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Ratlam News: पुलिस विभाग को आवंटित चार बीघा भूमि से प्रशासन ने हटाया अतिक्रमण, ये रहा पूरा मामला
Tue, 11 Feb 2025 10:48 PM IST
रतलाम ब्यूरो
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, रतलाम
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, रतलाम
Published by: रतलाम ब्यूरो
Updated Tue, 11 Feb 2025 10:48 PM IST
सार
रतलाम जिला प्रशासन ने पुलिस विभाग को आवंटित भूमि को जेसीबी की मदद से अतिक्रमण हटाकर मुक्त करवाया। कार्रवाई के दौरान लोगों ने विरोध भी किया। लेकिन प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए अतिक्रमण हटाया।
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हटाया गया अतिक्रमण
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
रतलाम में जिला प्रशासन ने पुलिस विभाग को आवंटित भूमि को जेसीबी की मदद से अतिक्रमण हटाकर मुक्त करवाया। कार्रवाई के दौरान लोगों ने विरोध भी किया। लेकिन प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए अतिक्रमण हटाया। उक्त भूमि वर्ष 2016 में पुलिस विभाग को आवंटित की गई थी।
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रतलाम के हकिमवाड़ा क्षेत्र में वर्ष 2016 में पुलिस विभाग को भूमि आवंटित की गई थी। उक्त भूमि पर कुछ पक्का तो कुछ अस्थाई अतिक्रमण कर लोग निवास कर रहे थे। अतिक्रमण करियों को कई बार अतिक्रमण हटाने के लिए नोटिस जारी किए गए। लेकिन अतिक्रमणकर्ताओं ने कोई ध्यान नहीं दिया। मंगलवार को पुलिस विभाग के अधिकारी राजस्व विभाग व जिला प्रशासन के साथ आवंटित भूमि पर कब्जा लेने पहुंचे। यहां प्रशासन ने करीब चार बीघा से अधिक शासकीय भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया।
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कार्रवाई के दौरान एएसपी राकेश खाखा, एसडीएम अनिल भाना, आरआई मोहन भर्रावत, स्टेशन रोड टीआई स्वराज डाबी, तहसीलदार ऋषभ ठाकुर सहित बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। प्रशासन की यह कार्रवाई शाम तक जारी रही। तहसीलदार ऋषभ ठाकुर ने बताया कि सर्वे नंबर 634 की 0.870 हेक्टेयर जमीन वर्ष 2016 में पुलिस विभाग को आवंटित की गई थी। लेकिन उस पर अवैध कब्जा कर मकान बना लिए गए थे। प्रशासन ने पूर्व में अतिक्रमणकारियों को हटने का नोटिस दिया था, लेकिन अतिक्रमणकर्ताओं ने अपना अतिक्रमण नहीं हटाया, जिसके चलते जिला पुलिस प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और कब्जाधारियों को अपना सामान निकालने का समय दिया।
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मौके पर तीन पक्के मकान और अन्य अस्थायी निर्माण थे, जिन्हें नगर निगम की दो जेसीबी मशीनों की मदद से तोड़ा गया। कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने विरोध जताया, लेकिन प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए अतिक्रमण हटा दिया। प्रशासन ने विरोध करने वालों से मकान से जुड़े दस्तावेज मांगे, लेकिन कोई भी वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाया। रहवासियों का कहना था कि यह भूमि राजा-महाराजाओं के समय से उनके पूर्वजों के पास थी, लेकिन तहसीलदार ऋषभ ठाकुर ने स्पष्ट किया कि यह भूमि 2016 में पुलिस को आवंटित हुई थी और वहां अवैध रूप से लोग रह रहे थे।
