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पीएम मोदी बोले- हम सिर झुकाकर, हाथ जोड़कर हर मुद्दे पर किसानों से बात करने को तैयार हैं

Fri, 18 Dec 2020 03:19 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Sneha Baluni Updated Fri, 18 Dec 2020 03:19 PM IST
खास बातें

कृषि कानूनों को लेकर देश में लगातार 23वें दिन किसानों का आंदोलन जारी है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मध्यप्रदेश के किसानों को संबोधित किया। विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जो काम 25 साल पहले होने थे, वो आज करने पड़ रहे हैं। किसानों की उन मांगों को पूरा किया गया है, जिन्हें बरसों से रोका गया था। प्रधानमंत्री ने कहा कि जिनकी राजनीतिक जमीन खिसक गई है, आज वो किसानों को डरा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमने किसानों को डेढ़ गुना एमएसपी दिया। कांग्रेस द्वारा की गई कर्जमाफी सबसे बड़ा धोखा है। इसका फायदा कांग्रेस के करीबियों और रिश्तेदारों को मिलता था। प्रधानमंत्री ने कहा कि विपक्ष को पीड़ा इस बात की है कि मोदी ने कैसे कृषि कानूनों में सुधार कर दिया। उन्होंने कहा कि आप मुझे क्रेडिट मत दो, मैं केवल किसानों का भला चाहता हूं। किसानों के कंधे पर बंदूक रखकर वार किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि अब भी किसी को आशंका है, तो हम सिर झुकाकर-हाथ जोड़कर हर मुद्दे पर बात करने के लिए तैयार हैं। यहां पढ़ें प्रधानमंत्री के संबोधन की मुख्य बातें-

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : ANI

लाइव अपडेट

02:56 PM, 18-Dec-2020

हम सिर झुकाकर, हाथ जोड़कर बात करने को हैं तैयार

  • अभी 25 दिसंबर को, श्रद्धेय अटल जी की जन्मजयंती पर एक बार फिर मैं इस विषय पर और विस्तार से बात करूंगा। उस दिन पीएम किसान सम्मान निधि की एक और किस्त करोड़ों किसानों के बैंक खातों में एक साथ ट्रांसफर की जाएगी।
  • मेरी इस बातों के बाद भी, सरकार के इन प्रयासों के बाद भी, अगर किसी को कोई आशंका है तो हम सिर झुकाकर, हाथ जोड़कर, बहुत ही विनम्रता के साथ, देश के किसान के हित में, उनकी चिंता का निराकरण करने के लिए, हर मुददे पर बात करने के लिए तैयार हैं।
  • मुझे खुशी है कि देशभर में किसानों ने नए कृषि सुधारों को न सिर्फ गले लगाया है बल्कि भ्रम फैलाने वालों को भी सिरे से नकार रहे हैं। जिन किसानों में अभी थोड़ी सी आशंका बची है उनसे मैं फिर से कहूंगा कि आप एक बार फिर से सोचिए।
  • प्राकृतिक आपदा आ जाए, तो भी किसान को पूरे पैसे मिलते हैं। नए कानूनों के अनुसार, अगर अचानक मुनाफा बढ़ जाता है, तो उस बढ़े हुए मुनाफे में भी किसान की हिस्सेदारी सुनिश्चित की गई है।
02:54 PM, 18-Dec-2020

फार्मिंग एग्रीमेंट में सिर्फ फसलों या उपज का समझौता होता है

  • फार्मिंग एग्रीमेंट में सिर्फ फसलों या उपज का समझौता होता है। जमीन किसान के ही पास रहती है, एग्रीमेंट और जमीन का कोई लेना-देना ही नहीं है।
  • अभी किसी ने मुझे एक अखबार की रिपोर्ट भेजी 8 मार्च 2019 की। इसमें पंजाब की कांग्रेस सरकार, किसानों और एक मल्टीनेशनल कंपनी के बीच 800 करोड़ रुपए के फार्मिंग एग्रीमेंट का जश्न मना रही है। पंजाब के किसान की खेती में ज्यादा निवेश हो, ये हमारी सरकार के लिए खुशी की ही बात है।
  • नए कृषि सुधारों को लेकर तीसरा बहुत बड़ा झूठ चल रहा है फार्मिंग एग्रीमेंट को लेकर। देश में फार्मिंग एग्रीमेंट क्या कोई नई चीज है? नहीं। हमारे देश में बरसों से फार्मिंग एग्रीमेंट की व्यवस्था चल रही है।
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02:51 PM, 18-Dec-2020

एपीएमसी को लेकर फैलाया जा रहा है झूठ

  • नए कानून के बाद एक भी मंडी बंद नहीं हुई है। फिर क्यों ये झूठ फैलाया जा रहा है? सच्चाई तो ये है कि हमारी सरकार एपीएमसी को आधुनिक बनाने पर, उनके कंप्यूटरीकरण पर 500 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च कर रही है। फिर ये एपीएमसी बंद किए जाने की बात कहां से आ गई।
  • नए कानून में हमने सिर्फ इतना कहा है कि किसान चाहे मंडी में बेचे या फिर बाहर, ये उसकी मर्जी होगी। अब जहां किसान को लाभ मिलेगा, वहां वो अपनी उपज बेचेगा।
  • कृषि सुधारों से जुड़ा एक और झूठ फैलाया जा रहा है एपीएमसी यानि हमारी मंडियों को लेकर। हमने कानून में क्या किया है? हमने कानून में किसानों को आजादी दी है, नया विकल्प दिया है।
02:48 PM, 18-Dec-2020

किसानों को एमएसपी पर किया जा रहा है गुमराह

  • आज दाल के किसान को भी ज्यादा पैसा मिल रहा है, दाल की कीमतें भी कम हुई हैं, जिससे गरीब को सीधा फायदा हुआ है। जो लोग किसानों को न एमएसपी दे सके, न एमएसपी पर ढंग से खरीद सके, वो एमएसपी पर किसानों को गुमराह कर रहे हैं।
  • 2014 से पहले के 5 साल में उन्होंने सिर्फ डेढ़ लाख टन दाल ही किसानों से खरीदी। जब साल 2014 में हमारी सरकार आई तो हमने नीति भी बदली और बड़े निर्णय भी लिए। हमारी सरकार ने किसानों से पहले की तुलना में 112 लाख टन दाल एमएसपी पर खरीदी।
  • 2014 के समय को याद कीजिए, किस प्रकार देश में दालों का संकट था। देश में मचे हाहाकार के बीच दाल विदेशों से मंगाई जाती थी।
02:46 PM, 18-Dec-2020

किसानों के खाते में पहुंचा है पहले के मुकाबले ज्यादा पैसा

  • राजनीति के लिए किसानों का उपयोग करने वाले लोगों ने किसान के साथ क्या बर्ताव किया, इसका एक और उदाहरण है, दलहन की खेती।
  • पिछली सरकार के पांच साल में किसानों को धान और गेहूं की एमएसपी पर खरीद के बदले 3 लाख 74 हजार करोड़ रुपए ही मिले थे। हमारी सरकार ने इतने ही साल में गेहूं और धान की खरीद करके किसानों को 8 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा दिए हैं।
  • यानी हमारी सरकार ने न सिर्फ एमएसपी में वृद्धि की, बल्कि ज्यादा मात्रा में किसानों से उनकी उपज को एमएसपी पर खरीदा है। इसका सबसे बड़ा लाभ ये हुआ है कि किसानों के खाते में पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा पैसा पहुंचा है।
02:44 PM, 18-Dec-2020

हमारी सरकार समय- समय पर बढ़ाती है एमएसपी

  • पिछली सरकार ने अपने पांच साल में करीब पौने चार लाख टन तिलहन खरीदा था। हमारी सरकार ने अपने पांच साल में 56 लाख टन से ज्यादा MSP पर खरीदा है। कहां पौने चार लाख और कहां 56 लाख।
  • पिछली सरकार ने अपने पांच साल में किसानों से लगभग 1700 लाख टन धान खरीदा था। हमारी सरकार ने अपने पांच साल में 3000 लाख टन धान किसानों से एमएसपी पर खरीदा है।
  • ये इस बात का सबूत है कि हमारी सरकार एमएसपी समय-समय पर बढ़ाने को कितनी तवज्जो देती है, कितनी गंभीरता से लेती है। एमएसपी बढ़ाने के साथ ही सरकार का जोर इस बात पर भी रहा है कि ज्यादा से ज्यादा अनाज की खरीदारी एमएसपी पर की जाए।
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02:42 PM, 18-Dec-2020

हमने पिछली सरकार की तुलना में दी ज्यादा एमएसपी

  • पिछली सरकार के समय मूंग दाल पर एमएसपी थी 4500 रुपए प्रति क्विंटल। हमारी सरकार मूंग दाल पर करीब 7200 रुपये एमएसपी दे रही है।
  • पिछली सरकार के समय चने पर एमएसपी थी 3100 रुपए। हमारी सरकार अब चने पर प्रति क्विंटल 5100 रुपए एमएसपी दे रही है।
  • पिछली सरकार के समय मसूर की दाल पर एमएसपी थी 2950 रुपए। हमारी सरकार प्रति क्विंटल मसूर दाल पर 5100 रुपए एमएसपी दे रही है।
  • पिछली सरकार में ज्वार पर एमएसपी थी 1520 रुपए प्रति क्विंटल। हमारी सरकार ज्वार पर प्रति क्विंटल 2640 रुपए एमएसपी दे रही है।
  • पिछली सरकार के समय धान पर एमएसपी थी 1310 रुपए प्रति क्विंटल। हमारी सरकार प्रति क्विंटल धान पर करीब 1870 रुपए एमएसपी दे रही है
  • पिछली सरकार के समय गेहूं पर एमएसपी थी 1400 रुपये प्रति क्विंटल। हमारी सरकार प्रति क्विंटल गेहूं पर 1975 रुपए एमएसपी दे रही है।
02:38 PM, 18-Dec-2020

पहले की तरह दी जाती रहेगी एमएसपी

  • मैं देश के प्रत्येक किसान को ये विश्वास दिलाता हूं कि पहले जैसे एमएसपी दी जाती थी, वैसे ही दी जाती रहेगी, एमएसपी न बंद होगी, न समाप्त होगी।
  • 6 महीने से ज्यादा का समय हो गया है, जब ये कानून लागू किए गए थे। कानून बनने के बाद भी वैसे ही एमएसपी की घोषणा की गई, जैसे पहले की जाती थी। कोरोना महामारी से लड़ाई के दौरान भी ये काम पहले की तरह किया गया। एमएसपी पर खरीद भी उन्हीं मंडियों में हुई, जिन में पहले होती थी।
  • अगर हमें एमएसपी हटानी ही होती तो स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट लागू ही क्यों करते? दूसरा ये कि हमारी सरकार एमएसपी को लेकर इतनी गंभीर है कि हर बार, बुवाई से पहले एमएसपी की घोषणा करती है। इससे किसान को भी आसानी होती है, उन्हें भी पहले पता चल जाता है कि इस फसल पर इतनी एमएसपी मिलने वाली है।
02:36 PM, 18-Dec-2020

हमारे कृषि कानून नहीं हैं अविश्वास का कारण

  • मैं विश्वास से कहता हूं कि हमने हाल में जो कृषि सुधार किए हैं, उसमें अविश्वास का कारण ही नहीं है, झूठ के लिए कोई जगह ही नहीं है।
  • मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए हमारी सरकार ब्लू रिवॉल्यूशन स्कीम चला रही है। कुछ समय पहले ही 20 हजार करोड़ रुपए की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना भी शुरू की गई है। इन्हीं प्रयासों का ही नतीजा है कि देश में मछली उत्पादन के पिछले सारे रिकॉर्ड टूट गए हैं।
  • हमारी सरकार अनाज पैदा करने वाले किसानों के साथ ही मधुमक्खी पालन, पशुपालन और मछली पालन को भी उतना ही बढ़ावा दे रही है।
02:33 PM, 18-Dec-2020

हम हर खेत तक पानी पहुंचाने का काम कर रहे हैं

  • अब हमारी सरकार हजारों करोड़ रुपए खर्च करके इन सिंचाई परियोजनाओं को मिशन मोड में पूरा करने में जुटी है। हम हर खेत तक पानी पहुंचाने के लिए काम कर रहे हैं।
  • अगर पुरानी सरकारों को चिंता होती तो देश में 100 के करीब बड़े सिंचाई प्रोजेक्ट दशकों तक नहीं लटकते। सोचिए, बांध बनना शुरू हुआ तो पच्चीसों साल तक बन ही रहा है। इसमें भी समय और पैसे, दोनों की जमकर बर्बादी की गई।
  • आज यूरिया की किल्लत की खबरें नहीं आतीं, यूरिया के लिए किसानों को लाठी नहीं खानी पड़तीं। हमने किसानों की इस तकलीफ को दूर करने के लिए पूरी ईमानदारी से काम किया। हमने कालाबाजारी रोकी, सख्त कदम उठाए, भ्रष्टाचार पर नकेल कसी। हमने सुनिश्चित किया कि यूरिया किसान के खेत में ही जाए
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