराए पर ट्रक लेकर उसमें चाय-नाश्ता बेच रहा है, तो किसी ने मजबूरी में सरकारी प्रतीक्षालय को ही दुकान बना लिया है।
अटाकर्नेलगढ़ में पिछले चार साल से हाईवे किनारे टपरा लगाकर चाय-नाश्ते की दुकान चलाने वाले कल्लू महाराज की दुकान भी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में टूट गई। परिवार के भरण-पोषण के लिए उन्होंने अब पांच हजार रुपए मासिक किराए पर ट्रक लिया है। इसी ट्रक के अंदर दुकान सजाकर वे अपना कारोबार चला रहे हैं।
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इसी तरह चनारी तिराहा पर करीब 10 साल से अस्थाई दुकान चला रहे चालीराज परमार के परिवार में 11 सदस्य हैं। दुकान टूटने के बाद नया ठिकाना नहीं मिलने पर उन्होंने सार्वजनिक प्रतीक्षालय में ही चाय-नाश्ते की दुकान जमा ली है।
अपने भाई के साथ मिलकर अस्थाई दुकान चलाने वाले नवल सिंह राजपूत की आजीविका भी इसी कारोबार पर निर्भर थी। दुकान हटने के बाद उन्होंने चार हजार रुपए महीने के किराए पर ट्रक लिया और उसमें चाय-नाश्ते का काम शुरू कर दिया। ग्राहकों की सुविधा के लिए वे इस अस्थाई दुकान को हरसंभव तरीके से चालू रखने की कोशिश कर रहे हैं। प्रशासन की कार्रवाई से नेशनल हाईवे के किनारे अवैध कब्जे तो हट गए हैं, लेकिन छोटे दुकानदारों के सामने अब सीमित संसाधनों के बीच परिवार का भरण-पोषण करने और दोबारा कारोबार खड़ा करने की चुनौती है।
